जनवाणी ब्यूरो |
यूपी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लगभग 1.06 करोड़ निराश्रित महिलाओं, वृद्धों और दिव्यांगजनों की पेंशन बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि बजट में शामिल नहीं थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 1,000 रुपये से 1,500 रुपये किया जाएगा। भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में भी इसी योजना का उल्लेख किया था।
शंकराचार्य विवाद पर मुख्यमंत्री का रुख
सीएम ने शंकराचार्य विवाद पर पहली बार सदन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कोई मुख्यमंत्री, मंत्री या सपा अध्यक्ष शंकराचार्य बनकर प्रदेश में नहीं घूम सकता। शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और सम्मानित है, लेकिन इसके लिए नियमों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए बराबर है और मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है।
सीएम ने माघ मेला का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दिन 4.50 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। नियमों का उल्लंघन करके वहां माहौल खराब करना श्रद्धालुओं के जीवन के लिए खतरा था और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी। उन्होंने सपा नेताओं से सवाल पूछा कि यदि वह शंकराचार्य थे तो वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों दर्ज कराई गई।
सपा पर आरोप और आस्था- विकास मॉडल
सीएम ने सपा पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा ने राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन में विकास कार्यों का विरोध किया। उनके अनुसार सपा सरकार में थानों और जेलों में जन्माष्टमी मनाने पर रोक थी, कांवड़ यात्रा और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा रोकी गई और रामभक्तों पर गोलियां चलाई गईं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में आस्था और विकास का संतुलित मॉडल लागू किया गया है। दीपोत्सव, रंगोत्सव जैसे कार्यक्रमों से करोड़ों लोग जुड़कर गौरव महसूस कर रहे हैं और आस्था को सम्मान देने से प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि हुई है।
अभिभाषण का विरोध मातृशक्ति का अपमान
सीएम ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण का मुख्य विपक्षी दल द्वारा विरोध करना मातृशक्ति का अपमान है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से कहा कि सनातन धर्म में अपनी उम्र से बड़ी महिला को भी मां समान सम्मान देना आवश्यक है। उन्होंने महर्षि वेदव्यास के शब्दों का हवाला देते हुए बताया कि “मां के समान कोई छाया, सहारा, रक्षक और प्रिय नहीं होता।”
पूर्ववर्ती योजनाओं और लाभार्थियों की तुलना
सीएम ने कहा कि पहले गरीबों को इंदिरा आवास योजना के तहत केवल ₹20,000 मिलते थे, जो पर्याप्त नहीं थे और लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंचता था। वर्तमान डबल इंजन सरकार नगरीय क्षेत्रों में ₹2.5 लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में ₹1.20 लाख आवास निर्माण के लिए प्रदान कर रही है। शौचालय निर्माण के लिए ₹12-15 हजार अतिरिक्त सहायता और मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी के बराबर मानदेय भी लाभार्थियों को दिया जा रहा है।
बहुआयामी गरीबी में कमी और समग्र विकास
सीएम ने बताया कि इन योजनाओं और विकास प्रयासों के कारण 6 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों और निर्माण श्रमिकों जैसी जरूरतमंद श्रेणियों के लिए नई आवास योजनाएं लाई जाएंगी, जिसकी घोषणा आगामी बजट भाषण में होगी।
योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि सरकार का प्रयास केवल आवास या आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के समन्वित विस्तार के माध्यम से समग्र विकास सुनिश्चित किया जा रहा है।
सीएम ने दोहराया: “हर गरीब को छत, हर निराश्रित को सम्मान और हर जरूरतमंद को अधिकार।” उन्होंने कहा कि यह धन जनता का है और इसका उपयोग जनता के हित में किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि विकास का लाभ बिना भेदभाव हर वर्ग तक पहुंचे और उत्तर प्रदेश गरीबी उन्मूलन में एक नई मिसाल कायम करे।

