- 50 साल से कम उम्र वालों में हार्ट अटैक के खतरे बढ़े
- हर साल 20 लाख लोग हार्ट अटैक से मरते हैं
- इनमें 14 लाख वो है जो पहले अटैक में दम तोड़ देते हैं
- विदेश में एक लाख में 235 और अपने देश में 272 लोग दिल के मरीज बन रहे
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दिल का मामला हमेशा संवेदनशील रहा है और रहेगा, लेकिन अब वक्त बदल गया और लोगों का रहन सहन भी बदल गया है। इस कारण 50 साल से कम उम्र के लोग भी हार्ट अटैक के शिकार हो रहे हैं और उनकी जान भी जा रही है। देश में हर साल 20 लाख लोगों की मौत दिल की बीमारी से हो जाती है।

देश में हर साल प्रति एक लाख में से 272 लोग दिल की बीमारी के शिकार होकर मारे जाते हैं। जबकि विश्व का औसत एक लाख पर 235 है। हर वर्ष तकरीबन 13 से 14 लाख लोग दिल के मरीज हो जाते हैं। इनमें से आठ प्रतिशत लोगों की मौत हार्ट अटैक आने के 30 दिन के अंदर ही हो जाती है यानी तकरीबन सवा लाख लोग पहले हार्ट अटैक के 30 दिन के अंदर ही जान गंवा बैठते हैं।
कार्डियोलाजिस्ट डा. राजीव अग्रवाल ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि दिल के मरीज बढ़ रहे हैं और उनमें कम उम्र के लोग शामिल हो रहे है। गायक केके की मौत ने इस पर लोगों को सोचने के लिये मजबूर कर दिया है। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कम उम्र में हार्ट अटैक पड़ने का कारण क्या बनता जा रहा है।
तनाव और आनुवांशिक कारण इसका सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा ठीक ढंग से नींद पूरी न होना भी परेशानी का सबब बन रहा है। हार्ट अटैक का शिकार होने वाले लोगों में से 50 प्रतिशत को 50 वर्ष की उम्र से पहले आ जाता है जबकि 25 प्रतिशत लोगों को 40 साल का होने से पहले ही आ चुका होता हैं। ये खतरा हमारे और आपके इतना करीब है कि फिर भी हम सोचते हैं कि हृदय की बीमारियों के बारे में 60 वर्ष के बाद ही सोचेंगे

क्योंकि इसे बुढ़ापे की बीमारी माना जाता है। उन्होंने बताया कि खानपान में कंट्रोल करने और वजन कम करने से बहुत हद तक बचा जा सकता है। दो साल में एक बार लियुपिड प्रोफाइल, ईको और टीएमटी जरुर कराना चाहिये। रात में नींद टूट रही हो, घबराहट हो और दर्द के साथ पसीना आ रहा हो तो जांच जरुर कराएं।
एमडी मेडिसिन डा. तनुराज सिरोही ने बताया कि दिनचर्या बिगड़ने, जंक फूड, एल्कोहल और स्मोकिंग ने कम उम्र के लोगों की दोस्ती हार्ट अटैक से कर दी है। अगर घर में दिल के मरीज हो तो उनको तो ज्यादा सावधानी की जरुरत है। खासकर जो लोग तनाव भरी जिंदगी जीते हैं उनको चाहिये कि दिनचर्या बदलें, सुबह शाम टहलने जाएं और ऐसी चीज खायें जो वजन को न बढ़ाये।

वजन बढ़ना ही सबसे बड़ा दुश्मन है। उन्होंने कहा कि सात घंटे से कम नींद लेना भी एक वजह सामने आ रही है। उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद हार्ट अटैक खासकर कार्डियेक अरेस्ट का खतरा बढा है। इस कारण लोगों को सचेत रहना चाहिये खासकर वो लोग जो शुगर और बीपी के मरीज हैं। उन्होने बताया कि कोलेस्ट्रोल लेवल कितना है और उसमें एलडीएल कोलेस्ट्रोल यानि खराब कोलेस्ट्रोल का स्तर जितना ज्यादा होगा उतना हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है।

