जनवाणी ब्यूरो |
यूपी: गाजीपुर जिले के तीन ब्लॉकों के 11 गांवों में 43 बच्चे और युवा ऐसे पाए गए हैं जिन्हें बुखार के बाद झटका आया और इसके परिणामस्वरूप वे मानसिक रूप से कमजोर हो गए हैं। इस बीमारी ने इन्हें दिव्यांग बना दिया है। माता-पिता अब अपने बच्चों को रस्सी या चेन से बांधकर रखते हैं ताकि वे खुद को या दूसरों को नुकसान न पहुंचा सकें।
प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों और युवाओं की स्थिति
ये बच्चे 14 महीने के छोटे से लेकर 22 साल तक के युवा हैं। प्रभावित गांवों का समूह करीब 5 किमी के दायरे में स्थित है, जिसमें देवकली, सदर और मनिहारी ब्लॉकों के छह गांव शामिल हैं। डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों में चिकित्सा शिविर आयोजित कर बीमारों की जांच की है।
सीएमओ ने जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने प्रभावित क्षेत्रों की जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है। वहीं, बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर विजयनाथ मिश्रा ने बताया कि उनकी टीम जल्द ही इस बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए इन गांवों का दौरा करेगी।
समाजसेवी सिद्धार्थ राय ने दी जानकारी
समाजसेवी सिद्धार्थ राय ने बताया कि यह बीमारी तीन महीने पहले एक मुट्ठी अनाज मांगने के अभियान के दौरान सामने आई थी। जब वे इन गांवों में पहुंचे, तो बच्चों की खस्ता हालत देख उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने बताया कि सदर, देवकली और मनिहारी ब्लॉकों में उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति देखी और कई पीड़ितों का इलाज भी कराया गया था।
प्रभावित गांवों में बच्चों की संख्या
गाजीपुर जिले के विभिन्न गांवों में इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की संख्या है।
फत्तेहउल्लाहपुर (बहादीपुर) में 4 बच्चे,
हरिहरपुर (मनिहारी ब्लॉक) में 4,
हाला गांव में 6,
शिकारपुर (देवकली ब्लॉक) में 8,
धारीकला में 4,
तारडीह में 7,
भौरहा (सदर ब्लॉक) में 2,
बुढ़नपुर में 2,
राठौली सराय में 4,
खिजीरपुर और खुटहन में 1-1 बच्चा इस बीमारी से प्रभावित हैं।
एक ही परिवार के दो बहनें और तीन बच्चे दिव्यांग
फत्तेहउल्लाहपुर के बहादीपुर गांव की सलोनी बिंद, रमिता, सोनी समेत कई बच्चों के दिव्यांग होने की खबर सामने आई है। इसके अलावा, हरिहरपुर के राजू चौहान की दो बेटियां, शिकारपुर के अर्जुन, धारीकला के रोशनी बिंद और तारडीह के आशीष गुप्ता जैसे बच्चे भी इस बीमारी से पीड़ित हैं।
सीएमओ के नेतृत्व में मेडिकल टीम पहुंची जांच करने
जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएमओ के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर बच्चों की जांच की। साथ ही दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी पारसनाथ यादव की टीम भी जांच कार्य में जुटी हुई है।
जंजीरों में बंधे बच्चों का दर्द
समाजसेवी सिद्धार्थ राय ने बताया कि इस बीमारी की गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में माता-पिता अपने बच्चों को रस्सी या चेन से बांधकर रखते हैं। बच्चे मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण भागने लगते हैं या फिर खुद को और दूसरों को चोट पहुंचाते हैं। अब यह जिम्मेदारी वृद्ध माता-पिता के कंधों पर आ पड़ी है।
स्वास्थ्य विभाग की कोशिशें और अधिकारियों से गुहार
सिद्धार्थ राय ने पहले जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लिया था। बाद में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से भी मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने इस बारे में बताया कि यह कोई रहस्यमयी बीमारी नहीं है। दिव्यांगता की वजह गर्भावस्था के दौरान किसी प्रकार का वायरल बुखार हो सकती है।
सीएमओ को निर्देश, गंभीर बच्चों का इलाज होगा
सीएमओ को निर्देश दिया गया था कि वे प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर बच्चों का इलाज करें। गंभीर रूप से प्रभावित बच्चों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जाएगा। साथ ही जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाई जाएगी।

