- चमरावल गांव में शुक्रवार को शराब पीने से एक ग्रामीण की हुई थी मौत
- शनिवार देर रात्रि तक भी गांव में नहीं पहुंचा था शव, मेडिकल में नहीं हुआ पोस्टमार्टम
मुख्य संवाददाता |
बागपत: रोती बिलखती आंखे, सिसकती जुबां। यह उस नारी की तस्वीर है जो अपने पति की मौत के गम में है। पति की मौत के बाद शव के दर्शन भी नहीं हुए। क्योंकि शुक्रवार से शनिवार की देर शाम तक पोस्टमार्टम तक नहीं हुआ। दिनभर वह और अन्य परिजन सहित ग्रामीण शव का इंतजार करते रहे, लेकिन पोस्टमार्टम नहीं होने के कारण शव नहीं पहुंचा। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
गौरतलब है कि चांदीनगर थाना क्षेत्र के चमरावल गांव में शराब से मौतों का कहर शुक्रवार तक रहा। बुधवार को चार मौत हुई और गुरुवार को एक मौत हुई। शुक्रवार को भी मुकेश पुत्र ओमदत्त की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि गुरुवार की रात्रि उसने तीन पव्वे शराब के पीए थे। जिसके बाद उसकी तबियत खराब हो गई थी। उसे आनन-फानन में परिजनों ने पिलाना सीएचसी पर भर्ती कराया था।
जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। जिला अस्पताल से उसे गंभीर हालत में मेरठ के लिए रेफर कर दिया था। बताया गया था कि उसके पेट में दर्द, उल्टी और आंखों की रोशनी कम हो गई थी। वह परिजन मेरठ मेडिकल में लेकर पहुंचे तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
हालांकि देर रात्रि तक भी कुछ परिजन इस बात को बताने से कतराते रहे। उसके बाद परिजनों को मृत होने की सूचना दी। जिससे घर में कोहराम मच गया। मुकेश की पत्नी काजल व उसके तीन बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल है। रात्रि में शव का इंतजार किया गया। शनिवार सुबह तक भी शव नहीं पहुंचा तो परिजनों व ग्रामीणों ने पता किया।
जिसके बाद बताया गया कि पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। कुछ तो यहां तक भी कह रहे थे कि कोरोना की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही शव का पीएम होगा। अब सच्चाई क्या है, यह तो चिकित्सक ही बता सकते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि दिनभर गांव में परिजन व ग्रामीण शव का इंतजार करते रहे, लेकिन शव नहीं पहुंचा।
मृतक मुकेश की पत्नी काजल भी गम में बदहवाश है और उसकी हालत भी बार-बार खराब हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मुकेश के पोस्टमार्टम में इतनी देरी समझ से परे है। जब उसकी मौत हो गई है तो क्यों परिजनों को शव नहीं दिया जा रहा है?
कब आएंगे पापा…
मुकेश के तीन बच्चे हैं। एक लड़का व दो लड़कियां है। बच्चे बार-बार यह पूछ रहे हैं कि उसके पापा कब आएंगे? मां भी उन्हें दिलाशा देकर रोती नहीं थमती है। क्योंकि सच्चाई से बच्चे अनजान है। वह भी अपने पापा का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें क्या मालूम है कि अब उनके पापा इस दुनिया में नहीं है।

