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‘दिलों’ में रह गई मंच पर जाने की ‘कसक’

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‘दिलों’ में रह गई मंच पर जाने की ‘कसक’
  • महापंचायत के मंच पर राजनीतिक दलों को किया गया दरकिनार, मंच पर जाने के लिए कसमसाते रहे राजनेता, नहीं मिल पाई एन्ट्री

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर की धरती पर हुई किसान महापंचायत के मंच पर जाने की कसक राजनीतिक दलों के नेताओं के दिलों में रह गई। जनपद के राजनीतिक दलों के नेता व विधायक पंचायत में शामिल होने के लिए पहुंचे, परन्तु उन्हें यह कहकर मंच नहीं दिया गया कि वह किसान बनकर आये हैं इसलिए सामने बैठे।

शुक्रवार को जीआईसी के मैदान में किसान महापंचायत आयोजित की गयी। महापंचायत में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर के अलावा आसपास के जनपदों व आसपास के प्रदेशों से भी किसानों ने अपने ट्रैक्टरों के साथ महापंचायत में शिरकत की। इस पंचायत में अधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल व अर्ध सैन्य बलों के जवान खुद एसएसपी की निगरानी में व्यवस्था में लगे रहे। तमाम सड़कों पर वाहनों के कारण जाम के हालात भी नजर आने लगे हैं। हमेशा की तरह विपक्षी दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों का समर्थन भी इस महापंचायत को मिल रहा था।

समर्थनदेने वाले सभी राजनीतिक संगठन व सामाजिक संगठन के लोग जब महापंचायत के मंच के पास पहुंचे, तो उन्हें मंच नहीं दिया गया। समर्थन देने वालों में विपक्षी दलों के विधायक भी मौजूद थे। राकेश टिकैत ने सभी से आह्वान किया कि वह किसान बनकर आये हैं और इसलिए किसान बनकर मंच के सामने बैठे। हालांकि इनके लिए मंच के बराबर में कुर्सियां लगाकर बैठने की व्यवस्था भी की गयी थी। राकेश टिकैत ने मंच से बता भी दिया कि विधायकों के साथ मंच क्यों साझा नहीं किया गया। उनहोंने कहा कि यह किसानों का मंच हैं और किसान किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन सभी सरकारों के खिलाफ हैं, जो किसान विरोधी फैसले ले रही हैं।

उन्होंने उदाहरण दिया कि जब बिहार में किसानों पर अत्याचार हुआ और उन्होंने वहां आंदोलन किया, तो उन पर आरोप लगा था कि उन्हें भाजपा का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भाकियू उन सभी के साथ हैं,जो किसानों की बात करते हैं और उन सभी के खिलाफ हैं, जो किसानों के खिलाफ हैं।