- मेडिकल में लगे हैं एक्सपायर हो चुके अग्निशमन यंत्र? क्या ऐसे होगा आग की घटना से बचाव?
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेडिकल में लगे आग अग्निशमन यंत्रों की एक्सपायरी डेट खत्म हो जाने से मेडिकल प्रशासन द्वारा सैकड़ों लोगों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। मेडिकल में प्रत्येक वार्ड के बाहर और अंदर आग बुझाओ सिलेंडर लगे तो हुए है, लेकिन इनके इस्तेमाल की समयावधि पूरी हो चुकी। क्योंकि सिलेंडर में जो गैस होती है उसकी क्षमता आग पर काबू पाने की बहुत कम हो जाती है। मेडिकल प्रशासन मानो सब कुछ देखते हुए भी कुंभकर्णी नींद से जाग नहीं रहा है। ज्यादा गर्मी होने के कारण कभी-कभी शार्ट सर्किट होने के कारण आग भी लग सकती है। क्योंकि इस दौरान बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है और शार्ट सर्किट का खतरा बना रहता है। मेडिकल के विभिन्न विभागों में अग्निशमन यंत्र मौजूद है, लेकिन उन पर रीफिलिंग की तारीख एक्सपायर हो चुकी है। हालांकि मेडिकल प्रशासन का कहना है कि एक यंत्र रिफिल होने के बाद पांच सालों तक चल सकता है, लेकिन उसकी समय समय पर जांच होती रहनी चाहिए।
बुधवार को मेडिकल में आग लगने के बाद उससे बचाव के लिए क्या तैयारियां है उनको लेकर मॉकड्रिल की गई। इस दौरान सुपर स्पेशलियटी बिल्डिंग में लगे अग्निशमन यंत्रों को चलाकर दिखाया गया, लेकिन इन यंत्रों पर रिफिल होने की तारीख 22 मार्च 2022 लिखी गई थी। अब छह माह बीतने के बाद भी इन यंत्रों पर पुरानी तारीख क्यों पड़ी है? इसकी जानकारी देने वाला कोई नहीं मिला। वहीं मेडिकल के मीडिया प्रभारी डा. वीडी पांडेय ने बताया कि रिफिल होने की तारीख पुरानी है, जो नियमों के खिलाफ है, लेकिन एक बार कोई भी अग्निशमन यंत्र रिफिल होता है तो वह जब तक इस्तेमाल न हो सके तब तक पांच सालों तक वह काम कर सकता है, लेकिन उसकी समय-समय पर जांच करना जरूरी है। यदि किसी दिन मेडिकल में आगजनी की घटना होती है तो आग को नियंत्रण में लाने के लिए यह यंत्र काम नहीं आएंगे। ऐसे में प्रशासन आगजनी की घटना से बचने के लिए कितना गंभीर है? इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
कहीं फांक रहे धूल तो कहीं हो चुके एक्सपायर
शहर के अस्पतालों में आग बुझाने के इंतजाम खस्ताहाल में थे। अधिकांश धूल फांक रहे थे और कुछ की प्रयोग की तिथि भी खत्म हो चुकी है। इस बाबत कर्मचारियों से पूछा तो बताया कि नियमित चेकिंग होती है, लेकिन फिर भी एक्सपायर हो चुके अग्निशमन यंत्र क्यों नहीं बदले गए, इस चुप्पी साध गए। इतना ही नहीं राज्य के अनेक जिलों में प्रतिदिन आगजनी की घटनाएं सामने आ रही है। इसके बावजूद सरकारी इमारत में फायर आॅडिट नहीं होना काफी गंभीर बात है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट होकर फायर आॅडिट करने लगा, लेकिन जिले में स्थित अन्य बड़ी शासकीय इमारतों की ओर अनदेखी की गई।
रोजाना सैकड़ों लोग आते हैं
मेडिकल में एक्सपायरी डेट के अग्निशमन यंत्र लगे हैं। कई माह पहले एक्सपायर हो चुके इन अग्निशमन यंत्रों को आज तक नहीं बदला गया है। ऐसे में यदि आग लगने की कोई घटना हुई तो विभाग आग कैसे बुझायेगा? मेडिकल में रोजाना हजारों की तादाद में लोगों और मरीजों का आना-जाना रहता है और स्टाफ को मिलाकर संख्या एक हजार के करीब पहुंचती है। ऐसे में कई मरीज भी मेडिकल में उपचाराधीन चल रहे है। ऐसे में अगर कोई बड़ी घटना विपरीत होती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? इससे मेडिकल का स्टाफ, मरीज व मरीजों के साथ आने वाले परिजनों की भी जान खतरे में रहेगी।

