Sunday, February 15, 2026
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सड़क पर शव रखकर किया बवाल, पुलिस बेबस

  • गांव में बना तनाव, परिवार में मचा कोहराम

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: गांव में दीपक की मौत के बाद तनाव बना हुआ है। आठ घंटे से उसका शव मुख्य मार्ग पर रखकर ग्रामीण हंगामा कर रहे हैं। कई बार शव को उठाने का प्रयास किया गया, लेकिन शव नहीं उठाने दिया। जिसके चलते गांव में तनाव बना हुआ है। गांव में दीपक चौहान की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

पत्नी और मां बार-बार कह रही है कि उनकी जिंदगी ही खत्म हो गई, उनकी आखिर किसी से क्या दुश्मनी थी? वो घर में घुसकर बेरहमी से बच्चे की हत्या कर दी। उधर, मृतक का बेटा आरव और बेटी भारती का भी रो-रोकर पिता के लिए परेशान हैं। गांव में हर किसी की आंखें नम हो रही है। इस दुस्साहस घटना से हर कोई हैरान है। गांव में पहली बार ऐसी घटना हुई है जिसे देखकर हर कोई परेशान हो रहा है।

मां बोली-मेरे लाल को ला दो

दीपक चौहान की मां रेखा रोते हुए बोल रही थी कि मेरे बेटे को ला दो और मेरे से जो भी पैसे लेने हैं, वह ले लो अधिकारी तो बन गए हो, लेकिन मेरे बेटे को आप इंसाफ दिला दो। उसके हत्यारों के घर पर बुलडोजर चलवा दो और उसे इंसाफ दिला दो। दीपक की मां रेखा का कहना है कि मैं अपने बेटे का बदला जरूर लूंगी। मां का रोते-रोते बुरा हाल हो रहा था। उधर, मृतक की पत्नी नीलम का कहना है कि मेरी जिंदगी उजड़ गई अब मेरा और मेरे बच्चों का क्या होगा।

भाई से पहले रितिक ने किया था झगड़ा

मृतक दीपक के भाई संदीप से रितिक उर्फ चिंटू का झगड़ा हुआ था क्योंकि रितिक शराब पीने का आदी है। जो आए दिन झगड़े फसाद करता रहता है। रितिक संदीप से झगड़ा करने के बाद अपने घर चला गया, लेकिन इसके बाद वह अपने साथी संदीप के साथ चाकू लेकर सबसे पहले मृतक दीपक के चाचा वीर सिंह के घर पर पहुंचा था।

रितिक ने चाकू से पहले वीर सिंह पर हमला किया था। जब दीपक को इसका पता चला तो दीपक भी वहां आ गया। रितिक और उसके साथी का यह है तांडव अभी समाप्त नहीं हुआ था कि उन्होंने दीपक के भी चाकू मार दिया जिसके चलते दीपक की मौत हो गई थी।

हत्या के बाद पूरा परिवार से सहम गया और गांव में भी तनाव उत्पन्न हो गया। जिसके बाद आरोपियों के घर में आगजनी की गई। ग्रामीण इस इस घटना से बेहद आक्रोश में दिखाई दिए। हालांकि पुलिस ने कुछ समय रहते स्थिति को संभाल लिया था अन्यथा गांव में बड़ा बवाल भी हो सकता था।

रात 1:00 बजे हुआ अंतिम संस्कार

दीपक चौहान का शव रात में बड़ी जद्दोजहद के बाद 12:30 बजे पुलिस के आश्वासन पर उठा दिया गया। एसडीएम सरधना और एडीएम प्रशासन ने आश्वासन दिया कि प्रशासन और सरकार द्वारा यथासंभव जो भी मदद हो सकेगी उसे किया जाएगा।

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घटनास्थल पर रात में करीब 12:30 बजे मृतक के साले और भाई ने ग्रामीणों पर ही एक-दूसरे पर आरोप लगाए कि सब लोग बिके हुए हैं। यहां शव पड़ा है और राजनीति करने में लगे हुए हैं, जिसके बाद वह पुलिस के आश्वासन के बाद शव को उठाकर ले गए।

