Sunday, February 15, 2026
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मेरठ के चीनी मिलों पर 800 करोड़ बकाया

  • कई चीनी मिलों पर पिछले सत्र का भी है बकाया
  • गन्ने का भुगतान 14 दिन होने का दावा हवा-हवाई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पश्चिमी यूपी में किसानों को गन्ने का भुगतान 14 दिन में नहीं हो पा रहा हैं। किसानों की मांग है कि सरकार गन्ना भुगतान के लिए किये वादे को निभाये। गन्ना भुगतान का मुद्दा हाल ही विधानसभा में भी उठ चुका हैं, इसके बावजूद गन्ना भुगतान की दिशा में प्राइवेट चीनी मिलों ने कोई कदम नहीं उठाये हैं।

कई ऐसे चीनी मिल है, जिन पर पिछले सत्र का भी बकाया है। उन पर भी चाबुक नहीं चल पा रही हैं। पिछले दिनों गन्ना मंत्री लक्ष्मीनाराण चौधरी दौरा कर अफसरों व मिल प्रबंधकों से बातचीत भी करके गए थे, लेकिन उनके दबाव के बावजूद बकाया गन्ना भुगतान अभी आरंभ नहीं किया हैं।

मेरठ में गन्ना किसानों का करीब 800 करोड़ रुपया अभी भी शुगर मिलों पर बकाया है। मेरठ जिले में 2021-2022 सत्र में लगभग 2681 करोड़ रुपये से भी अधिक का गन्ना किसानों ने शुगर मिलों पर डाला है। अब तक कुल 1825 करोड़ रुपये का भुगतान भी हो चुका है, जबकि करीब 800 करोड़ रुपये से भी अधिक का गन्ना भुगतान अभी भी बकाया है। किसानों का कहना है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक ये भुगतान 14 दिन में करें और अपना वादा निभाये।

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योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2.0 से ठीक पहले भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में गन्ने के भुगतान को समय से कराने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। विधानसभा चुनाव से पहले जारी संकल्प पत्र में 14 दिन में गन्ना किसानों का भुगतान हो इस बारे में भी भरोसा जताया था। वहीं, गन्ने की पेराई सत्र समाप्त हो चुका है। एक माह से भी अधिक का समय हो चुका है, लेकिन 14 दिन में गन्ना किसानों का भुगतान का इंतजाम अभी तक नहीं हुआ है।

हालांकि अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो मेरठ जिले में गन्ना नीतियों में हुए बदलाव और उनकी निगरानी होने से इस वित्तीय वर्ष में गन्ना किसानों के पेमेंट में तेजी तो दिखाई है। सरकारी विभाग का दावा है कि इस वित्तीय वर्ष का 69 फीसदी किसानों के गन्ने का भुगतान किया जा चुका है, जबकि मिले महीने भर से भी अधिक समय से बंद हैं, लेकिन 14 दिन में गन्ने का भुगतान का वायदा पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा।

छपरौली के रालोद विधायक डा. अजय कुमार ने विधानसभा में गन्ना बकाया का मुद्दा उठाया भी, लेकिन अभी गन्ना भुगतान आरंभ नहीं हुआ है। किसान गन्ना इसलिए उगाता है कि इसे बिक्री करने पर मिलने वाली रकम से वो अपने घर परिवार का खर्च चला सके। ऐसे में गन्ने की फसल सबसे मुफीद साबित होती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार 14 दिन में किसान के गन्ने का भुगतान करने का वायदा करती है तो उसे अमल में भी लाया जाए।

राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहित जाखड़ ने कहा कि 14 दिन में गन्ने का पेमेंट सरकार नहीं कर पा रही है। इसलिए उनकी मांग है कि जल्द ही गन्ना का भुगतान किया जाएं अन्यथा प्रदेशभर में किसानों के समर्थन में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

वहीं, इस संबंध में जिला गन्ना अधिकारी दुष्यंत कुमार का कहना है कि गन्ना किसानों को लेकर सरकार बेहद गंभीर है। इस बार गन्ने के भुगतान की स्थिति में काफी सुधार है। पिछले पेराई सत्र का जहां मेरठ में शत प्रतिशत भुगतान हो चुका। वहीं, इस पेराई सत्र का 69 फीसदी भुगतान शुगर मिलों के द्वारा किया जा चुका है।

गन्ना भुगतान के तुलनात्मक आंकड़े

2020-2021 पेराई स्तर की तुलना में इस बार कम गन्ना मिलों पर पहुंचा है। 2021-2022 सत्र में कुल 77657 लाख कुंतल की खरीद हुई है। फिलहाल दो लाख 68 हजार 169 लाख रुपये का गन्ना किसानों ने शुगर मिलों पर डाला, जबकि अब तक कुल 182549.04 लाख का भुगतान किसानों का हुआ है। यानी करीब 800 करोड़ रुपये से भी अधिक का गन्ना भुगतान बकाया है। 14 दिन पर ब्याज के साथ भुगतान सरकार ने कहा था, लेकिन किसान चाहता है सरकार जल्द से जल्द इसका भुगतान करें।

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