- आने वाले दिनों में कोरोना संक्रमण की और भी अधिक जतायी जा रही आशंका
- सर्दी के मौसम में संक्रमण के बडे यूटर्न की बात आ रही सामने
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: 20 साल तक के युवा बड़ी संख्या में कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में 15 अक्टूबर से स्कूल खोले जाने के सरकार के फैसले पर सवाल खडे हो रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में कोरोना संक्रमण की और भी अधिक आशंका जतायी है।
खासतौर से सर्दी के मौसम में संक्रमण के बडे यूटर्न की बात कही जा रही है। ऐसे में स्कूलों के खोले जाने का फैसले पर बहस शुरू हो गयी है। इस संबंध में कई विशेषज्ञों से बात की गयी।
अभिभावक भी स्कूल खोले जाने के सरकारी फैसले को लेकर परेशान हैं। आने वाले सर्दी के महीनों में जिस प्रकार से कोरोना की सुनामी की आशंका जतायी जा रही है। उसको देखते हुए तमाम अभिभावकों को स्कूल भेजने को ना कहा है।
पहले प्लेन और ट्रेन तो शुरू कर लो
नौवीं से 12वीं तक की कक्षाएं शुरू करने के सरकार के आदेश पर अभिभावकों ने तीखीं प्रतिक्रियां व्यक्त की है। उनका कहना है कि कोरोना के खौफ के चलते अभी पूरी तरह से प्लेन व ट्रेन तो शुरू की नहीं जा सकी हैं। सभी रूटों पर मैट्रो भी नहीं चलायी जा रही हैं।
कई राज्यों की बसों के आने पर भी रोक है। ऐसे में स्कूल खोलने का बेतुका आदेश क्यों?
मीनाक्षीपुरम निवासी अभिभावक का बच्चा वेस्ट एंड रोड स्थित दीवान में कक्षा 10 का छात्र है उन्होंने इसे घातक फैसला करा दिया है।
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में रहने वाले कारोबारी का बेटा एमपीएस में पढ़ता है उन्होंने भी स्कूल खोलने के फैसले से ना-इंत्तेफाकी जतायी है।
सर्कुलर रोड पर रहने वाले केंद्र के एक बडेÞ अधिकारी की बेटी सोफिया में पढ़ती है, उन्होंने तो बेटी को स्कूल की अनुमति से साफ इनकार किया है।
कंकरखेड़ा के श्रद्धापुरी में रहने वाले सीडीएम आॅडिटर का बेटा दर्शन एकाडेमी में पढ़ता है उनका कहना है कि आनलाइन पढ़ाई ही ठीक है।
इसको लेकर जनवाणी ने अनेक स्कूलों के प्राचार्य व सहोदय विद्यालय के संयोजक से भी बात कही। उनका कहना है कि सरकार के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं, लेकिन स्कूल भेजना या न भेजना अभिभावकों की इच्छा पर छोड़ दिय गया है।
च्वाइस का आप्शन मौजूद
सहोदय सचिव राहुल केसरवानी सरकार के फैसले के साथ हैं। हालांकि उनका कहना है कि जहां तक बच्चों को स्कूल भेजे जाने का सवाल है तो इसमें च्वाइंस का आप्शन दिया गया है।
विरोध में अभिभावक संघ का डीएम को ज्ञापन
स्कूल खोले जाने के विरोध में अभिभावक संघ ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर डीएम के. बालाजी को ज्ञापन दिया। उन्होंने इसको बच्चों के लिए संक्रमण का बड़ा खतरा करार दिया है।
संघ के अध्यक्ष कपिल राज के नेतृत्व में रुचि गुप्ता, सोनाक्षी गर्ग, आशीष शंकर, बदर आलम, गौरव चौधरी व अन्य दर्जनों अभिभावक कलक्ट्रेट पहुंचे और ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि महामारी में स्कूल खोले जाना का फैसला बच्चों के साथ खिलवाड़ है। इसको वापस लिया जाना चाहिए।
कुछ और करना था इंतजार
रोहटा रोड स्थित गॉडविन स्कूल के प्रधानाचार्य विनम्र शर्मा का कहना है कि बच्चों व युवाओं में संक्रमण के मामलों को देखते हुए कुछ समय इंतजार किया जाता तो बेहतर था। उन्होंने इजराइल व साउथ कोरिया सरीखे देशों का मिसाल देते हुए बताया कि वहां बाद में स्कूल बंद करने पडे हैं।
मैमोरी लॉस का खतरा
जीआईसी के प्रधानाचार्य फतेह चंद का कहना है कि यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक स्कूल से दूरी घातक है। इससे मैमोरी लॉस का खतरा खड़ा हो गया है। फिर भी अभिभावकों को छूट है कि अपने बच्चों को स्कूल भेजे या न भेजें, ये उन पर निर्भर करता है।
बच्चों के लिए खतरा बरकरार
एमपीएस की प्रधानाचार्या मधु सिरोही कोरोना संक्रमण काल में बच्चों को स्कूल बुलाए जाने के फैसले को फिलहाल ठीक नहीं मानतीं। बडे नुकसान का आशंका है। उनका यहां तक कहना है कि एक अभिभावक के तौर पर वह इसे ठीक नहीं समझती हैं।
आंकड़े दे रहे गवाही
आईएमए के मेरठ चैप्टर के सचिव डा. अनिल नौसरान का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के आंकडे गवाही दे रहे हैं कि एक से 25 साल तक बच्चों व युवाओं में बड़ी तेजी से संक्रमण फैल रहा है। स्कूलों को खोलना सरकार का नीतिगत फैसला है, लेकिन जिस प्रकार से किशोरावस्था पर संक्रमण हमलावर है उसको देखते हुए इस प्रकार की जल्दबाजी को उचित नहीं है।

