जनवाणी संवाददाता |
बड़ौत: ढिकाना में आर्य वीर दल द्वारा प्रायोजित व सर्व विकास संस्थान द्वारा आयोजित योग एवं चरित्र निर्माण शिविर के 17वें दिन योगाचार्य धर्मवीर आर्य ने आर्य ने बालक व बालिकाओं को आत्मरक्षा के लिए विभिन्न अभ्यास कराए। इस मौके पर योगाचार्य धर्मवीर आर्य ने कहा कि आत्मरक्षा से मतलब यह है कि जब भी उन्हें कोई किसी प्रकार से तंग करे तो वह अपनी रक्षा के लिए सीखे गए अभ्यास के माध्यम से बच जाएं।
इस मौके पर उन्होंने बालिक बालिकाओं को पीटी, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, जूडो कराटे, डंबल, लेजियम योगासन, पिरामिड, तलवारबाजी एवं भाला आदि चलाने का अभ्यास कराया। आर्य वीर दल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मंत्री डॉ. रवि शास्त्री ने कहा शांत मन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए जीवन ऊर्जा का प्रथम सोपान है।
मानव जीवन में सबसे आवश्यक और अधिक मूल्यवान मन की शांति होती है। प्रसिद्धि धर्म संपत्ति नौकर चाकर सैर सपाटा सम्मान इत्यादि का भी मूल्य है। लेकिन हम इन सबसे अधिक मूल्यवान मन की शांति है। संसार में कुछ लोग है कि गरीब है। जिन्हें मात्र दिन रात रोटी कमाने की चिंता रहती है। कुछ इनसे ऊंचे स्तर के लोग हैं।
जिन्हें मध्यम वर्गीय कहा जाता है। जिनके पास दाल रोटी तो है। मकान भी है। लेकिन वह अधिक धन संपत्ति कमाने की इच्छा रखते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ और अधिक धनवान व्यक्ति हैं। जो धन-धान्य से भरपूर नौकर चाकर व अन्य अति आधुनिक सुविधाएं भी हैं। लेकिन, मन की शांति नहीं है। उन्होंने कहा कि तीनों ही स्तर के व्यक्ति मन की शांति को ढूंढते हैं। इस अवसर पर कपिल आर्य, नीटू, सिमरन, सीमा, सलोनी, अनुज, विपिन, देवेंद्र, परविंदर, सोनू आदि उपस्थित रहे।

