भिया इन दिनों विचारक बनने की यात्रा में है। चुनाव दूर है तो यही कर लिया जाए। ऐसा भिया के मन में विचार उमड़ा। विचार क्या, यह भिया के लिए क्रांतिकारी कदम जैसा है। अब तक माला, माईक, मंच व फोटो की ही हवा चल रही थी, लेकिन विचारों की हवा का आभाव था! भिया को फिर विचार आया कि इन सभी के साथ मुझे एक बड़ा विचारक भी होना चाहिए। जनता बात-बात में माईक पकड़ा देती हैं। ऐसे में बिना विचार के विचारक कैसे। मंच का संचालन करने वाला तो दो शब्द कहने को ही कहता है लेकिन ‘वे दो शब्द मंच से जनता तक पहुंचाने में बड़ी मशक्कत करनी होती है, कभी कभी तो विचारों के आभाव में एक शब्द भी नहीं निकलता। सिर्फ हवा ही माईक से निकलती है।’ इन सभी बातों को ध्यान में रखकर भिया आजकल विचारक बनने के लिए लंबी-लंबी चिंतन बैठकें कर रहे है।
विचारक बनने की इस बेचैनी में एक तरफ विचार है कि आ नहीं रहे हैं और कार्यकर्ता भिया के लिए नये-नये मंच तैयार कर रहे हैं। भिया के विचारक बनने की हवा चलाने के लिए क्षेत्र में पहले से धंसी पड़ी कुछ संस्थाओं को पुनर्जीवित किया गया और कुछ नई संस्थाओं का निर्माण किया गया। कार्यकर्ता जीजान से भिया के विचारक बनने की हवा बनाने लगे और इधर अभी भिया पक्के विचारक बने ही नहीं और कार्यकर्ताओं ने ‘भ्रष्टाचार हटाओ अभियान’ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भिया का नाम लिखा दिया। भिया चिंतित है कि अब इस विषय पर मैं क्या बोलूं! यह विषय तो मेरी विपरीत धारा का है। भला अब तक तो भ्रष्टाचार के मामलों में हम घिरते ही आए हैं, इस पर विचार रखूं। इस विचित्र मामले में कैसे हवा बनाऊं? यह कैसे संभव होगा।
ऐसी विपरीत परिस्थिति में नए-नए विचार आने लगे, उन्हें लगने लगा- विचारक बनने की हवा शुरू हो गई है। भिया अपने विषय की भूमिका बनाने लगे। भ्रष्टाचार हटाओ अभियान सिर्फ नारा नहीं, हमारे क्षेत्र व जनता के लिए एक क्रांति लाने वाला है..! ऐसे अजीबोगरीब विचार भिया के मन में गुड़गुड़ाने लगे। भिया का मन मंच की ओर जाने के लिए तड़फड़ाने लगा। शब्द विचार बनने को बेताब होने लगे, भिया का विचारक व्यक्तित्व अवतरण लेने लगा। दुनिया को एक ओर विचारक मिलने वाला है।
ऐसे ही विचार भिया के मन में क्रांति की हवा बनाने लगे। ‘भिया को विचारक बनने की हवा धीरे धीरे आने लगी।’ इस हवा को ओर बड़ा करने में कार्यकर्ता सोशल मीडिया का सहारा लेने लगे। धीरे धीरे विचारक बनने की हवा सभी ओर फैलने लगी। सुबह जैसे ही भिया घर से क्षेत्र के लिए निकलते उनकी फार्च्यूनर में लगे हूटर से उनके विचारक होने की हवा चलने लगती। फेसबुक पर जनता के नाम संदेश देने में बड़े विचारक होने की हवा का हल्ला रहता। विचारक बनने की हवा क्षेत्र में तीव्र गति से चलने लगी। पुराने विचारक व बुद्धिजीवी चिंतित होने लगे। भिया की विचारक बनने वाली हवा में पूरा क्षेत्र विकास की ओर अग्रसर होने लगा..!

