
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अगर आपसे कोई कहे कि यूक्रेन के आजोव सैनिक मारियुपोल में नागरिकों के ऊपर अत्याचार ढा रहे हैं, तो आप शायद यकीन न करें, लेकिन यह सच है। ज्ञात हो कि मारियुपोल यूक्रेन से लगा दोनबास का वह हिस्सा है, जहां रूस समर्थित विद्रोही सक्रिय हैं। जब 20 मार्च 2022 कोमानवीय मिशन मारियुपोल के उत्तर-पूर्वी उपनगर सरताना के पास पहुंचा तो उसे वहां बेहद चौंकाने खबरें मिलीं। वहां के कई नागरिकों ने मानवीय मिशन को अपनी आप बीती सुनाई। भला हो रूसी और डीपीआर (डोनेटस्क पीपुल्स रिपब्लिक) सैनिकों का, जिनके चलते इन नागरिकों की जान बच पाई! इस इलाके में कई सप्ताह तक यूक्रेन के नव-नाजी आजोव सैनिकों ने मारियुपोल के स्थानीय निवासियों पर जमकर कहर बरपाया।
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आजोव सैनिकों ने मारियुपोल प्रसूति अस्पताल को जबरन खाली करा लिया और प्रसूति अस्पताल को एक सैन्य अड्डे में बदल दिया और आजोव रेजिमेंट के सेनानियों ने वहां अपनी बंदूकें तैनात कर दीं और फायरिंग की स्थिति में बैठ गए। अस्पतालअब मरीजों के इलाज लायक नहीं रह गया। इसके साथ ही यह भी सच है कि रूसी सेना द्वारा बमबारी से मारियुपोल के थिएटर को कोई नुक्सान नहीं हुआ था, बल्कि उसे आजोव सैनिकों ने उड़ा दिया था!
इतना ही नहीं, यूक्रेनी सैनिक चाहे वे नियमित सेना के हों या नव-नाजी आजोव रेजिमेंट से हों, उन्होंने नागरिकों को मारियुपोल से बाहर नहीं जाने दिया। उन्होंने शहर को खाली करने की कोशिश कर रहे कारों पर गोली चलाई और लाश को राजमार्ग पर छोड़कर चले गए। इस खबर की पुष्टि अन्य नागरिकों की गवाही से भी होती है, जिनका अन्ना न्यूज के सहयोगियों द्वारा साक्षात्कार लिया गया था।
यूक्रेनी सेना आम नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है। क्रूर अजोव सैनिक महिलाओं को तहखाने में खींच ले गए और उनके साथ दुष्कर्म किया। उनमें से कुछ नाबालिग भी थीं। लेकिन स्थानीय निवासी दुष्कर्म के बारे में खुलकर बात नहीं करते। इस बात की पुष्टि डीपीआर (डोनेटस्क पीपुल्स रिपब्लिक) द्वारा बरामद किए गए पूर्व कैदियों ने भी की कि मारियुपोल से युवा लड़कियां गायब हो रही हैं, उनके साथ नव-नाजी सैनिकों द्वारा दुष्कर्म किया गया और फिर उन्हें मार दिया गया। अजोव सैनिकों द्वारा इस इलाके में विरोध की आवाज उठाने वाले लोगों को जेलों में प्रताड़ित किया जाता रहा है।
रूस द्वारा समर्थित डीपीआर सैनिकों ने जब इस इलाके पर अपना कब्जा जमाया तो कई बातें निकल कर सामने आ सकीं। मारियुपोल हवाई अड्डे के तहखाने में स्थित ‘द लाइब्रेरी’ नामक प्रसिद्ध गुप्त जेल के बारे में पता चला। यह हवाई अड्डा भी डीपीआर के नियंत्रण में आ गया है (जो पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों को अमान्य करता है कि मारियुपोल में रूसी सेना अब आगे नहीं बढ़ पा रही है, यहां तक कि पीछे हट रही है)।
