जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आदर्श रोड बनाने का प्लान धड़ाम हो गया है। मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने सर्किट हाउस से लेकर कमिश्नरी चौराहे तक सड़क को आदर्श रोड तैयार करने का प्रोजेक्ट तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किये जाने थे, लेकिन इस प्रोजेक्ट को रिजेक्ट कर दिया है।
अब इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं होगा। दरअसल, एमडीए के अधिकारी चाहते थे कि शहर में कम से कम एक आदर्श रोड तैयार की जाए। इसके लिए सर्किट हाउस से कमिश्नरी चौराहे पर जाने वाली रोड का चयन किया गया था। आदर्श रोड के तहत सड़क का तो पुन: निर्माण किया ही जाना था, साथ ही सड़क के दोनों तरफ स्ट्रीट लाइट दिल्ली राजपथ की तर्ज पर लगायी जानी थी।
डस्टबिन भी इस पर जगह-जगह लगाये जाने थे, जहां से डेली कूड़े का कलेक्शन किया जाना था। सड़क पर लाइनिंग, फुटपाथ भी दोनों साइड में बनाया जाना था। वर्तमान सड़क का चौड़ीकरण भी किया जाना था। इस तरह से तमाम सौंदर्यीकरण के हत्थकंडे इसमें इस्तेमाल किये जाने थे, लेकिन इस प्रोजेक्ट को आला अफसरों ने रिजेक्ट कर दिया हैं। अब इस प्रोजेक्ट पर कोई काम नहीं होगा। इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तक तैयार कर ली गई थी, जिसमें करीब डेढ़ करोड़ का खर्च इस पर आने वाला था।
पीएम आवास योजना भी धड़ाम
केन्द्र सरकार की पीएम आवास योजना भी धड़ाम हो गई है। पहली किश्त 23 करोड़ की अवश्य ही पीएम आवास योजना के लिए मिली थी, लेकिन इसके बाद केन्द्र व यूपी सरकार ने इस योजना के लिए एक पाई भी उपलब्ध नहीं कराई है। इस तरह से पीएम आवास योजना भी एक तरह से धड़ाम हो गई हैं।
वैसे इस योजना को लेकर प्रत्येक सप्ताह समीक्षा बैठक होती हैं, लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि जब योजना के लिए पैसा नहीं दिया जा रहा है तो फिर समीक्षा किस बात की जा रही हैं? इसमें तो वहीं बात हो गई कि सूत है नहीं और लठम-लठा हो रहे हैं।
समीक्षा भी तभी अच्छी लगती है जब इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा आया हो और काम नहीं हो पा रहा हो। काशी में एमडीए ने कुछ जगह नये प्रोजेक्ट के लिए भी तलाश ली हैं, जहां पर पीएम आवास बनाने की प्लानिंग है। इस पर प्रशासनिक व एमडीए के अधिकारियों ने फाइनल मुहर भी लगा दी हैं, लेकिन इस प्रोजेक्ट पर भी कोई काम नहीं हुआ है। इसमें भी मिट्टी का भराव काफी कराया जाना हैं, लेकिन काम कुछ भी नहीं हुआ है।
हालांकि आवास विकास परिषद ने आठ सौ मकान बनाकर तैयार कर दिये हैं, जिनकी लाटरी भी की जा चुकी हैं। आवास विकास परिषद को तीन हजार मकान और बनाकर देने हैं। इस पर अभी काम चल रहा है, लेकिन आर्थिक स्तर पर हालत आवास विकास परिषद की भी एमडीए जैसी हैं, वहां भी पीएम आवास के लिए किश्त नहीं मिली हैं।

