जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में हार के कुछ दिनों बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा यह सोच रही है कि वह शिवसेना (यूबीटी) को खत्म कर देगी, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। उद्धव ने दो टूक कहा कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक विचार है, जिसे खत्म करना नामुमकिन है।
शुक्रवार को अपने पिता और शिवसेना (अविभाजित) के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे की जन्मशती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग ठाकरे नाम को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हो पाएगा।
राज ठाकरे का तंज- राज्य में चल रही है ‘नीलामी’
इस कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे से पहले मंच पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भी राज्य की मौजूदा राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति ‘गुलामों के बाजार’ जैसी हो गई है। राज ठाकरे ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम समेत हाल के निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में खुलेआम ‘नीलामी’ चल रही है।
“शिवसेना नहीं होती तो भाजपा मंत्रालय तक नहीं पहुंचती”
उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर शिवसेना नहीं होती, तो भाजपा कभी भी बीएमसी या महाराष्ट्र सरकार के मुख्यालय ‘मंत्रालय’ के अंदर तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने भाजपा पर शिवसेना को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
बीएमसी चुनाव में गठबंधन का असर
उद्धव ठाकरे की यह टिप्पणी 15 जनवरी को हुए बीएमसी चुनावों के बाद आई है। इन चुनावों में भाजपा ने 227 में से 89 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर आई। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (29 सीट) के साथ गठबंधन कर भाजपा ने देश की सबसे अमीर नगर निगम पर ठाकरे परिवार का दशकों पुराना नियंत्रण समाप्त कर दिया।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी)-मनसे गठबंधन ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को बहुमत से रोकने में नाकाम रहा। शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतीं, जबकि मनसे को 6 सीटें मिलीं।
नतीजों पर क्या बोले उद्धव ठाकरे?
बीएमसी चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी मुंबई को ‘निगलना’ चाहते हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव में पहली बार बड़े पैमाने पर धनबल का इस्तेमाल किया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नतीजे पार्टी की उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम में विपक्ष एक मजबूत ताकत के रूप में उभरा है।
उद्धव ने मतदाता सूची में खामियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विपक्ष को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि अगर शिवसेना (यूबीटी) दोहरे मतदाताओं की पहचान नहीं करती, तो नतीजे और भी अलग हो सकते थे।
हिंदी अनिवार्य करने के फैसले पर नाराजगी
उद्धव ठाकरे ने पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य करने के फैसले पर भी कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि शिवसेना सत्ता के लिए नहीं, बल्कि मराठी मानुष के अधिकारों की रक्षा के लिए बनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र पर गैर-मराठी संस्कृति थोपने की कोशिश हो रही है और हिंदी को अनिवार्य करने का फैसला इसी साजिश का हिस्सा था, जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। उद्धव ने कहा कि शिवसेना कार्यकर्ताओं का पारंपरिक नारा ‘जय महाराष्ट्र’ खतरे में है और सभी से अपील की कि वे इसे अभिवादन के रूप में अपनाएं।

