- 51200 रुपये के नकली नोट बरामद
- सेना की तैयारी कर रहे युवकों ने पकड़ा गलत रास्ता
- आर्मी में जाने का ख्वाब था, स्टेडियम में करते थे रनिंग, अब आए पुलिस के शिकंजे में
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: क्रांतिधरा में एक बार फिर से नकली नोटों का कारोबार उजागर हो गया। लालकुर्ती पुलिस ने मिलिट्री इंटेलीजेंस की मजबूत सूचना के आधार पर तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास 51200 रुपये के नकली नोट बरामद किये गए। इसके अलावा नकली नोट बनाने के लिये प्रयोग में आने वाले प्रिंटर आदि भी मिले हैं। आरोपी 100-100 रुपये के नकली नोट तैयार कर बाजार में चलाकर राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था को प्रभावित कर रहे थे।
लालकुर्ती पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सूचना के आधार पर अभियुक्त सोम पुत्र मूलचन्द्र निवासी भमौरी थाना सरधना जिला मेरठ की गिरफ्तारी की जिसके पास से 100-100 रुपये के नकली नोटों की गड्डी मिली। इस आरोपी के पास से 100-100 के 161 नोट बरामद हुए।

इस आरोपी की निशानदेही पर निखिल शर्मा पुत्र योगेश शर्मी निवासी बिराल थाना बुढाना जनपद मुजफ्फरनगर, प्रियांशु सिंह पुत्र मूलचन्द्र सिंह निवासी बिराल थाना बुढाना जनपद मुजफ्फरनगर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि दो अन्य साथी सागर गिरि पुत्र विनोद गिरि निवासी ग्राम भमौरी थाना सरधना और विकास सिंह पुत्र प्रदीप सिहं निवासी बुढ़ाना मुजफ्फरनगर मिलकर कूटरचित 100-100 रुपये के नकली नोट प्रिन्टर से तैयार कर बाजार में चलाते हैं।
इनके कब्जे से 100-100 रुपये के नकली नोट निर्मित व अर्द्धनिर्मित तथा नकली नोट कुल 51 हजार 200 रुपये तथा नकली नोट तैयार करने के उपकरण बरामद किये। ये अभियुक्त कूटरचित नकली नोटों को बाजार में असली के रूप में चलाकर राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था को प्रभावित कर रहे थे। बाकी दो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये दबिशें दी जा रही है।
हजारों के नकली नोट बाजार में चला चुके थे आरोपी
नकली नोटों के काले कारोबार में पकड़े गए तीनों युवकों का सपना सेना में जाकर देश सेवा करना था और इसके लिये तीनों लोग स्टेडियम में रनिंग करते थे। बिना मेहनत के मोटी कमाई करने के लालच ने तीनों युवकों को जेल की हवा खिलवा दी। नकली नोटों को लेकर काफी दिनों से मिलिट्री इंटेलीजेंस को सूचना मिल रही थी।
कैंट का क्षेत्र होने के कारण इसे गंभीरता से लिया गया और लालकुर्ती पुलिस और मिलिट्री इंटेलीजेंस ने मिलकर काम किया और गिरोह पकड़ लिया। लालकुर्ती थाने में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसपी सिटी विनीत भटनागर ने बताया कि पकड़े गए तीनों आरोपियों ने बताया है कि वे लोग चार महीने से नकली नोटों का कारोबार कर रहे थे और जो नोट बनाते थे, उनको निजी खर्च में चला देते थे।
एक आरोपी ने बताया कि नोट बनाने की जिम्मेदारी भामौरी के सागर गिरी और बिराल बुढ़ाना के विकास सिंह के ऊपर थी। पकड़े गए तीनों लोग बाजार में नोट चलाने का काम करते थे। नोटों की बारीकी के बारे में बताया गया कि विकास सिंह इस काम को कई सालों से करता आ रहा था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 100-100 रुपये के निर्मित व अर्धनिर्मित नकली नोट कुल 51200 रुपये, एक सफेद शीट जिस पर 100-100 रुपये के छह असली नोट दोनो तरफ से किनारे चिपके हुए थे। एक प्रिन्टर एचपी इन्कटैंक, एक प्रिन्टर पांवर केविल, 55 सफेद ए-4 शीट, रेडियम का टेप, कई रंग और कटर आदि बरामद किये हैं।
आर्मी गुप्तचर एजेंसी लगी थी पीछे
नकली करेंसी का गोरखधंधा करने वालों के खिलाफ आर्मी इंटेलीजेंस एजेंसी लगी हुई थी। इसको लेकर आर्मी इंटेलीजेंस की टीम को इनपुट भी मिल रहा था। यही वजह है कि आर्मी इंटेलीजेंस के आला अफसरों ने अपनी टीम को इस पूरे रैकेट के पीछे लगा दिया, जिसके बाद ही यह सफलता मिली।
भले ही पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन इस बड़े गुडवर्क के पीछे आर्मी इंटेलीजेंस की टीम की उपलब्धि छिपी हुई हैं। पुलिस को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद ही आर्मी इंटेलीजेंस की टीम के साथ मिलकर बदमाशों को पकड़ा गया, तब नकली करेंसी बरामद हुई।
एक बार पकड़े गए
आरोपियों ने बताया कि नकली नोटों को मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर में चलाते थे। हजारों रुपये चलाने के बाद इनके अंदर हिम्मत बढ़ गई और बड़े पैमाने पर नोट बनाने लगे। एक आरोपी ने बताया कि 500 और दो हजार के नोटों को लोग बारीकी से देखते हैं, लेकिन 100 का नोट आसानी से पेट्रोल पंप, मंडी, आढ़त आदि पर चल जाता है।

