- राजबीर की फोटो शूटर को दी, वाट्सऐप काल से बातें की
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कृषि विवि के प्रो. राजबीर सिंह की हत्या करवाने के लिये प्रो. आरती भटेले ने अपने अवैध संबंधों का पूरा फायदा उठाया और योजनाबद्ध तरीके से हमला करवाया। अपने प्रेमी के साथ फूलप्रूफ योजना बनाई, लेकिन शूटर के पकडेÞ जाने के बाद पूरी कहानी सामने आ गई। महिला प्रोफेसर का शातिराना अंदाज देखिये जिस वक्त प्रो. राजबीर पर हमला हो रहा था उस वक्त वो अपने प्रेमी के साथ शॉप्रिक्स घूम रही थी।

प्रो. राजबीर सिंह की हत्या कराने के लिये प्रॉपर्टी डीलर अनिल बालियान और प्रो. आरती भटेले ने राजबीर सिंह की घर से लेकर कृषि विश्वविद्यालय तक की रेकी करायी व गाड़ी नंबर नोट कराया व डा. राजबीर सिंह का फोटो दिया था। रेकी वाले दिन ही अनिल ने लाइसेन्सी पिस्टल .30 बोर व 9 मैगजीन जिनमे 7-7 राउंड भरे हुए थे आशु चढ्ढा को दिये और कहा था कि डा. राजबीर सिंह पर हमले के समय अगर तमंचा काम न करे तो यह पिस्टल प्रयोग कर लेना यह बहुंत अच्छा पिस्टल है।
जिसकी मारक क्षमता भी बहुत अधिक है। इसके अलावा शूटर को एक लाख रुपये कैश दिये थे तथा चार लाख रुपये काम होने के बाद देने को कहा गया था। 11 मार्च को अनिल ने डा. आरती भटेले को वाट्सऐप काल करके अपने पास बुलाया था। डा. आरती भटेले गाड़ी से समय करीब साढ़े तीन बजे अनिल के घर गई थी। डा. भटेले की गाड़ी कालोनी मे खड़ी करके अनिल व डा. आरती भटेले गाड़ी से बाजार से खरीदारी करने के लिए जानबूझकर गये ताकि दोनों घटना के समय कैमरों के सामने रहेंगे किसी को कोई शक न होगा।
इसके बाद दोनों लोग दोनो शॉप्रिक्स माल गये फिर सदर बाजार गये। रात्रि साढ़े आठ बजे के करीब दोनों लोग वापस आये और तय किया कि अब एक-दूसरे को कॉल नहीं करेंगे। जो भी कॉल करेंगे वाट्सऐप कॉल करेंगे और आपस में नहीं मिलेंगे। इसके बाद डा. आरती भटेले कैम्पस में चली गयी। एसएसपी ने बताया कि जब केस खुलने के करीब आया तो डा. आरती अवकाश लेकर चली गई। बहुत जल्द इनको भी गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा।
मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी है आरती
वेटेनरी डीन पर हुए जानलेवा हमले की सूत्रधार प्रो. आरती भटेले मध्य प्रदेश के छतरपुर की रहने वाली है। 51 वर्षीया आरती और अनिल बालियान के प्रेम संबंधों के चर्चे विवि के परिसर में लोगों की जुबान पर थे, लेकिन कोई भी बोलने को तैयार नहीं रहता था। परिसर में लोगों का कहना था कि आरती ने अवैध संबंध बनाकर न केवल अपना जीवन खराब किया, बल्कि प्रॉपर्टी डीलर के वैवाहिक जीवन को खत्म कर दिया। यही नहीं राजबीर सिंह की जिंदगी खतरे में डाल दी।
शातिर बदमाश है शूटर
प्रो. राजबीर सिंह पर जानलेवा हमला करने वाला शूटर आशु चढ्ढा काफी शातिर है। इसके खिलाफ हत्या के चार मुकदमों समेत लूट, जानलेवा हमले, चोरी और बरामदगी के 25 से अधिक मुकदमे हापुड़, गाजियाबाद और मेरठ के थानों में दर्ज है। इसके अलावा दूसरे शूटर नदीम के हापुड़ और मेरठ में लूट, चोरी और जानलेवा हमले के मुकदमे दर्ज हैं।
