- टोल ठेके में भद्द पिटने के सबक सिखने को तैयार नहीं कैंट बोर्ड
- पहले भी ठेकेदारों की वजह से मुश्किल में फंस चुके हैं कैंट के अफसर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रेवेन्यू सेक्शन की कारगुजारियों के चलते अपने ब्रिगेडियर व सीईओ को कोर्ट के कठघरे में खडे होकर याचना मांगने के बाद भी कैंट बोर्ड ने शायद कोई सबक नहीं सीखा है। रेवेन्यू सेक्शन की ऐसी ही एक और कारगुजारी सामने आयी है। करीब साल भर पहले कैंट क्षेत्र में विज्ञापन लगाने का ठेका 28 लाख में छोड़ा गया था। हैरानी तो इस बात की है कि ठेका छोड़ने के बाद कैंट अफसरों ने गाजियाबाद की जिस विज्ञापन कंपनी के नाम यह ठेका छोड़ा।
उससे एग्रीमेंट कराना भूल गए। हालांकि यह जिम्मेदारी रेवेन्यू सेक्शन की बनती है, लेकिन रेवेन्यू सेक्शन ने भी लगता है कि ठेकेदार को पूरी छूट और लूट की ठानी हुई है। उससे ठेके की शर्तों का एग्रीमेंट कराना भूले बैठे हैं। हैरानी तो इस बात की है कि कैंट बोर्ड के अफसर ही नहीं बल्कि छोटी-छोटी बातों पर बोर्ड की बैठकों में हंगामा बरपा करने वाले बोर्ड के सदस्य भी मुंह बंद किए हुए हैं।
कैंट बोर्ड के सदस्यों का तो ठेकेदार के पक्ष में होने की बात समझ में आती है, लेकिन रेवेन्यू सेक्शन ने एग्रीमेंट की कार्रवाई से क्यों हाथ खीचें हुए हैं, ये बात समझ से परे है। क्या रेवेन्यू सेक्शन एक बार फिर कैंट बोर्ड के सीईओ स्तर के अधिकारी को किसी कानूनी पचडे में फंसाने की ठाने हुए है। क्योंकि रेवेन्यू सेक्शन की एक कारगुजारी के चलते पूर्व में ब्रिगेडियन अनमोल सूद और तत्कालीन सीईआ प्रसाद चव्हाण को हाईकोर्ट कठघरे में खींच चुका है। उनसे क्षमा याचना कर चुका है।
टोल ठेकेदार की वजह से कैंट बोर्ड के बडे अफसरों को जो भी झटके या सदमे लगे हैं। उसके लिए कहीं न कहीं रेवेन्यू सेक्शन पर ही ठीकरा फोड़ा जाता रहा है। इस बात की यदि पड़ताल की जाए तो कहीं न कही कुछ सच्चाई भी नजर जाती है। ऐसा क्यों किया गया इसका उत्तर तो रेवेन्यू सेक्शन हेड ही दे सकते हैं। हालांकि यदि रेवेन्यू सेक्शन की कारगुजारियों की बात की जाए तो उसकी लंबी फेरिस्त है।
रजबन स्थित पार्क की वार्ड सात सदस्य द्वारा लंबे अरसे तक खुद ही बुकिंग करते रहना भी इनकी कारगुजारियों का हिस्सा है। वहीं, दूसरी ओर जिस ठेकेदार को होर्डिंग का ठेका दिया गया है। उसी ठेकेदार को पूर्व में भी 42 लाख का होर्डिंग का ठेका चार साल के लिए दिया गया था। लेकिन दो साल बाद ठेकेदार ने घाटे की माला जपनी शुरू कर दी। टोल ठेके की तर्ज पर ही होर्डिंग ठेके में भी कैंट बोर्ड को राजस्व की हानि हुई।
कंपनी ब्लैक लिस्ट कर दी गयी। एक साल पहले उसे फिर से होर्डिंग लगाने का ठेका दे दिया गया, लेकिन लगता है कि एक बार फिर कैंट बोर्ड को राजस्व का चूना लगाने की पटकथा तैयार की जा रही है। एक साल से ठेकेदार काम कर रहा है, लेकिन रेवेन्यू सेक्शन ठेके में कैंट बोर्ड के नियमों व शर्तोंं का एग्रीमेंट कराए भूला हुआ है। इस मामले में रेवेन्यू सेक्शन हेड से बात करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क न हो सका।
छावनी के कुछ इलाकों में नए सिरे से परिसीमन
छावनी के कुछ इलाकों को नगर निगम क्षेत्र में शामिल किए जाने के चलते लेखानगर व तोपखाना को छोड़कर बाकि इलाकों में नए सिरे से संयुक्त परिसीमन शुरू कराया जा सकता है। इसको लेकर कैंट प्रशासन के आला अफसरों व कैंट बोर्ड के पांच सदस्यों के बीच शुक्रवार को चर्चा होने की जानकारी मिली है। दरअसल इस आशय का प्रस्ताव पूर्व में भी सुनने को मिला था, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी।
सेना की ओर इस तरह का प्रस्ताव मंत्रालय को भेजा गया है। सेना की ओर से कहा गया है कि छावनियों के संचालन के नाम पर इन्हें दिए जाने वाली भारी भरकम रकम नहीं दे सकते हैं। इसके चलते सेना ने छावनी परिषदों को दिए जाने वाले तमाम फंडों में कटौती भी की है। वहीं, दूसरी ओर माना जा रहा है कि परिसीमन प्रक्रिया से पूर्व छावनी क्षेत्र में जितने भी अवैध निर्माण या ओल्ड ग्रांट के बंगलों की खरीद फरोख्त चल रही है। उनकी मुटेशन के नाम पर बडेÞ स्तर पर अब बंदरबांट शुरू की जा सकती है।
कैंट बोर्ड के कुछ सदस्यों का प्रयास होगा कि पिछली तारीखों में जितना जल्दी हो सके कार्य निपटा लिया जाए। उनके प्रयास कितने सफल होंगे ये कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर है कि कैंट बोर्ड के कुछ स्टाफ ने इसको लेकर पसीना बहाना शुरू कर दिया है।