
सच में भारत वन नेशन-वन इलेक्शन मोड में चला गया है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में कमेटी गठित हो गई है। इसी महीने 18 सितंबर से संसद का विशेष सत्र की चौंकाने वाली चर्चाएं थमीं नहीं थी कि 24 घंटे नहीं बीते कि सरकार ने अपनी नई मंशा साफ कर दी। हालांकि पहले ही देश में मध्यावधि चुनाव की चर्चाएं तेज हो गईं थीं। घरेलू रसोई गैस के दाम 200 रुपए घटाना इत्तिफाक नहीं हो सकता। भाजपा को लगता है कि उसके पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे लोकप्रिय चेहरा है, जिस पर देश को भरोसा है। इसी के चलते यह बड़ा फैसला लिया गया होगा? हर वक्त चुनावी मोड मे रहने वाली भाजपा, संगठन को लेकर जितना गंभीर है, उतना कोई दूसरा दल नहीं हो सकता है। विपक्ष जब एकजुटता के लिए तीसरी बैठक कर रहा था, तभी इन घोषणाओं से एकता के महायज्ञ में भाजपा ने बड़े विघ्न की आहुति दे दी हो?