Saturday, March 28, 2026
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Bank Data Breach: भारत में बड़ा Data Leak, लाखों बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड इंटरनेट पर उजागर

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: भारत में डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर गहरा गई है। हाल ही में सामने आए एक बड़े साइबर सुरक्षा उल्लंघन में, लाखों बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड इंटरनेट पर लीक हो गए हैं। इस संवेदनशील जानकारी में खाताधारकों के नाम, बैंक खाता नंबर, लेन-देन की राशि और संपर्क विवरण जैसे व्यक्तिगत विवरण शामिल हैं।

कैसे सामने आया मामला?

साइबर सुरक्षा क्षेत्र में काम करने वाली एक कंपनी की निगरानी के दौरान यह लीक सामने आया। अगस्त के अंत में कंपनी के रिसर्चर्स ने पाया कि अमेजन S3 क्लाउड सर्वर पर लगभग 2.73 लाख PDF फाइलें असुरक्षित रूप से उपलब्ध थीं।

इन फाइलों में बड़े पैमाने पर बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े रिकॉर्ड थे, जो खास तौर पर NACH (नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस) सिस्टम से संबंधित थे। NACH का उपयोग आमतौर पर सैलरी, लोन की किस्तों और यूटिलिटी बिलों के भुगतान के लिए किया जाता है।

किन बैंकों और संस्थानों का डेटा हुआ लीक?

रिसर्चर्स के मुताबिक, यह लीक कम से कम 38 बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुड़ा है। इनमें प्रमुख रूप से Aye Finance और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का नाम सामने आया है। लीक हुए दस्तावेजों में इन दोनों संस्थाओं की उपस्थिति कई बार दर्ज हुई है।

संस्थाओं की प्रतिक्रिया क्या रही?

इस मामले की जानकारी संबंधित संस्थानों को दी गई, जिनमें Aye Finance, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और अन्य एजेंसियां शामिल थीं।

हालांकि, NPCI ने यह स्पष्ट किया है कि उनके सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उनकी ओर से कोई डेटा लीक नहीं हुआ है। दूसरी ओर, Aye Finance और SBI ने अब तक इस मामले में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

CERT-In को दी गई सूचना, अब सर्वर सुरक्षित

रिपोर्ट सामने आने के बाद इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) को इस डेटा लीक की जानकारी दी गई। तत्पश्चात अमेजन S3 सर्वर को सुरक्षित किया गया, लेकिन चिंता की बात यह है कि डेटा लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहा और धीरे-धीरे इसमें नई फाइलें भी जुड़ती रहीं।

क्या कहता है यह डेटा लीक?

यह लीक भारत में डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर गहराते संकट की ओर इशारा करता है। जिस तरह बिना किसी एनक्रिप्शन या एक्सेस कंट्रोल के इतने संवेदनशील रिकॉर्ड खुले इंटरनेट पर उपलब्ध थे, वह गंभीर लापरवाही का संकेत देता है।

प्रभावित ग्राहक क्या करें?

अपने बैंक स्टेटमेंट की नियमित जांच करें

संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक को सूचित करें

OTP या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें

पासवर्ड और यूपीआई पिन को समय-समय पर बदलते रहें

बता दें कि, यह मामला महज एक डेटा लीक नहीं है, बल्कि भारत की डिजिटल इकोनॉमी की नींव को झकझोरने वाली चेतावनी है। जब तक डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक करोड़ों नागरिकों की प्राइवेसी खतरे में रहेगी।

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