- वेस्ट यूपी में दलित राजनीति में हुई नई शुरुआत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: 2024 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का सूपड़ा साफ होने के साथ ही चन्द्रशेखर ने आरक्षित नगीना सीट पर जीत हासिल कर वेस्ट यूपी में दलित राजनीति में नई शुरुआत की। इस बार के लोकसभा चुनाव ने कई नए रंग दिखाए। इस चुनाव में बसपा का सूपड़ा साफ हो गया। वेस्ट यूपी में बसपा के अधिकांश प्रत्याशियों को तीसरा स्थान ही मिल पाया। वे मेन फाइट से भी बाहर रहे। दलितों ने भी बसपा का दामन छोड़ दिया। बसपा एक बार फिर 2014 वाले रिजल्ट पाकर हाशिये पर पहुंच गई। वेस्ट यूपी में बसपा ने मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर देवव्रत त्यागी को चुनाव मैदान में उतारा था। वह मात्र 86,693 वोट ही हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे।
बागपत सीट पर बसपा प्रत्याशी प्रवीण बंसल मात्र 92,266 वोट हासिल कर तीसरे नंबर पर रहे। यहां भी दलितों की ज्यादा वोट पाने में बसपा कामयाब नहीं हो पाई। मुजफ्फरनगर सीट पर बसपा के दारा सिंह प्रजापति 1,43,707 वोट हासिल कर पाए। इस सीट पर दलितों की लगभग आधी वोट ही दारा सिंह हासिल कर पाए।सहारनपुर सीट पर बसपा प्रत्याशी माजिद अली को 1,80,353 वोट मिले। इस सीट पर अधिकांश दलितों ने बसपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डाले, लेकिन माजिद भी फाइट से बाहर रहे। कैराना सीट पर बसपा प्रत्याशी श्रीपाल मात्र 76,200 वोट हासिल पाए। बिजनौर सीट पर बसपा प्रत्याशी चौधरी विजेन्द्र सिंह 2,18,986 वोट हासिल कर पाए।
नगीना सुरक्षित सीट पर आजाद समाज पार्टी के चन्द्रशेखर ने 5,12,552 वोट हासिल कर जीत का ताज अपने सिर सजाया। उन्होेंने भाजपा के ओम कुमार को 3,61,079 वोट मिले। चन्द्रशेखर ने ओम कुमार को लगभग पौने दो लाख वोटों से शिकस्त दी। जबकि इस सीट पर बसपा के सुरेन्द्र पाल सिंह को कुल 13,272 वोट मिले। इस सीट पर बसपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। एक तरह से इस सीट पर बसपा हाशिये पर पहुंच गई। बसपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में वेस्ट यूपी में बिजनौर, सहारनपुर, नगीना और अमरोहा सीट पर जीत का परचम लहराया था, लेकिन 2024 के चुनाव में उक्त सभी सीटों को गवा दिया।
मुस्लिम कार्यकर्ताओं को निष्कासित करें मायावती
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता बुंदू खां अंसारी ने मायावती के उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें उन्होंने अब मुसलमानों को सोच समझकर टिकट देने की बात कही। बुंदू ने कहा कि यदि मायावती की ऐसी सोच है तो उन्हें अपनी पार्टी के मुस्लिम कार्यकर्ताओं को निष्कासित कर देना चाहिए। प्रेस को दिए बयान में बुंदू खां अंसारी ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा का गठबंधन था। बसपा को नौ सीटों पर जीत हासिल हुई, जबकि सपा को मात्र पांच सीटों पर संतोष करना पड़ा था। इससे स्पष्ट है कि 2019 के चुनाव में मुसलमानों ने दिल खोकर बसपा को वोट दिया था। 2024 के चुनाव में बसपा ने इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं बनी। इसका परिणाम हुआ कि मुस्लिम वोट बैंक इंडिया गठबंधन पर चला गया। मायावती का बयान द्वेषपूर्ण है और मायावती की मुस्लिमों की प्रति सोच को दर्शाता है। अब मुस्लिम कार्यकर्ताओं को बसपा से इस्तीफा दे देना चाहिए।

