- स्थायी हल निकालेगी सरकार, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने तैयार किया पायलट प्रोजेक्ट
- प्रयागराज के मन्दरदेह माफी में लग रहा गोबर गैस प्लान्ट, मिलेगी गैस, बिजली और जैविक खाद
- अभिनव पहल से गोवंश भी सुरक्षित रहेंगे और किसानों के खेत भी
गिरीश पांडेय हाल में सम्पन्न हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में छुट्टा गोवंशीय पशुओं की भी चर्चा रही। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाने का भरसक प्रयास किया। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर इस बाबत अब तक किए गए प्रयासों पर लोगों ने भरोसा किया। लिहाजा इस मुद्दे पर विपक्ष की दाल नहीं गल सकी।
जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस बार सरकार इस समस्या के स्थायी हल के प्रति बेहद गंभीर है। ऐसा स्थाई हल तभी निकलेगा जब छुट्टा गोवंश के बाइप्रोड्क्टस (सह उत्पाद) को स्थानीय जरूरतों के अनुसार उपयोगी बनाया जाय। इस संबंध में सरकार के साथ कुछ विभाग भी अपने स्तर से पहल कर रहे हैं।
इस बाबत अभिनव पहल करते हुए 5000 गोवंश को मानक मानते हुए पायलट प्रोजेक्ट के रूप उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड ने प्रयागराज की ग्राम सभा मन्दरदेह माफी में गोबर गैस प्लान्ट की स्थापना किये जाने की दिशा में कार्य शुरू किया है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो विभाग इसे पूरे प्रदेश में लागू करेगा।
क्या है प्रोजेक्ट
उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से मन्दरदेह माफी में स्थापित किए जाने वाले गोबर गैस प्लान्ट के लिए 0.573 हेक्टेयर भूमि का आवंटन बोर्ड के पक्ष हो चुका है। ग्राम सभा मन्दरदेह माफी एवं उसके पास के गांवों को जोड़कर लगभग 5000 गोवंश की उपलब्धता है।
प्रस्तावित गोबर गैस प्लान्ट से प्रतिदिन 720 क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन होगा। इस गैस की उपयोगिता ईंधन के रूप में लगभग 637 परिवारों को प्राप्त होगी। जनरेटर के माध्यम से गैस से विद्युत ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग लाभान्वित होंगे। ग्रामीण क्षेत्र में उपयोग में आने वाली गैस के अतिरिक्त उत्पादित गैस को कम्प्रेस करके छोटे सिलेण्डरों में भरकर बेचा जा सकेगा। जिसका उपयोग वाहन संचालन इत्यादि में किया जाएगा।
गैस के अलावा रोज करीब 5.4 टन जैविक खाद का उत्पादन होगा। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। खाद की बिक्री से आय के स्रोत भी बढ़ेंगे। उक्त योजना से ग्रामीण क्षेत्र में छुट्टा गोवंश की समस्या से निजात मिलेगी। गोवंश पालने के लिए राज्य सरकार द्वारा दिये जा रहे अनुदान के अतिरिक्त गोबर क्रय किये जाने के नाते स्थानीय स्तर पर आय का अतिरिक्त जरिया सृजित होगा। समग्र रूप में दुधारू एवं छुट्टा गोवंश की उपयोगिता बढ़ेगी। यही नहीं, एक इकाई से स्थानीय स्तर पर 100 लोगों को रोजगार मिलेगा। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3 करोड़ रुपये आएगी।
गोवंश के साथ किसानों की खेती को बचाना उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार का संकल्प है। इस समस्या के स्थाई हल के बाबत बतौर पायलट प्रोजेक्ट बोर्ड ने यह पहल की है। यह गोवंश और खेती की सुरक्षा के साथ स्वच्छ एवं स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार करने में भी मददगार बनेगी।
-नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव, उप्र खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड

