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उपेक्षा का शिकार ऐतिहासिक कैथोलिक कब्रिस्तान

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उपेक्षा का शिकार ऐतिहासिक कैथोलिक कब्रिस्तान
  • गोबर डालकर दबंग कर रहे अवैध कब्जा
  • आसपास भी कर लिया गया निर्माण

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: सरधना का ऐतिहासिक कैथोलिक कब्रिस्तान उपेक्षाओं का शिकार हो रहा है। देख-रेख के अभाव में कब्रिस्तान में बनी इमारतें क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। यही नहीं कब्रिस्तान की भूमि पर दबंग गोबर डालकर कब्जा कर रहे है। इसके अलावा कब्रिस्तान के आसपास पक्के निर्माण कर लिए गए हैं। मगर अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। इससे कब्रिस्तान का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है।

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बिनौली रोड देवी मंदिर चौराहे के निकट इसाई धर्मालंबियों के ऐतिहासिक कैथोलिक कब्रिस्तान है। यह कब्रिस्तान बेगम समरू के जमाने का है। जिसमें बेगम के वंशज दफन हैं। कब्रिस्तान के बीचों-बीच बने एक बड़े मकबरे में बेगम के लड़के लुइस बाल्थाजार रेंनार्ड की पुत्री जुलिआना ऐन और गोद लिए बेटे डाइस समरू की मां के शव दफन हैं। यही नहीं बेगम के कई बेटे जिनकी बचपन में ही मृत्यु हो गई थी, उनकी कब्र भी इसी मकबरे में है। बेगम के पति ले वैसेऊ भी यहीं दफन हैं।

मकबरों को आकर्षक बनाने के लिए कारीगरों ने उनमें चांदी का रंग कर रखा था। यह कब्रिस्तान भारतीय पुरातत्व विभाग के अंदर में आता है। नियमानुसार कब्रिस्तान से दो सौ मीटर की दूरी तक कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। चेतावनी के लिए कब्रिस्तान के मुख्य गेट पर एक बोर्ड लगा हुआ है। मगर कब्रिस्तान की देख-रेख की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। जिसके चलते दबंगों ने कब्रिस्तान पर कब्जा करना शुरू कर दिया है।

कब्रिस्तान की कुछ भूमि पर गोबर और उपले पाथ दिए गए है। इसके अलावा दबंगों ने कब्रिस्तान की चारदीवारी तक तोड़ डाली। कब्रिस्तान में बनी इमारत क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इतना ही नहीं लोगों ने कब्रिस्तान के आसपास पक्की इमारतें भी बना ली गई है। इससे कब्रिस्तान का अस्तित्व खतरे में पड़ने लगा है।