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बूढ़ी गंगा पर प्रशासन की ‘चतुराई’ काम न आई!

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बूढ़ी गंगा पर प्रशासन की ‘चतुराई’ काम न आई!
  • एनजीटी को भेजी गई रिपोर्ट में कई पेंच फंसे, तब हुआ एनजीटी सख्त

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: महाभारतकालीन बूढ़ी गंगा पर प्रशासन की ‘चतुराई’ काम न आई। एनजीटी ने बूढ़ी गंगा को लेकर जिन प्वॉइंट्स पर रिपोर्ट मांगी थी उसमें ही प्रशासन ने खेल कर दिया। आधी अधूरी और आधारहीन रिपोर्ट पर एनजीटी भी बिफर पड़ा और उसने सख्त रुख अख्तियार कर लिया। इसको लेकर जिलाधिकारी दीपक मीणा को 13 जनवरी को एनजीटी ने वर्चुअली पेश होने के आदेश दे दिए।

एनजीटी ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आखिरकार गलत रिपोर्ट क्यों पेश की गई इसका जवाब हमें अभी तक नहीं मिला। इस पूरे मामले में पैरवी कर रहे लोगों ने यहां तक आशंका व्यक्त की है कि जो गलत रिपोर्ट भेजी गई है कहीं उसके पीछे अवैध कब्जाधारियों को बचाने की कोई साजिश तो नहीं है।

अपनी ही रिपोर्ट में फंस गई ज्वॉइंट कमेटी

दरअसल डीएम या उनके रिप्रजेंटेटिव, सिंचाई विभाग एवं पॉल्यूशन बोर्ड के अधिकारियों के रूप में बनाई गई ज्वॉइंट कमेटी खुद अपनी ही रिपोर्ट में फंस गई। अपनी रिपोर्ट में जो सबसे बड़ी हास्यास्पद बात ज्वॉइंट कमेटी ने कही है वो यह कि गंगा में बाढ़ आने के बाद ही बूढ़ी गंगा का स्रोत्र चलता है। जबकि बूढ़ी गंगा से गंगा की दूरी साढ़े सात किलोमीटर है।

लिहाजा जो दलील सिंचाई विभाग ने दी है वो मुमकिन ही नहीं है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गंगा में आने वाली बाढ़ की वजह से ही हस्तिनापुर का इतना बड़ा क्षेत्र बाढ़ ग्रस्त हो जाता है और यदि ऐसा है तो फिर बाढ़ के दौरान जो रिपोर्ट प्रशासन द्वारा दी जाती है वो किस आधार पर तैयार होती है।

इन मुद्दों पर प्रशासन हुआ फेल

  • बूढ़ी गंगा में कितने नाले समाहित होते हैं यह रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया पॉल्यूशन बोर्ड।
  • हस्तिनापुर के एक नाले की रिपोर्ट ही हुई पेश, इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आप बिना ट्रीटमेंट के कैसे इस नाले के पानी को गंगा में डाल रहे हैं।
  • मवाना तहसील के 30 गांवों से होकर बूढ़ी गंगा गुजर रही है लेकिन एसडीएम मवाना केवल सात गांवों की ही रिपोर्ट पेश कर पाए
  • ज्वॉइंट कमेटी एनजीटी कोर्ट को यह बताने में भी नाकाम रही कि बूढ़ी गंगा पर अतिक्रमण की स्थिति क्या है।
  • अतिक्रमणकारियों की कोई भी सूची ज्वॉइंट कमेटी कोर्ट में पेश नहीं कर पाई और न ही बूढ़ी गंगा की जमीन पर निर्माण कार्यों की रिपोर्ट।
  • सिंचाई विभाग ने तो रिपोर्ट में बूढ़ी गंगा का कोई भी नोटिफिकेशन न हाने की बात तक कह दी।