इससे जांच करना और सबूत खोजने का प्रयास अब संभव हो गया है। पूर्व कैदियों के कई साक्ष्यों रिकॉर्ड किया गए हैं। पूर्व एसबीयू एजेंटवासिली प्रोजोरोव ने भी अपराधों की निंदा की है। पश्चिमी मीडिया की प्रोपगेंडा फैलाने वाली खबरों से अलग अगर देखें तो वर्तमान में मारियुपोल शहर का 50 प्रतिशत हिस्सा अब रूसी सेना और डीपीआर पीपुल्स मिलिशिया के नियंत्रण में है, जिसमें अजोवस्टल फैक्ट्री भी शामिल है।
रूस द्वारा आजाद कराए गए इलाकों (डोनेटस्क पीपुल्स रिपब्लिक) में, बिजली, गैस और पानी की आपूर्ति बहाल करने की जद्दोजहद चल रही हैं। 16 नई बस्तियों में बिजली की बहाली हो गई है। उस अस्पताल की मरम्मत का काम भी शुरू हो गया है, जिसे यूक्रेनी सैनिकों द्वारा फायरिंग पोजीशन के रूप में इस्तेमाल किया गया था और नष्ट कर दिया गया था। ये तथ्य भी सामने आए हैं कि यूक्रेनी सैनिक आम नागरिक के बुनियादी ढांचे के उपयोग अपने सैन्य उद्देश्य के लिए कर रही है।
जैसे रूसी सेना ने अपने एक ड्रोन द्वारा फिल्माया कि कैसे कीव से एक यूक्रेनी मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर फायरिंग करने के बाद एक शॉपिंग सेंटर में र्इंधन भरने के लिए गया, जिसे गोला-बारूद के भंडार में तब्दील कर दिया गया था। इसके बाद उस शॉपिंग सेंटर को रूसी मिसाइल हमले में नष्ट कर दिया गया। नागरिकों द्वारा फिल्माए गए अन्य वीडियो भी यूक्रेनी सैनिकों द्वारा शॉपिंग सेंटर के इस उपयोग की पुष्टि करते हैं।
यूक्रेन मीडिया भी विवादों से घिरता नजर आ रहा है। पत्रकार फखरौद्दीन चरफमल ने एक टीवी कार्यक्रम में नाजीवादी एडॉल्फ इचमैन का उद्धरण देते हुए कहा कि वे रूस को नष्ट करने के लिए रूसी बच्चों को मारने के लिए तैयार थे (जिसके लिए उन्हें टीवी चैनल से न केवल निकाल दिया गया, बल्कि यह कहते हुए माफी मांगनी पड़ी कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी)। एक यूक्रेनी डॉक्टर मेंजेल गुएनाडी ड्रोजें को का वीडियो भी सामने आया जो उसी टीवी चैनल परकहते हुए पाया गया कि… रूसी इंसान नहीं हैं, वे तिलचट्टे हैं, जिन्हें मसल देना चाहिए… बाद में रूसी सैनिकों द्वारा पकड़े जाने पर यूक्रेनी डॉक्टर मेंजेल ने बयान बदल दिया।
यूक्रेन में रूसी सैन्य अभियान के इर्द-गिर्द सूचना युद्ध तेजी से चल रहा है। झूठी सूचनाओं का तेजी से प्रसार होता जा रहा है। रूसी मीडिया साइटों को हैक कर लिया गया है। इसके चलते रूस की ओर से खबर पाना असंभव सा हो गया है। पश्चिम देशों की प्रोपेगेंडा खबरों से युद्ध की जो तस्वीर हमारे सामने बनी है, उससे मेरी यह सूचनाएं आंखों को चकाचौंध से जरूर भर देंगी। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि नाटो के प्यादे जेलेंसकी और नव-नाजी आजोव सैनिकों की विदाई जल्द ही हो।


