जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को जानकारी दी कि 31 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है।
हटाने की प्रक्रिया शुरू
लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि संविधान और न्यायिक प्रक्रिया के तहत, इस प्रकार के मामलों में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाता है। उन्होंने सदन को बताया कि संबंधित समिति का गठन कर दिया गया है, जिसमें निम्नलिखित तीन प्रमुख सदस्य शामिल हैं जस्टिस अरविंद कुमार – सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव – मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश, बी.वी. आचार्य – वरिष्ठ अधिवक्ता। यह समिति जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करेगी और आगे की प्रक्रिया की सिफारिश करेगी।
क्यों है यह कदम अहम?
भारतीय न्यायिक प्रणाली में किसी न्यायाधीश को पद से हटाना एक गंभीर और दुर्लभ प्रक्रिया है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष प्रक्रिया और बहुमत की आवश्यकता होती है। पहले चरण में शिकायत की जांच के लिए समिति गठित की जाती है, जो यह तय करती है कि आरोपों में कितना दम है।
संसद की कार्यवाही फिर से हुई प्रारंभ
इस घटनाक्रम के साथ ही लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर सुचारू रूप से शुरू हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए सदन को पारदर्शिता और संविधान सम्मत प्रक्रिया का आश्वासन दिया।

