Tuesday, April 14, 2026
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तिरंगे की खरीदारी पर भी कोरोना की मार

  • सुभाष नगर में होता है तिरंगा बनाने का कार्य
  • गणतंत्र दिवस करीब, किन्तु आॅर्डर मिल रहे गिने-चुने

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गणतंत्र दिवस को अब करीब एक सप्ताह ही शेष रह गया है। इस राष्टÑीय पर्व पर हर जगह तिरंगा ध्वजारोहण किया जाता है। ऐसे में शहर में तिरंगे बनाने का कार्य काफी समय पहले ही शुरू हो जाता है और इसके अर्डर भी भरपूर मिलते हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद से अभी तक खाली तरंगों का कारोबार गति नहीं पकड़ पाया है।

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय और अन्य स्थानों पर भी तिरंगा फहराया जाता है। जिसके लिए खादी का तिरंगा बनाने वाले कारीगरों को करीब एक महीना पहले से ही आॅर्डर मिलने लगते हैं, लेकिन इस बार राष्ट्रीय पर्व को सिर्फ कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, लेकिन तिरंगा कारीगरों को नाम मात्र ही आॅर्डर मिल पाए हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय पर्व के दिन सबसे ज्यादा खादी के तिरंगे शिक्षण संस्थानों द्वारा ही खरीदे जाते हैं। जिनमे छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में तिरंगा दिखाई देता है, लेकिन इसबार कोरोना काल के चलते शिक्षण संस्थानों में बच्चों की संख्या बेहद कम है और कहीं भी बड़े कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में खादी तिरंगे के कारीगरों पर इसका गहरा असर पड़ा है।

सुभाष नगर में बनाए जाते हैं खादी के तिरंगे

सुभाष नगर में वर्षों से खादी के तिरंगे बनाने का कार्य किया जा रहा है। शहर के गांधी आश्रम में मिलने वाले खादी के तिरंगे भी यही तैयार होते हैं। यहां रहने वाले रमेश चंद्र का परिवार आजादी के बाद से ही यानी करीब सन 1950 से यह कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पिता के बड़े भाई स्वर्ण लाखन सिंह ने यह पारिवारिक काम शुरू किया था। जिसके बाद उनके पिता स्व. नत्थे सिंह ने यह काम संभाला। उनके यहां शुरूआत से ही गांधी आश्रम के लिए खादी के तिरंगे तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा अन्य जिलों से भी आर्डर मिलते हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद से ही तिरंगे के आर्डर मिलने काफी कम हो गए हैं।

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