कई दिनों से लगातार हो रही बारिश से यमुना और गंगा नदी ने रौद्र रूप दिखा दिया हैं। यमुना खतरे के निशाने से ऊपर बह रही हैं, जहां दिल्ली के कुछ इलाकों में घुस गई हैं। बागपत, शामली, सहारनपुर समेत कई जनपदों में यमुना का कहर जारी हैं। वहीं, गंगा ने हस्तिनापुर क्षेत्र में तबाही मचा दी हैं।
तीन से चार फीट पानी हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र के गांवों में खड़ा हो गया है। ग्रामीण मकान को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर पलायन कर रहे हैं।
बिजनौर बैराज के सभी 30 फाटक खोल दिये गए हैं, क्योंकि पीछे से लगातार पानी का दबाव बढ़ रहा था। एक तरह से पानी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया हैं। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने की दिशा में अभी तक प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाये हैं। ग्रामीण खुद ही ट्रैक्टर-ट्रॉली से ग्रामीणों को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं।
- हस्तिनापुर में बाढ़ का कहर
- डीएम ने किया बाढ़ क्षेत्र का दौरा, सिंचाई विभाग को तटबंध दुरुस्त करने के दिये निर्देश
- हरिद्वार और बिजनौर से डिस्चार्ज में कमी, फिर भी गंगा खतरे के निशान पर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ/हस्तिनापुर: बिजनौर बैराज के सभी तीस फाटक ओपन कर दिये गए। पानी का पीछे से इतना दबाव बन गया था कि सभी फाटक बैराज पर खोलने पड़ गए। गंगा का स्तर स्तर इतना अधिक बढ़ा कि बाढ़ के रूप में तबाही मचानी शुरू कर दी हैं।
हस्तिनापुर के दर्जन भर गांव में चार-चार फुट पानी घूस गया, जहां पर ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली से इधर-उधर जा रहे हैं। कुछ लोग पलायन भी सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचने के लिए कर गए हैं। पहाड़ी और मैदानी इलाकों में चल रही भारी बारिश के चलते गंगा में बाढ़ आ गई हैं।

उधर, डीएम दीपक मीणा और बिजनौर के सांसद मलूक नागर भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हाल-चाल जानने के लिए पहुंचे। डीएम ने विशेष टीम इसमें लगा दी हैं, ताकि कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं घटे। पानी ज्यादा बढ़ता है तो सेना की मदद भी इसमें ली जा सकती हैं। मोटर वोट कहां-कहां हैं, उसकी भी डिटेल मांग ली गई हैं।
खादर क्षेत्र में लगभग दो सप्ताह पूर्व शुरू हुआ बाढ़ का खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बिजनौर बैराज से गंगा के जलस्तर में आई कमी के बाद भी गुरुवार को गंगा के जलस्तर में एक से दो फीट की वृद्धि हुई। जिससे बाढ़ का पानी दर्जनों गांवों के संपर्क मार्गों पर फैल गया। जलमग्न सड़कें और गांवों के पानी से घिरे होने के कारण दर्जनों गांवों का आवागमन बाधित हो रहा है।

गत सोमवार को बिजनौर बैराज से चल रहे डिस्चार्ज में काफी कमी हुई है, लेकिन रविवार की अपेक्षा सोमवार को जलस्तर में एक से दो फीट की वृद्धि हुई। बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियता पीयुष कुमार के अनुसार गुरुवार देर शाम बिजनौर बैराज से गंगा नदी में बढ़कर 2 लाख 16 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो गया। हरिद्वार से भी डिस्चार्ज में कमी होने के चलते 1.60 लाख क्यूसेक ही रहा गया। जिस देर रात से हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र में जलस्तर में कमी होने की संभावना है।

फतेहपुर के समीप तटबंध धराशायी
गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के चलते गुरुवार देर शाम फतेहपुर प्रेम के समीप ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थाई तटबंध धराशायी हो गया। जिसके चलते फतेहपुर, हंसापुर, परसापुर कुंडा राठौड़ा आदि गांवों में बाढ़ का संकट मंडराता नजर आ रहा है। तटबंध धराशायी होने के कुछ देर बाद ही सैकड़ों हेक्टेयर फसल बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गई।
डीएम ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा
गुरुवार को डीएम दीपक मीणा ने बाढ़ प्रभावित खादर क्षेत्र का निरीक्षण कर गंगा नदी किनारे बसे गांवों के कटान स्थलों का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने कटानरोधी कराए गए कार्यों का निरीक्षण किया।

