Sunday, February 8, 2026
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सबसे ज्यादा सहारनपुर के नेताओं ने बदला पाला

  • चुनाव के ऐन वक्त पर इमरान मसूद और धर्म सिंह सैनी ने बदला चोला
  • सियासी संग्राम में कई और नेताओं ने दल बदल कर ठोक दी है ताल

जनवाणी संवाददाता  |

सहारनपुर: बेशक पश्चिमी उप्र के कई जिलों में सियासी उठापटक रही किंंतु सहारनपुर में कुछ ज्यादा ही राजनीतिक तमाशा देखने को मिला है। विजय का धूमधड़ाका तो दस मार्च को वोटों की गिनती के बाद दिखेगा किंतु दल-बदल कर रंग बदलने वाले नेता इस चुनावी बेला में साफ दिख रहे हैं।

अवसर को भुनाने में आगे रहने वाले कई प्रत्याशी जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। लेकिन, सातों सीटों पर केवल सात ही उम्मीदवार लखनऊ की डगर आसान कर सकेंगे। अभी तो सभी जीत के दावे कर रहे हैं।

यह बताने की जरूरत नहीं कि सहारनपुर में मतदान दूसरे चरण यानि कि 14 फरवरी को होगा। वैसे भी सहारनपुर सभी प्रमुख सियासी दलों के केंद्र में है। यहां किसी एक दल की हवा कभी नहीं रही। हां, कुछ समय के लिए सहारनपुर को बसपा का गढ़ जरूर कहा जाने लगा था किंतु अब वह मिथक भी टूट चुका है।

पिछले 2017 के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा। कांग्रेस ने भी सपा से यारी के साथ ही दो सीटों पर कब्जा कर लिया था। अब जबकि 2022 का यह चुनाव सिर पर है तो सहारनपुर में सबसे ज्यादा उठापटक रही। हम बात करते हैं कद्दावर नेता डाक्टर धर्म सिंह सैनी की। सैनी एन वक्त पर भाजपा का साथ छोड़कर सपा में शामिल हुए और वह नकुड़ सीट से चुनाव साइकिल के चिन्ह पर लड़ रहे हैं।

कभी सियासत में सैनी के जानी दुश्मन रहे इमरान मसूद ने भी एन वक्त पर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव जैसा पद छोड़कर सपा में शामिल हो लिए। इमरान के सगे भाई नोमान मसूद ने रालोद का दामन छोड़कर हाथी की सवारी की है। वह भी चुनाव के ऐन वक्त पर। इसी तरह नकुड़ सीट से बसपा प्रत्याशी साहिल खान ने भी पाला बदला।

सपा ने जब उन्हें ऐन वक्त पर गच्चा दे दिया और टिकट नहीं मिला तो उन्होंने बसपा ज्वाइन की। बेहट सीट से कांग्रेस के विधायक रहे नरेश सैनी ने भी ऐन वक्त पर कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। नरेश सैनी बीजेपी के सिंबल पर बेहट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। देहात सीट से कांग्रेस के विधायक रहे मसूद अख्तर ने भी सपा की साइकिल पर सवारी कर ली है।

वह देहात सीट से सपा प्रत्याशी आशू मलिक को चुनाव लड़ा रहे हैं। देहात सीट पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे जगपाल सिंह ऐन वक्त पर बसपा का साथ छोड़ दिए। वह लंबे समय से हाथी के महावत रहे हैं। तीन बार बसपा के टिकट पर ही चुनकर लखनऊ पहुंचे थे। अब वह बसपा की धुर विरोधी भाजपा के सूरमा हैं।

इसी कड़ी रामपुर सीट से बसपा प्रत्याशी रविंद्र मोल्हू का नाम भी लेना समीचीन होगा। चुनाव से सवा साल पहले मोल्हू बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। लेकिन, अब वह रामपुर सीट से बसपा प्रत्याशी हैं। यानि कि मोल्हू की घर वापसी हुई है।

सदर सीट से बसपा प्रत्याशी मनीष अरोड़ा थे तो कांग्रेसी पर वह भी चुनावी बेला में हाथी पर सवार हो लिए। अगर देखा जाए तो जितने पाला-बदल नेता सहारनपुर में हैं, उतने अन्य जिलों में नहीं। इसीलिए हर सीट पर समीकरण उलझे हुए हैं।

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