Monday, April 6, 2026
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आंखें बंद…‘त्रिनेत्र’ से पढ़ी किताबें

  • निकाले योग के लिए 30 मिनट का समय, आसन आपको कई खतरों से रखेगा दूर
  • योग ब्रेन को सुपर ब्रेन बनाने का करता है काम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चौधरी चरण सिंह विवि में चल रहे साप्ताहिक योग शिविर के छठें दिन विवि के बृहस्पति भवन में अनोखी छठा देखने को मिली। बृहस्पति भवन के मंच पर स्वामी कर्मवीर महाराज के साथ उनके गुरुकुलम ऋषिकाकुलम की बच्चियों ने कमाल कर दिखाया। योग और ध्यान के बल पर इन बेटियों को आंख पर पट्टी बांधकर किताबों को पढ़ना था और चित्र बनाने थे।

बेटियों ने आंख पर पट्टियां बांधकर जैसे ही रंगों को पहचाना शुरु किया लोगों की तालियों बज उठी। बेटियों ने दिए गए रंगों को सटीक ढंग से पहचान लिया। कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति ने बेटियों को 100 का नोट देखकर नंबर बताने की बात कही बेटी ने बिना देर किए नंबर बता दिया।

उसके बाद बेटियों ने आंख बंदकर पुस्तक पढ़ डाली जिसे देख सभी आश्चर्य चकित हो उठे। योग गुरु स्वामी कर्मवीर ने कहा कि सभी तीसरी आंख को सक्रिय कर सकते हैं। इससे ब्रेन को एक्टिव किया जा सकता है। योग गुरु ने कहा कि योग में सभी रोगों का उपचार मौजूद है।

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हमें सिर्फ इसके महत्व को समझने की जरुरत है। बीमारियों को दूर भगाना है तो दिनचर्या में योग को शामिल करना ही होगा। योग के बारे में लोग खुब पढ़ रहे है और सुन भी रहे लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि इससे क्या फायदा होता है। योग गुरु स्वामी कर्मवीर महाराज ने योग पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा योग के लिए कम से कम 30 मिनट का समय अवश्य निकालना चाहिए ताकि शरीर को स्वस्थ्य रखा जा सके।

विवि कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि योगाभ्यास के माध्यम से मस्तिष्क की शक्ति में वृद्धि संभव है। योग सुपर ब्रेन है दूसरे शब्दों मे यह कहा जा सकता है कि ब्रेन को सुपर ब्रेन बनाता है। उन्होंने कहा कि योग, एकाग्रता का शक्तिशाली माध्यम है। प्राचीनकाल में यह तृतीय नेत्र जागृति के विषय में लोग जानते थे।

स्वस्थ मस्तिष्क और मानसिक स्वाथ्य के लिए योग टॉनिक का कार्य करता है। आज इस तनावपूर्ण जीवन में योग को अपनाने की आवश्यकता है। योग हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा हम सभी को भेंट किया गया एक अनुपम उपहार है। प्रतिकुलपति प्रो. वाई विमला ने कहा कि योग मस्तिष्क के सोये हुए भाग को जगाने का कार्य करता है।

श्रुति परंपरा पर आधारित हमारा ज्ञान उत्तम कोटि का था। श्रुति और श्रृवण की प्रक्रिया के माध्यम से प्राचीन ज्ञान विस्तारित हुआ। योग आसन की प्रक्रिया ही नहीं वरन् ज्ञान चक्षु क्रियाशीलता में भी वृद्धि करने का कारक है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. प्रशांत कुमार ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डा. मनोज श्रीवास्तव ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर कुलसचिव धीरेंद्र कुमार, डा. दुष्यंत चौहान, डा. प्रवीन, डा. संदीप त्यागी, राजन, मौसम, बीनम तथा अन्य शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित थे।

200 देशों में कराया जा रहा है योग

हम लोगों ने इसके महत्व को देर से समझा है। आज करीब 200 देशों में योग कराया जा रहा है। स्वामी कर्मवीर महाराज ने बताया कि शरीर के सभी रोगों का एकमात्र उपचार केवल योग है। मनुष्य को अपने शरीर को निरोगी रखना और सकारात्मकता के साथ कार्य करने के लिए योग से जुड़ना होगा।

मधुमेह, उच्च रक्तचाप, श्वास, जोड़ों का दर्द, थायराइड आदि बीमारियों का इलाज भी योग से संभव है। विश्व में जितनी भी उपचार की पद्धतियां है लगभग सभी में बीमारी होने के बाद उसके इलाज की व्यवस्था हैं, लेकिन केवल आयुर्वेद ही एकमात्र ऐसी पद्धति है जो बीमारी से बचाने के उपाय पहले ही बता देती है।

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