जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने भारतीय न्याय व्यवस्था की मौजूदा चुनौतियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इसमें सुधार की सख्त आवश्यकता है। नालसार विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश की न्याय प्रणाली कई अनोखी और गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है, जिन्हें हल करने के लिए अब ठोस कदम उठाना ज़रूरी है।
उन्होंने कहा कि मुकदमों में होने वाली देरी आम बात हो गई है और कई बार विचाराधीन कैदी वर्षों जेल में बिताने के बाद निर्दोष पाए जाते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं इन समस्याओं का समाधान निकालने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
छात्रों को दी पढ़ाई और मार्गदर्शन को लेकर सलाह
मुख्य न्यायाधीश ने छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति का लाभ उठाने की सलाह दी, ताकि उनके परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि मार्गदर्शक चुनते समय उनकी ईमानदारी और मूल्यों को प्राथमिकता दी जाए, न कि उनकी स्थिति या शक्ति को।
दीक्षांत समारोह में न्याय और प्रशासन के कई वरिष्ठ हस्तियों की मौजूदगी
दीक्षांत समारोह में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस पीएस नरसिम्हा और तेलंगाना उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुजॉय पॉल भी मौजूद रहे। समारोह का आयोजन उत्साह और गरिमा के साथ हुआ।
संविधान को बताया रक्तहीन क्रांति का आधार
इससे पहले महाराष्ट्र विधानमंडल में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा था कि भारत का संविधान देश में सामाजिक और आर्थिक समानता लाने का प्रभावी हथियार रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका ने मिलकर बीते 75 वर्षों में संविधान को जीवंत रखा है, और वे स्वयं को गर्वित महसूस करते हैं कि वे इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