इस दौरान अधिशासी अभियंता को कटान स्थल पर हो रहे परक्यूपाइन के कार्य को और अधिक मजबूती प्रदान किए जाने का निर्देश दिया। तटबंध पर होने वाले कटान की निरंतर निगरानी किए जाने एवं युद्ध स्तर पर कटान बिंदुओं पर फ्लड फाइटिंग कार्य किए जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया।
संपर्क मार्गों पर फैलने लगा बाढ़ का पानी
गुरुवार को जलस्तर में हुुई वृद्धि से हस्तिनापुर-रामराज मार्ग पर पानी आने के साथ गंगा किनारे बसे फतेहपुर प्रेम, खेड़ीकलां, बधुवा, बधुवी, मनोहरपुर, भीकुंड, चामरौद, हट्टूपुरा, भागोंवाला, गांवड़ी, हंसापुर, परसापुर आदि गांव के आसपास बाढ़ का पानी भर गया। साथ ही खेड़ीकलां, बधुवा, बधुवी, मनोहरपुर, भीकुंड, गांवों के लोगों को एक-दूसरे से संपर्क बनाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।
खराब हो गई चारा की फसलें
गंगा के जल स्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव के साथ बरसात के पानी के जलभराव के चलते खादर क्षेत्र में पशुओं के सामने चारे का संकट मंडराने लगा है। दुधली, भीकुंड, मकदूमपुर निवासी ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के कारण सुखा चारा पहले ही खराब हो गया था। अब बाढ़ के पानी और जलभराव के कारण हरा चारा भी गलना शुरू हो गया है। खेतों में पानी भरा होने के कारण हरे चारे के कटान में भी दिक्कते आ रही है।
खादर क्षेत्र में छह बाढ़ चौकियां स्थापित
एडीएम वित्त एवं राजस्व ने बताया कि हस्तिनापुर क्षेत्र में छह बाढ़ चौकियां स्थापित हैं। जिसमें सभी को अलर्ट मोड पर कर दिया गया है। कंट्रोल रूम नंबर 01233-280294, 9454449554 इस दौरान 24 घंटे संचालित है। जिसमें राउंड-द-क्लाक ड्यूटी लगाई गई है। बाढ़ के दृष्टिगत पीएसी एवं एसडीआरएफ टीम की पूर्व से तैनात की गई है।
पर्याप्त मात्रा में नाव टीम के पास है फिर भी इसके अतिरिक्त नाव के लिए वन विभाग एवं निजी नाविकों से भी समन्वय स्थापित किया गया है। 12 राहत शैल्टर होम चिह्नित है और शासन के निदेर्शानुसार सभी व्यवस्थाएं पूर्व में पूर्ण कर ली गई हैं। अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है।
खतरे के निशान से ऊपर यमुना, मची तबाही
यमुना नदी का जलस्तर 45 सेंटीमीटर कम हो गया है। जलस्तर घटकर 231.80 मीटर पर आ गया है, जो खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर है। हथिनी कुंड बैराज से सुबह 8 बजे करीब 1 लाख 59 हजार क्यूसेक पानी यमुना नदी में डिस्चार्ज किया गया है। इसलिए अभी खतरा टला नहीं है। दूसरी ओर, जल स्तर थोड़ा कम होने से खेतों में भरा पानी कम होने लगा है। इससे जमीन में कटान होने की आशंका बनी हुई है। बुधवार को यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर 232.25 मीटर पर दर्ज किया गया था,

जबकि खतरे का निशान 231.50 मीटर पर है। इसी बीच बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे यमुना नदी का जलस्तर 45 सेंटीमीटर कम होकर 231.80 मीटर पर पहुंच गया। इसलिए यमुना नदी अभी भी खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं जिससे खतरा अभी टला नहीं है। इससे पहले बृहस्पतिवार सुबह 8 बजे हथिनी कुंड बैराज से 1 लाख 59757 क्यूसेक पानी यमुना नदी में डिस्चार्ज किया गया।
बॉर्डर पर बांध के कटान को लेकर आयुक्त ने लिया संज्ञान
अलीपुर, सुभानपुर बांध गाजियाबाद बॉर्डर पर यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बांध का कटान होने कि सूचना को आयुक्त ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने बागपत और गाजियाबाद के जिलाधिकारी के साथ-साथ पुलिस अधीक्षक और प्रशासनिक अधिकारियों को दल बल के साथ मौके पर भेजा है। अधिकारियों ने आयुक्त को भेजी रिपोर्ट में अवगत कराया है कि बांध को जल्द से जल्द दुरस्त कर लिया जाएगा। प्रशासन द्वारा बांध के कट को देर रात तक नियंत्रण कर लिया जाएगा, जिस पर निरंतर कार्य चल रहा है।