नियुक्तियां बनी सिरदर्द
मोदीपुरम: कृषि विश्वविद्यालय में इस समय बड़े पैमाने पर नियुक्तियां चल रही है। नियुक्तियों को लेकर ही इस वारदात के तार जोड़े गए हैं। हालांकि पुलिस ने खुलासे में प्रो. डा. आरती भटेले को डीन बनने के लिए इस तरह की वारदात अंजाम देने की बात कही गई है, लेकिन विश्वविद्यालय में सबसे अहम् विषय इस समय नियुक्तियां है, क्योंकि इन लोगों पर हर किसी की निगाहें लगी हुई है।
कृषि विवि में छाई खामोशी
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में डीन डा. राजबीर सिंह पर हमला प्रो. डा. आरती भटेले द्वारा षड्यंत्र रचकर कराया गया था। इस खुलासे की सूचना जैसे ही मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुई वैसे ही विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया। हर कोई सकते में रह गया कि आखिर इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने में विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ही शामिल निकली। हालांकि घटना का खुलासा होने के बाद से विश्वविद्यालय में कोई भी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। खुद विश्वविद्यालय के शिक्षक परेशानी में दिखाई दे रहे हैं।
जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे डा. राजबीर सिंह
बेहद सरल स्वभाव वाले डा. राजबीर सिंह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। दिमाग तो उनका रेस्पांस दे रहा हैं, मगर पूरा नहीं। एक आंख को डॉक्टर नहीं बचा सके। एक आंख का आॅपरेशन किया, लेकिन कामयाब नहीं हुआ, जिसके बाद पत्थर की आंख लगा दी गई हैं। मुंह का भी आॅपरेशन किया गया है, जिसमें दो गोली लगी थी। पहले से कुछ बेहतर हुआ हैं, लेकिन पूरी तरह से फिट नहीं हैं।

इस तरह से डा. राजबीर सिंह जिदंगी से जूझ रहे हैं। कब पूरी तरह से फिट होकर घर लौटेंगे, अभी डॉक्टर भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। मूलरूप से बागपत के हेवा गांव के रहने वाले डा. राजबीर सिंह पहले जनता वैदिक डिग्री कॉलेज बड़ौत (बागपत) में तैनात थे। करीब बारह वर्ष पहले डा. राजबीर सिंह की तैनाती कृषि विश्वविद्यालय मोदीपुरम में हो गई थी। तब से राजबीर सिंह यहां अपनी बेहतर सेवा दे रहे थे।
अचानक हुए हमले से उनके शरीर को भारी नुकसान पहुंचा हैं। दांयी तरफ की आंख पूरी तरह से नष्ट हो गई, जिसका डॉक्टरों ने आॅपरेशन कर आंख की रोशनी लौटाने का प्रयास किया, मगर इसमें डॉक्टर विफल रहे। अब डा. राजबीर सिंह सिर्फ एक आंख से ही देख पाएंगे। मुंह में भी दो गोली लगी थी, जिसमें उनका जुबाड़ा का भी आॅपरेशन हुआ हैं। माथे में दो गोली लगी थी, जिसको डॉक्टरों ने नहीं निकाला।
क्योंकि उन दो गोली से किसी तरह की दिक्कत नहीं हैं। इसी वजह से उन दो गोलियों को निकाला नहीं गया। जाघ का भी आॅपरेशन हुआ हैं, उसमें भी दो गोली लगी हैं। परिजनों ने उम्मीद जाहिर की है कि पहले से स्थिति बेहतर हुई हैं, लेकिन पूरी तरह फिट नहीं।

