- शहर की सड़कों पर बढ़ रही भारी भीड़, जाम के झाम से तभी मिलेगी कुछ निजात
- ई-रिक्शा पर अंकुश लगाने के लिए चलाना होगा आरटीओ को अभियान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आरटीओ में 6000 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, बाकी शहर में दौड़ करीब 30,000 रहे हैं। अवैध तरीके से दौड़ रहे ई-रिक्शा पर आरटीओ अंकुश नहीं लगा पा रहा हैं। यही वजह है कि शहर की सड़कों पर भारी भीड़ बढ़ गयी हैं। ई-रिक्शा पर अंकुश लगाने के लिए आरटीओ को अभियान चलाना होगा, जिसके बाद ही अवैध ई-रिक्शा सड़कों से हट पाएंगे। आरटीओ हिमेश तिवारी ने पिछले दिनों अभियान चलाकर करीब 200 ई-रिक्शा पकड़े थे और चालान भी किये गए थे।
दरअसल, ई-रिक्शा शहर की बड़ी समस्या बन गए हैं। क्योंकि पंजीकरण से ज्यादा अवैध ई-रिक्शा शहर में दौड़ रहे हैं, जो जाम की मुख्य वजह बन रहे हैं। इसको लेकर ही आरटीओ को पहल करनी पड़ेगी, जिसके बाद ही इस समस्या से निजात मिल सकेगी। इसमें दो राय नहीं है कि ई-रिक्शा से सुविधा भी बढ़ी, लेकिन साथ ही समस्या ज्यादा बढ़ गयी। पंजीकरण से ज्यादा ई-रिक्शा कैसे दौड़ रहे हैं, उन पर अंकुश क्यों नहीं लग रहा हैं? इसको लेकर आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस को संयुक्त रूप से अभियान चलाना चाहिए, तभी जाकर समस्या का निस्तारण संभव हो सकता हैं।

इस बात को अधिकारी भी मानते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं करते। ई-रिक्शा बिना नंबर प्लेट दौड़ रहे हैं। हेड लाइट टूटी हुई हैं। इस तरह से तमाम तरह की अनियमितता इनमें हैं, मगर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं? ये भी एक बड़ा सवाल हैं। फिर इनके स्टैंड सड़कों पर बना दिये हैं, जो बड़ी समस्या बन गए हैं। इस वजह से भी जाम लगने लगा हैं। बेगमपुल पर तो इनके हटने से लोगों ने राहत ली हैं। अब वहां जाम नहीं लगता।
पीएल शर्मा रोड के सामने ई-रिक्शा खड़े कर दिये जाते थे, जो जाम से दिन भी लोग जूझते थे। इससे जनता ने एसपी ट्रैफिक के प्रयास से राहत महसूस की, लेकिन सोतीगंज चौराहे पर ये जाम फिर लगने लगा। यहां पर ई-रिक्शा खड़े कर दिये जाते हैं, जिससे परेशानी हो रही हैं। इस पर भी अंकुश लगना चाहिए। ई-रिक्शा सड़क से अलग हटकर खड़े करने चाहिए, वहीं पर सवारी जाए और सड़क पर चलते रहे। ऐसा करने से जाम से निजात मिल सकती हैं।

