नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉट कॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन है। चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन रामनवमी मनाई जाती है। चैत्र मास के शुल्क पक्ष की नवमी तिथि के दिन ही सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने धरती लोक पर श्री राम के रूप में जन्म लिया था।
राम लला के जन्म की पावन बेला को ही रामनवमी के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। रामनवमी का त्योहार हिन्दू धर्म में खास और पवित्र माना जाता है। रामनवमी के दिन हर घर में भगवान श्री राम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
रामनवमी पूजा मुहूर्त
भगवान राम का जन्म मध्य काल यानी अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। इस रामनवमी के मौके पर वैसे तो आप पूरे दिन भगवान राम की पूजा अर्चना कर सकते हैं। सुबह में चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार, सुबह 6 बजकर 13 मिनट से लेकर 7 बजकर 46 मिनट तक का मुहूर्त भी पूजा के लिए उत्तम रहेगा। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान राम का जन्म अभिजीत मुहूर्त यानी मध्यकाल में हुआ था। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।

रामनवमी की पूजा विधि
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राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
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पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान राम को चरणा अमृत से अभिषेक करें।
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भगवान राम और माता सीता का जप करते हुए पूजा का संकल्प लें। भगवान राम के इस मंत्र का जप जरूर करें। ‘मम भगवत्प्रीतिकामनया (वामुकफलप्राप्तिकामनया) रामजयन्तीव्रतमहं करिष्ये’ ।।
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भगवान राम को फूल, माला, चंदन और मिठाई भगवान राम और माता सीता को अर्पित करें।
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रामनवमी के दिन रामचरितमानस, रामायण, रामरक्षा स्तोत्र, बजरंग बाण और हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें।
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अंत में भगवान राम की आरती करते हुए भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी की आरती जरुर करें और उनसे सुख समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मांगे।


