Monday, April 13, 2026
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शुभ संयोग में आज से शुरू होने जा रहा सावन महीना

  • औघड़नाथ मंदिर सजकर तैयार, भगवान शिव, मां पार्वती की पूजा से होती है मनोकामनाएं पूरी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मान्यता है कि सावन महीना भगवान शंकर के सबसे प्रिय महीनों में से एक है। इस माह भगवान शंकर और मां पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल होने के साथ ही मनोकामना पूरी होने की भी मान्यता है।

बता दें कि भगवान शिव को समर्पित सावन माह की शुरुआत 14 जुलाई से हो रही हैं, जिसको लेकर शहर के सभी शिवालयों में साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका हैं। वहीं, औघड़नाथ मंदिर पर भी सजावट का काम लगभग पूरी हो चुका है। सावन के पहले सोमवार की तैयारियां भी मंदिर परिसर में शुरू हो गई।

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मान्यता है कि भगवान शंकर की कृपा पाने के लिए यह महीना अति उत्तम होता है। सावन माह का श्रावण मास के नाम से भी जाना जाता है। इस माह भगवान शंकर की विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन महीने में देवों के देव महादेव सच्चे मन से पूजा अर्चना करने वाले भक्तों को दु:खों से मुक्ति दिलाते है और मनोकामना पूरी करते हैं।

ज्योतिषाचार्य मनीष का कहना है कि सावन के पहले दिन प्रीत योग का शुभ संयोग बन रहा है। प्रीत योग 14 जुलाई सुबह 4 बजकर 16 मिनट से 15 जुलाई सुबह 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस योग में किए गए सभी कार्यों में सफलता मिलती है।

सावन माह के नियम

शास्त्रों के अनुसार सावन महीने में व्यक्ति को सात्विक आहार लेना चाहिए। इस माह में प्याज और लहसुन भी नहीं खाना चाहिए। इतना ही नहीं सावन मास में मास और मदिरा का सेवन भी नहीं करना चाहिए। इस माह विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है।

सावन के महीने में सोमवार के व्रत का अधिक महत्व होता है। संभव हो सावन माह में सोमवार के व्रत अवश्य करने चाहिए। सावन सोमवार व्रत के दौरान भोलेनाथ का जलाभिषेक जरूर करे।

ये सामान करें अर्पित

शमी के पत्ते: शमी को शनिदेव का पेड़ माना जाता है। इसलिए शिवलिंग पर इसके पत्ते चढ़ाने से भोलेनाथ के साथ-साथ शनि देव भी प्रसन्न होते हैं।

धतूरा: सावन में शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने की परंपरा है। क्योंकि धतूरा भगवान शिव को अधिक प्रिय है। शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने से पुत्र की प्राप्ति भी होती है।

भांग: भगवान शिव को भांग भी बेहद प्रिय है वैसे तो यह एक नशीला पदार्थ होता हैं, लेकिन आयुर्वेद के साथ-साथ शिव की पूजा में इसका विशेष महत्व होता है। भांग से शिव का श्रृंगार करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

बिल्व पत्र: जीवन में कोई संकट हो या काम में रुकावट आ रही हो तो सावन में भगवान शिव को बिल्व पत्र अवश्य चढ़ाए। क्योंकि इसमें भगवान शिव का वास होता है।

आक या मदार के फूल: भगवान शिव को आक के फूल भी अर्पित किए जाते हैं। शिवपुराण के अनुसार लाल और सफेद रंग के आके के फूल शिवजी पर चढ़ाने से मोक्ष क प्राप्ति होती है।

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