
पुराने समय की बात है, रेगिस्तान क्षेत्र में रहनेवाले चार सौदागर मित्रों नें किसी सुविधाजनक समृद्ध जगह जा बसने का फैसला किया। और अपने गांव से निकल पड़े। उन्हें एक नगर मिला, जहां लोहे का व्यवसाय होता था। चारों ने अपने पास के धान्य को देकर लोहा खरीद लिया, पैदल थे अत: अपने सामर्थ्य अनुसार उठा लिया कि जहां बसेंगे इसे बेचकर व्यवसाय करेंगे।
Weekly Horoscope: क्या कहते हैं आपके सितारे साप्ताहिक राशिफल 27 मार्च से 2 अप्रैल 2022 तक || JANWANI
आगे जाने पर एक नगर आया, जहां तांबा बहुतायत से मिल रहा था, लोहे की वहां कमी थी, अत: लोहे के भारोभार, समान मात्रा में तांबा मिल रहा था। तीन मित्रों ने लोहा छोड़ तांबा ले लिया, पर एक मित्र को संशय हुआ, क्या पता लोहा अधिक कीमती हो, वह लोहे से लगा रहा। चारों मित्र आगे बढे, आगे बड़ा नगर था जहां चांदी की खदाने थीं, लोहे एवं तांबे की मांग के चलते, उचित मूल्य पर चांदी मिल रही थी। दो मित्रों ने तो तांबे से चांदी को बदल दिया।
किंतु लोह मित्र और ताम्र मित्र को अपना माल आधिक कीमती लगा, सो वे उससे बंधे रहे। ठीक उसी तरह जो आगे नगर था वहां सोने की खदाने थीं। तब मात्र एक मित्र नें चांदी से सोना बदला। शेष तीनों को अपनी अपनी सामग्री मूल्यवान लग रही थी। अंतत: वे एक समृद्ध नगर में आ पहुंचे, इस विकसित नगर में हर धातु का उचित मूल्यों पर व्यवसाय होता था, जहां हर वस्तु की विवेकपूर्वक गणनाएं होती थीं।
चारों सौदागरों ने अपने पास उपलब्ध सामग्री से व्यवसाय प्रारंभ किया। सोने वाला मित्र उसी दिन से समृद्ध हो गया, चांदी वाला अपेक्षाकृत कम रहा। ताम्र सौदागर बस गुजारा भर चलाने लगा। और लोह सौदागर!! एक तो शुरू से ही अनावश्यक बोझा ढोता रहा और यहां बस कर भी उसका उद्धार मुश्किल हो गया।


