- ब्लड बैंक में यूनिट की कमी 700 यूनिट की है क्षमता
- 400 यूनिट तक हर समय रहता है खून
- इस समय मात्र 100 से 150 यूनिट बैंक में है ब्लड
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेडिकल कॉलेज आसपास के क्षेत्र का सबसे बड़ा ऐसा संस्थान है। जहां मरीजों को हर समय इलाज की सुविधा मिलती है। यहां सर्जरी से लेकर डिलीवरी व दुर्घटनाओं के शिकार मरीजों को इलाज मिलता है, लेकिन पिछले कुछ समय से कोरोना के चलते यहां के ब्लड बैंक में खून की भारी कमी हो गई है।

लाला लाजपत रॉय मेडिकल कॉलेज में अलीगढ़, बुलंदशहर, हापुड़, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत आदि जिलों से मरीजों को लाया जाता है। इतने जिलों से आने वाले मरीजों की संख्या भी अधिक रहती है। इसी कारण खून की भी जरूरत पड़ती है, लेकिन पिछले दो साल से कोरोना के चलते रक्तदाताओं की कमी देखी जा रही है। जिस वजह से यहां के ब्लड बैंक में खून की भारी कमी देखी जा रही है।
ब्लड बैंक की क्षमता के अनुसार पहले यहां पर हर समय 400 यूनिट के करीब खून रहता था, लेकिन कोरोना काल में रक्तदान शिविर नहीं लगने के कारण अब केवल 100 से 150 यूनिट ही खून मौजूद है। वहीं इस संबंध में मेडिकल ब्लड बैंक के इंचार्ज डा. विजय का कहना है कि पिछले कुछ समय से कोरोन के चलते रक्तदान शिविर नहीं लग पा रहा है। इसका असर तो है, लेकिन हम संभाल रहे हैं। मार्च के बाद खून की अधिक जरूरत होती है। जिसके लिए अगले माह से शिविर लगाए जाएंगे, फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
इन मरीजों को होती है खून की जरूरत
वायरल के मरीजों में प्लेटलेट्स कम होने पर, दुर्घटनाओं के शिकार मरीज इमरजेंसी में भर्ती होने पर, गाइनिक विभाग में डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं को, कैंसर के कुछ मरीजों को, थैलीसीमिया के मरीजों को ब्लड चाहिए होता है।
रक्तदान करने की प्रक्रिया
10 मार्च के बाद मेडिकल कॉलेज में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें रक्तदान करने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। शिविर में रक्तदान हीमोग्लोबीन की मात्रा, सही वजन, शरीर में पानी की उचित मात्रा, बीपी और शुगर व किसी बीमारी की दवाई न लेने वाले कर सकते हैं। मेडिकल में 15 दिन पहले कैंप लगा था, जिसमे रक्तदाताओं की संख्या कम रही। कारण कोरोना के चलते लोगों का कैंप में नहीं आना है, जिस कारण ब्लड नहीं मिल पाता है।

