- सरकार चाहे किसी भी दल की हो, पहुंच में सब पर भारी पड़ते हैं ये लोग
- कानूनी दांवपेच में अब तक उलझी है 100 करोड़ की वसूली
- बसपा एमएलसी महमूद अली और अमित जैन पर 100 करोड़ की आरसी जारी
वरिष्ठ संवाददाता |
सहारनपुर: सीबीआई और ईडी की जांच का नतीजा अभी तक सिफर है। खनन माफिया हाजी इकबाल के भाई और बसपा एमएलसी महमूद अली और कभी उनके बगलगीर रहे अमित जैन का भी कुछ नहीं हुआ।
एक रोज पहले महमूद और अमित जैन के खिलाफ प्रशासन ने 100 करोड़ रुपये की आरसी जरूर जारी की है लेकिन, लगता नहीं कि उनसे वसूली हो पाएगी। प्रशासन के ढुलमुल रवैये से ही ऐसा होता रहा है। आरसी तो पहले भी जारी हो चुकी है लेकिन, रिकवरी नहीं। ये लोग कोर्ट से स्टे लाकर बच निकलते हैं।
यह बताने की जरूरत नहीं कि बेहट और मिर्जापुर में कभी हाजी इकबाल का ही सिक्का चलता था। यमुना में अवैध खनन और अन्य मामलों को लेकर हाजी इकबाल पर बसपा सरकार जाने के बाद शिकंजा कसना शुरू हो गया था।
करीब पांच साल पहले महानगर निवासी गुरप्रीत सिंह बग्गा की ओर से राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में यह शिकायत की गई थी कि यमुना में नियमों को ताख पर खकर अवैध खनन किया जा रहा है।
इसके चलते पर्यावरण को खतरा पैदा हो गया। साथ ही करोड़ों रुपये राजस्व की हानि हुई। गुरुप्रीत की इस शिकायत को आधार मानकर अवैध खनन मामले की एनजीटी में सुनवाई भी हुई।
बाद में फरवरी 2016 में बसपा एमएलसी महमूद अली और उनके कारोबारी पार्टनगर जैन बाग निवासी अमित जैन पर क्रमश: 50-50 करोड़ का जुर्माना लगा था। लेकिन, संबंधितों ने जुर्माने की इस राशि को आज तक जमा नहीं कराया। ऊंची पहुंच के चलते इनका बाल बांका न हो सका।
प्रशासनिक अधिकारी भी कभी मजबूत इच्छाशक्ति से काम नहीं ले सके। ये लोग कोर्ट से स्टे लाकर बचते रहे हैं। फिलहाल, अब एक बार फिर महमूद अली और अमित जैन सुर्खियों में हैं।
डीएम अखिलेश सिंह ने बेहट तहसील के मिजार्पुर पोल निवासी महमूद अली और उनके पार्टनर अमित जैन के खिलाफ 50-50 करोड़ की आरसी जारी की है।
जिलाधिकारी ने बताया कि तहसीलदार सदर व बेहट को आदेश दिए हैं कि वह इस रकम की वसूली कराना सुनिश्चित करें। साथ ही उक्त 100 करोड़ की धनराशि को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लखनऊ स्थित यूनियन बैंक के खाते में जमा कराए जाएं।
यह भी बता दें कि एमएलसी महमूद अली पर जब एनजीटी ने जुर्माना ठोका था तो वह हाईकोर्ट से स्टे लाने में कामयाब हो गए थे। बहरहाल, कोर्ट-कचहरी और कानूनी दांव-पेच में पूरा मामला उलझा हुआ है।
हाजी इकबाल और उनके बेटों समेत महमदू पर भी कई तरह की जांच हो रही है। सीबीआई और ईडी ने भी शिकंजा कसा है लेकिन, अभी तक इनका बाल बांका न हो सका है। प्रशासनिक कार्रवाई भी हमेशा से संदेह के घेरे में रही है।

