Friday, February 13, 2026
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गजब: एक शिक्षक के भरोसे 74 छात्र

  • गेट बंद रखते हैं गुरुजी, कोई स्कूल में जाता है तो शिक्षक कहते हैं डीएम और बीएसए की लिखित अनुमति लाओ

जनवाणी संवाददाता |

कंकरखेड़ा: कासमपुर नगर प्राथमिक विद्यालय मकबरा-दो के 74 नौनिहालों का भविष्य दांव पर लगा है। शिक्षा के नाम पर इन बच्चों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। हालात इस कदर बदल गए हैं कि यहां की कोई सूचना बाहर न जा सके। इसके लिए गुरुजी ने पहरा लगा दिया है।

एक तो 74 छात्रों पर एक ही शिक्षक है। वह भी मुख्य दरवाजे को बंद रखते हैं और अपनी मनमर्जी से स्कूल चला रहे हैं। जब चाहे बच्चों को लंच कर दे या फिर मर्जी सभी बच्चों को कक्षा में बैठा दे। क्षेत्रीय लोग शिक्षक के खिलाफ काफी दिनों से शिकायत दे रहे हैं।

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कासमपुर प्राइमरी विद्यालय मकबरा नंबर-दो में शिक्षा के नाम पर 74 नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। बच्चों के परिजन अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सपने संजोए हैं, लेकिन बच्चों का भविष्य कैसा होगा परिजनों को शायद अभी मालूम नहीं है।

74 बच्चों पर एक ही शिक्षक है। वह भी स्कूल का मुख्य दरवाजा बंद रखते हैं। क्षेत्रीय नागरिक और समाजसेवी संजीव मंगवाना ने इस संबंध में जनप्रतिनिधियों से भी शिकायत की है। उनका कहना है कि शिक्षक तानाशाही रवैया अपना रहे है। कोई स्कूल में पहुंचता है तो उससे जिलाधिकारी या बेसिक शिक्षा अधिकारी की लिखित अनुमति की मांग की जाती है।

उन्होंने बताया कि गुरुजी कहते हैं कि जिलाधिकारी की लिखित अनुमति के बाद ही स्कूल प्रांगण में प्रवेश किया जा सकता है। वहीं, समाजसेवी सुरेश लोधी का कहना है कि स्कूल में एक तो शिक्षक की संख्या मानक के अनुरूप नहीं है। दूसरी बात जो एक शिक्षक है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

विद्यालय में मानक के अनुरूप नहीं शिक्षक

इस विद्यालय में 38 छात्राएं और 36 छात्रों का रजिस्ट्रेशन है। मानक के अनुसार 30 छात्रों पर एक शिक्षक, 45 छात्रों पर दो शिक्षक, 60 छात्रों पर तीन शिक्षक और 75 छात्र-छात्राओं पर चार शिक्षक होने चाहिए, लेकिन इस विद्यालय में एक ही शिक्षक है। जिससे बच्चों का भविष्य अंधकार में दिखाई दे रहा है।

अपनी कमियों को छुपाने के लिए स्कूल प्रांगण में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाना उचित नहीं है। इस तरह से बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्कूल की बिल्डिंग भी ठीक नहीं है। छत में दरार पड़ी हुई है। कहीं बच्चों के साथ कोई घटना नहीं घट जाए।

बच्चों को तानाशाह नहीं गुरुजी चाहिए

सुरेश लोधी और संजीव मंगवाना का कहना है कि बच्चों को शिक्षा देने वाले गुरु चाहिए। उन्हें स्कूल में तानाशाही चलाने वाले किसी शिक्षक की आवश्यकता नहीं है। एक ऐसे शिक्षक की आवश्यकता है। जो उनके भविष्य को बेहतर बना सके। उन्होंने बताया कि स्कूल की बिल्डिंग भी ठीक नहीं है। छत में दरार पड़ी हुई है। कहीं बच्चों के साथ कोई घटना नहीं घट जाए।

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