Saturday, February 14, 2026
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खफा महापौर, अधिकारियों को सुनाई खरी-खरी

  • महानगर की सड़क में हुए गड्ढों में धंसी कूड़े से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली, महापौर हुए आग बबूला

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: महापौर हरिकांत अहलूवालिया सोमवार को बुढ़ाना गेट स्थित शहीद मंगल पांडेय प्रतिमा के पास होने वाले पौधरोपण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। उधर से एक कूड़े से लदी टैÑक्टर-ट्रॉली, जिसमें कूड़ा ढका हुआ नहीं था। जैसे ही महापौर की गाड़ी उस ट्रॉली से ओवरटेक कर रही थी, उस दौरान एक पहियां सड़क में बने गड्ढे में गिर गया और वह पलटने से बच गई।

गनीमत रही कि वह ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं पलटी। जिसके बाद महापौर गाड़ी से उतरे और उन्होंने निगम के अधिकारियों को जमकर सुनाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों में इतने गड्ढे हैं, यह कब भरेंगे। उधर, निगम के कुछ कर्मचारियों ने बताया कि सड़क में जल निगम के द्वारा गड्ढे खुदवा दिए जाते हैं। उन्हें भरवाया नहीं जाता। जिसके बाद जेसीबी बुलवाकर गड्ढे में धंसी ट्रॉली को निकलवाया। करीब आधा घंटे तक मार्ग बाधित रहा।

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उसके बाद महापौर हरिकांत अहलूवालिया व प्रभारी नगर स्वास्य अधिकारी डा. हरपाल सिंह पौधरोपण कार्यक्रम में शामिल होने को रवाना हुए। जनवाणी ने 17 जुलाई के अंक में शहर की सड़कों पर कूड़े बेशुमार व सड़कों में गड्ढे एक लाख पार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया। जिसमें निगम की लगातार खराब हो रही छवि एवं निगम के द्वारा शिकायतों का निस्तारण नहीं करने को लेकर भी महापौर निगम के अधिकारी एवं कर्मचारियों पर खासे नाराज दिखाई दिए।

कबाड़ में तब्दील हो चुके वाहनों से ढोया जा रहा शहर कर कूड़ा

शहर का कूड़ा ढोने वाले अधिकतर वाहन जर्जर होकर कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। ऐसे वाहन सड़कों पर मानो मौत बनकर दौड़ रहे हो, किस समय कोई बड़ा हादसा हो जाये कहा नहीं जा सकता। जर्जर वाहन किस समय सड़क में बने गड्ढों में धंसकर दो हिस्सों में बंट जाये कहना मुश्किल हैं। ऐसे ही अधिकतर जर्जर वाहनों के पिछले हिस्सों पर नंबर पलेट नहीं होने के चलते ऐसे वाहनों से कोई हादसा हो जाये तो पुलिस की पकड़ में भी आना मुश्किल है।

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ऐसे वाहनों पर तिरपाल आदि से ढककर कूड़ा नहीं ढोया जाता,बल्कि वाहन ऊपर से खुला रहता है और कूड़ा सड़क पर बिखता चला जाता है। नगर निगम के द्वारा प्रतिवर्ष महानगर के कूड़ा निस्तारण के लिए वाहनों की खरीद एवं मेंटीनेंस पर काफी बजट खर्च किया जाता है। उसके बावजूद यदि कबाड़ में तब्दील हो चुके वाहनों से यदि शहर का कूड़ा ढोया जा रहा हो तो ऐसे में क्या कहा जा सकता है।

अधिकतर वाहन इतने जर्जर हो चुके हैं कि वह बिना कूड़ा वाहन में भरे ही यदि गड्ढों वाली सड़क से गुजार दिया जाये तो वह दो हिस्सों में टूट सकता है। कुछ जर्जर वाहनों के पिछहे हिस्से तो कुछ वाहनों पर आगे के हिस्से पर नंबर पलेट तक ही नहीं लगी हुई है। शायद इसका निगम के अधिकारियों को भी पता है कि यदि कबाड़ में तब्दील वाहन से कोई दुर्घटना हो जाये तो जब नंबर ही नहीं होगा तो फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकता है।

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साथ ही निगम के द्वारा जो ई-चालान काटे जाते हैं, वह भी नहीं कट सकेगा। निगम के अधिकारियों का कहना है कि कुछ वाहन जोकि बीवीजी कंपनी की तरफ से चलाए जा रहे हैं। वह जर्जर हालत में होने के बाद बीवीजी कंपनी के द्वारा मरम्मत तक नहीं कराई जा रही है।

कुछ वाहनों को जर्जर होने पर डिपो में खड़ा करा दिया जाता है। फिलहाल अधिकारी भले ही दबे मन से स्वीकार कर रहे हों कि जर्जर वाहनों से कूड़ा ढोया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता का उन्हें भी पता है, लेकिन यदि ऐसे में किसी कबाड़ में तब्दील वाहन से कोई बड़ा सड़क हादसा हो जाये तो उसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन होगा।

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