- साफ-सुथरी हुई टेंडर प्रक्रिया, फिर चला सेटिंग-गेटिंग का महाखेल
- डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के नाम पर हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कैंट बोर्ड में करोड़ों का घोटाला सामने आया हैं। यह घोटाला हुआ है डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के नाम पर। दरअसल, विजय अग्रवाल नामक व्यक्ति की कंपनी के नाम पर कैंट बोर्ड से डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का टेंडर हैं। टेंडर प्रक्रिया एकदम साफ-सुथरी हुई, लेकिन इसके बाद अधिकारियों और ठेकेदार के बीच जो सेटिंग का खेल चला, उसमें करोड़ों का घालमेल कर दिया गया।
15.60 लाख का टेंडर कंपनी का हुआ, मगर भुगतान 18.57 लाख का कर दिया। बोर्ड में प्रस्ताव तो पास हुआ, लेकिन जिस दिन से प्रस्ताव पास हुआ, उससे आगे का भुगतान 18.57 लाख का प्रत्येक माह होना चाहिए था, लेकिन एक वर्ष पीछे तक का भुगतान 18.57 लाख के हिसाब से कर दिया गया है। यह भुगतान प्रत्येक माह किया गया। तीन वर्ष के लिए यह टेंडर हुआ था। 2016 से यह टेंडर चल रहा हैं।

एमएसडब्ल्यू रुल के अनुसार। 2019 में नया टेंडर 18.57 लाख का कैसे कर दिया गया, जब कैंट बोर्ड में ठेकेदार विजय अग्रवाल ने लिखित में दिया है कि तीन वर्ष तक उनकी कंपनी 15.60 लाख रुपये में प्रत्येक माह कैंट क्षेत्र का डोर टू डोर जाकर कूड़ा संकलन करेगी। लिखित में ठेकेदार सहमत था तो फिर कैसे भुगतान बढ़ाकर 18.57 लाख कर दिया गया। यही नहीं, घोटाले का खुलासा तब हुआ जब ठेकेदार ने कैंट बोर्ड आॅफिस में बाउचर 15.60 लाख के लगाये गए थे। सीईओ नावेन्द्रनाथ ने कार्यभार संभाला 2020 अक्टूबर में।
दिसंबर 2020 18.57 लाख का भुगतान बिना बोर्ड की अनुमति के बिल कैसे समेट कर दिये। यह बड़ा सवाल है। 21 जनवरी 2021 को बोर्ड बैठक हुई, उससे पहले ही बढ़े हुए रेट के बाउचर कैंट बोर्ड आॅफिस में कैसे स्वीकार कर लिये गए? इसमें कहीं न कहीं बड़ी सेटिंग हुई, जिसका खुलासा ये बाउचर कर रहे हैं, जिनकी प्रति ‘जनवाणी’ के पास में भी मौजूद हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जब ठेकेदार 15.60 लाख में प्रति माह तीन वर्ष तक कूड़ा उठाने को तैयार थे तो फिर भुगतान क्यों बढ़ाया गया?
क्योंकि ठेकेदार का सहमति पत्र भी कैंट बोर्ड के दस्तावेज में मौजूद हैं। इसमें बड़ा खेल हुआ, जिसमें कैंट बोर्ड के अधिकारी से लेकर ठेकेदार के बीच सेटिंग हुई और करोड़ों का चूना सरकारी खजाने को लगा दिया गया। इसकी पहली बार शिकायत छह दिसंबर 2021 को हुई, जिसे दबा दिया गया। यह शिकायत किसी बाहरी व्यक्ति की नहीं, बल्कि कैंट बोर्ड में कार्यरत एक अधिकारी की है।
वहीं, इस संबंध में मनोनित पार्षद छावनी बोर्ड, सतीशचंद शर्मा का कहना है कि कैंट बोर्ड में यह घोटाला हुआ हैं। इसकी शिकायत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम आला अफसरों को भेजी गई हैं। इस घोटाले की जांच होनी चाहिए, जिसमें दोषी आला अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घोटाले में कौन-कौन लिप्त हैं?
मैन पावर में भी हुआ खेल
डोर-टू-डोर छावनी क्षेत्र में कूड़ा कलेक्शन करने के टेंडर की छानबीन जनवाणी ने की तो मालूम हुआ कि 97 सफाई कर्मचारी ठेकेदार को कैंट में सफाई के लिए दिये जाने थे, लेकिन दिये सिर्फ 76, आठ वार्ड हैं, जिसमें आठ सफाई निरीक्षक (इंस्पेक्टर) लिखित में देना बताया गया, लेकिन मौके पर एक भी नहीं। टाटा एस गाड़ी आठ देने के लिए कहा गया और आठ ही चालक देने का एग्रीमेंट हुआ, लेकिन दिये एक भी नहीं।
तीन डंपर और तीन चालक देना एग्रीमेंट में बताया गया, लेकिन मौके पर एक भी नहीं दिया। इस तरह से जो एग्रीमेंट ठेकेदार और कैंट बोर्ड के बीच हुआ, वह भी पूरा नहीं किया गया। इसमें भी दी गई धनराशि की कटौती की मांग की गई। प्रत्येक माह तीन लाख की कटौती नियमानुसार होनी चाहिए थी, लेकिन उलटे बढ़ाकर भुगतान कर दिया गया। इस तरह से 3.24 लाख की प्रत्येक माह कटौती होनी चाहिए थी।
लालबत्ती और चलती रही मीटिंग
घोटाले की खबर मीडिया के पास पहुंची तो कैंट बोर्ड में हड़कंप मच गया। मीडिया के लोग भी कैंट आॅफिस वर्जन जानने के लिए सीईओ के पास पहुंचे तो उनके आॅफिस के बाहर लालबत्ती जल रही थी। पूछने पर बताया गया कि भीतर मीटिंग चल रही हैं। मीटिंग देर शाम तक चली। घोटाले की खबर ने अधिकारियों को परेशानी में डाल दिया। इस घोटाले को लेकर कैसे निपटा जाए? इसी को लेकर अधिकारी बंद कमरें में रणनीति बनाते हुए दिखाई दिये।

