जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर/ देवबंद: जमीयत उलमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें कहा गया कि निजी स्थान पर धार्मिक प्रार्थना या इबादत के लिए प्रशासन से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।
मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि 27 जनवरी को आया इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिली धार्मिक आजादी की पुष्टि करता है। कहा कि हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों खासतौर पर यूपी में नमाज या अन्य धार्मिक आयोजनों को लेकर एफआईआर और गिरफ्तारियां की गईं, जो सरासर गलत थीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला ऐसी सभी कार्रवाइयों के खिलाफ एक कठोर संवैधानिक चेतावनी है।
मौलाना मदनी ने कहा कि संविधान नागरिकों को अपने अपने धर्म के आधार पर इबादत या पूजा पाठ करने का अधिकार देता है, जिसे राज्य अपनी मर्जी से नहीं छीन सकते और न हो रोक सकते हैं। मदनी ने कहा कि पवित्र रमजान माह आने को है और इस महीने में विशेष तरावीह और अन्य इबादत की जाती हैं। उम्मीद है कि अदालत के इस निर्णय के बाद यूपी पुलिस इस तरह की गैर संवैधानिक कार्रवाई से बचेगी और लोगों की इबादत में रुकावट नहीं डालेगी। उन्होंने सभी जिम्मेदार लोगों से हाईकोर्ट के आए इस निर्णय की कापी अपने पास सुरक्षित रखने का आह्वान किया।