उच्च अधिकारी लेते रहे पल-पल की खबर

गांव में हुई इस घटना के बाद से एडीजी से लेकर आईजी और एसएसपी तक पूरी घटना की जानकारी लेते हुए नजर आए एसपी सिटी और क्षेत्राधिकारी दौराला कई थानों की फोर्स और इंस्पेक्टरों के साथ गांव में ही डटे रहे कोई अनहोनी ना हो जाए इसलिए उच्च अधिकारी भी पल-पल की जानकारी लेते रहे लेकिन ग्रामीणों द्वारा किसी भी अधिकारी की एक बात नहीं सुनी गई जिसके बाद पुलिस ने अपने हाथ पीछे खींच लिए।

रात 12:00 बजे फिर से ग्रामीणों, अधिकारियों की हुई वार्ता

दीपक चौहान की हत्या के बाद मुख्य मार्ग पर जाम लगाए बैठे ग्रामीणों को समझाने के लिए रात में 12:00 बजे फिर से अधिकारियों के साथ मीटिंग शुरू की गई। अधिकारी अपनी बातों पर अड़े हुए है और ग्रामीण अपनी बातों पर अड़े हुए हैं। दोबारा से परिजन और अन्य ग्रामीणों के साथ में एडीएम सरधना सीओ दौराला समेत कई पुलिस थानों की फोर्स के साथ ग्रामीणों ने वार्ता शुरू की है

वार्ता में ग्रामीणों ने वही मांगे रखी है जो पूर्व में मांगे रखी गई थी आरोपियों के घर बुलडोजर चलाया जाए और 50 लाख का मुआवजा दिया जाए और एक परिवार के सदस्य को नौकरी दी जाए। अभी पिछले करीब 8 घंटे से शव मुख्य मार्ग पर ही रखा हुआ है और वार्ता जारी है।

वाल्मीकि और ठाकुर समाज में टकराव के हालात

दुल्हैड़ा गांव शांति और सद्भावना का गांव कहलाया जाता रहा है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि वाल्मीकि और ठाकुर समाज के लोग आमने-सामने हो गए। दोनों समाज के बीच विकट ठकराव के हालात पैदा हो गए हैं, जिसके बाद व्यापक स्तर पर गांव में फोर्स तैनात कर दी गई है तथा अधिकारी भी गांव में कैंप कर गए हैं।

ग्रामीणों ने वाल्मीकि समाज के युवकों द्वारा दी गई हत्या की घटना को अंजाम के बाद उनके घरों में आगजनी कर दी गई जिसके बाद इस गांव की वर्षों की तपस्या आखिरकार समाप्त हो गई क्योंकि इस गांव में आपसी सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पहले से ही दी आ रही है।

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लेकिन वाल्मीकि समाज के दो युवकों द्वारा नासमझी और शराब की आदत ने इस गांव के सौहार्द को आग लगा दी अगर वाल्मीकि समाज के दोनों युवक समझदारी का परिचय देते तो शायद गांव में यह घटना न घटती। लेकिन शुक्रवार को जब दीपक चौहान की हत्या होने का पता गांव में आग की तरह फैला तो गांव में दिनभर अराजकता का माहौल देखने को मिला।

अराजकता के माहौल के सामने पुलिस भी बैकफुट पर नजर आई दिन भर हंगामे और अराजकता का माहौल गांव में चलता रहा रात होते-होते अधिकारी भी परेशानी में आ गई हालांकि रात 12:00 बजे के बाद फिर से अधिकारी और ग्रामीणों एवं मृतक परिवार के सदस्यों की वार्ता हुई

जिसके बाद परिवार के लोग माने और दीपक के शव का अंतिम संस्कार किया गया अगर समय से पहले इस पूरे प्रकरण में समझदारी दिखाई जाती तो शायद आज इस गांव का माहौल खराब में होता और वर्षों की आपसी भाईचारे और सौहार्द की परंपरा को पलीता ना लगता।

वाल्मीकि समाज में भी आक्रोश

वाल्मीकि समाज के घर में आगजनी की वारदात के बाद आसपास के वाल्मीकि समाज के लोगों को जब पता चला तो उनमें भी आक्रोश दिखाई दिया हालांकि सूत्रों की मानें तो इस समाज के लोग भी पंचायत करने के प्रयास में लग गए हैं लेकिन पुलिस की पैनी नजर के चलते इस और कोई कदम प्रशासन नहीं उठने देगा।

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