जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोप तय होने के बाद बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। विपक्षी दलों ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया है, जबकि राजद समर्थक इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं।
क्या है मामला?
कोर्ट ने लालू परिवार पर आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव टेंडर में कथित भ्रष्टाचार को लेकर धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) जैसे गंभीर आरोप तय किए हैं। ये आरोप लालू यादव के रेल मंत्री कार्यकाल (2004-2009) के दौरान हुए कथित गड़बड़ियों से जुड़े हैं।
जेडीयू का हमला: “यह न्याय हुआ है”
जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि, “लालू परिवार पर 420 और 120बी के आरोप लगना स्वाभाविक है। उन्होंने सत्ता में रहते हुए अपने रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने के बदले जमीन लिखवा ली। फुलवरिया में जमीन बिकवाई गई, राबड़ी देवी के चाचा के परिवार को नौकरी दी गई और बदले में ज़मीन ली गई — यह भ्रष्टाचार का क्लासिक उदाहरण है।”
नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव से पूछा, “अगर आपके नाम पर संपत्ति थी तो आपने उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया? अगर न्यायपालिका की प्रक्रिया से आप असहमत हैं, तो आपके वकीलों ने प्रभावी जिरह क्यों नहीं की?”
“कानून सभी के लिए समान” — भाजपा प्रवक्ता
भाजपा के प्रवक्ता ने भी तीखा बयान देते हुए कहा कि, “भारत का कानून सबसे ऊपर है। कोई कितनी भी बड़ी हस्ती क्यों न हो, कानून सबके लिए बराबर है। आज अदालत ने लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय किए, यह न्याय है। जनता अब ऐसे परिवारवादी, भ्रष्टाचारी और वंशवादी राजनीति को नहीं चाहती।”
उन्होंने मांग की कि, “लालू परिवार को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई सत्ता का दुरुपयोग न कर सके।”
सियासी असर और आगे की राह
राजद समर्थकों ने कोर्ट के फैसले को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया है, जबकि विपक्ष इसे “भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी जीत” कह रहा है। ऐसे में यह मामला बिहार की आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

