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बड़ा सवाल: आखिर बिक क्यों रहा है चाइनीज मांझा?

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बड़ा सवाल: आखिर बिक क्यों रहा है चाइनीज मांझा?
  • हाईकोर्ट की रोक के बावजूद जगह-जगह धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज मांझा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भारत में चाइनीज मांझे की बिक्री पहले से प्रतिबंधित है। जिस पर हाईकोर्ट ने भी उत्तर प्रदेश में इसका कड़ाई से पालन करने का निर्देश दे दिया है। इसके बाद भी जिला प्रशासन इस पर अंकुश लगाने में फेल साबित हो रहा है। प्रशासन की नाक के नीचे इसका कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है।

इसके बाद भी आज तक चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। सवाल ये है कि प्रतिबंध के बाद भी चाइनीज मांझा बाजार में धड़ल्ले से कैसे बिक रहा है? क्या सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण स्थितियों में सुधार नहीं हो रहा है? मांझे की बिक्री और उपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस ऐसे तत्वों पर लगाम लगाने में नाकाम क्यों है? चाइनीज मांझा न केवल लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

चली-चली रे पतंग मेरी चली रे,चली बादलों के पार, हो के डोर पे सवार,सारी दुनिया ये देख-देख जली रे। अब पतंग को देखकर कोई इस गीत को याद नहीं करता बल्कि जान बचाने की कोशिश करता है ताकि पतंग में लगा चाइनीज मांझा कहीं जिंदगी की डोर न काट दे।

लाल, हरी, नीली, पीली आदि रंग-बिरंगी पतंगें जब आसमान में लहराती हैं तो ऐसा लगता है मानो इन पतंगों के साथ हमारे सपने भी हकीकत की ऊंचाइयों को छू रहे हैं और हम सभी सारे गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे की पतंगों के पेंच लड़ाते हैं। मकर संक्रांति और वसंत पंचमी के दिन पूरा आसमान लाखों पतंगों की अठखेलियों का गवाह बन जाता है। इन अठखेलियों के बीच आए दिन मांझा हादसों का कारण बनता जा रहा है।

बड़ा सवाल यह है कि जब चाइनीज मांझा जान का दुश्मन बन गया है फिर उसे पंतग बाजार में बिकने क्यों दिया जा रहा है। इसके पीछे पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत जगजाहिर है। सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद मौत का चाइनीज मांझा खूब बिक रहा है। खास बात यह है कि इस मौत के मांझे से कई लोगों की जान भी जा चुकी है, लेकिन बावजूद इसके अधिकारी आंखे मूंदे बैठे हैं।

खत्ता रोड, गोला कुआं और खैरनगर इस चाइनीज मांझे के मुख्य बाजार है, जबकि लालकुर्ती और पीएल शर्मा रोड समेत कई इलाकों में चाइनीज मांझा धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। खुलेआम चाइनीज मांझा दुकानों पर रखकर बेचे जा रहे हैं। इन दुकानदारों के चेहरे पर न तो पुलिस का कोई खौफ था न ही कानून का डर। एक चरखी में चार सौ मीटर चाइनीज मांझा होता है। एक चरखी को 200 से 225 रुपये में बेचा जाता है।

मांझा खींचने या तोड़ने पर आसानी से नहीं टूटता, इसे लोहे के बारुदा से बनाया जाता है। बिजली की लाइन पर गिरने से इसमें करंट उतरने की भी संभावना रहती है। चाइनीज मांझे की पिछले 10 दिन में कई लोग चपेट में आ चुके हैं। हापुड़ रोड, इंदिरा चौक, मछेरान, लिसाड़ीगेट, कोतवाली, देहलीगेट और अन्य स्थानों पर पक्षी भी चाइनीज मांझे की चपेट में आ रहे हैं चार दिन पहले हापुड़ रोड पर स्कूटर से जा रहा एक व्यक्ति मांझे से उलझ कर घायल हो गया था।

गत वर्ष सितंबर में दवा व्यापारी खतौली थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव निवासी अजय (24) पुत्र चंद्रपाल बाइक से मेरठ से अपने गांव रसूलपुर लौट रहे थे। मोदीपुरम फ्लाईओवर पर अचानक चाइनीज मांझा अजय की गर्दन फंस गया और जब तब वह संभल पाते मांझे ने उनकी गर्दन काट दी। गर्दन कटने से अजय लहूलुहान हालत में वहीं गिर गए। यह देख आसपास के लोग दौड़े और उन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया। उपचार के दौरान अजय की मौत हो गई थी।

इन पर भी नजर

23 सितंबर 2021-मोदीपुरम फ्लाईओवर वर दवा व्यापारी की मौत
27 नवंबर 2019-मलियाना पुल पर मांझे से गर्दन कटने से युवक लहूलुहान
10 दिसंबर 2017-शास्त्रीनगर में चाइनीज मांझे से बच्ची लहूलुहान हुई थी। उसका पैर कट गया था।
15 मार्च 2017-छात्र की इंचौली में चाइनीज मांझे से गर्दन कटी
1 फरवरी 2017-सर्वेश विहार में छत पर पतंगबाजी देख रहे बच्चे की गर्दन कट गई थी।
25 मई 2016-समर गार्डन कालोनी में बच्चे की गर्दन चाइनीज मांझे से कट गई थी।
13 अप्रैल 2016-कमेला चौकी के पास बाइक सवार की गर्दन कट गई थी।
12 फरवरी 2016 – गढ़ रोड पर बाइक सवार अकाउंटेंट की चाइनीज मांझे से गर्दन कटी

चाइनीज मांझे को लेकर खैरनगर में पतंग की दुकानों का निरीक्षण

वसंत पंचमी को लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है। चाइनीज मांझे पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिये सोमवार को अपर जिलाधिकारी नगर ने खैरनगर के चूड़ी बाजार में पतंगों और मांझा के बाजार का निरीक्षण किया।

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अपर जिलाधिकारी नगर दिवाकर सिंह ने बताया कि उनके द्वारा खैरनगर में फिरोज पुत्र मोहम्मद निजाम निवासी जलीकोठी, जुबैर अहमद पुत्र मोहम्मद इस्ताक, निवासी गूलर वाली गली, खैरनगर व वसीम पुत्र आबिद भाई निवासी खैरनगर आदि लगभग 12 पतंगों की दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान पतंग उड़ाने में प्रयुक्त होने वाला मांझा बरेली का बना पाया गया। कोई चाइनीज मांझा नहीं पाया गया।

खैरनगर के सभी पतंग बेचने वाले दुकानदारों को हिदायत दी गई कि कोई भी प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री नहीं करेगा, जो दुकानदार चाइनीज मांझे की ब्रिकी करते हुए पाया जायेगा। उसके विरुद्ध धारा-5 इन्वायरमेन्ट प्रोटेक्शन आईपीसी की धारा 188 के अन्तर्गत कानूनी कार्रवाई की जायेगी। पूर्व में चाइनीज मांझे ग्लास कोटिट मेटेरियल से बना होता है, जिससे देश के अन्य शहरों में कई मौतें भी हो चुकी है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा भी चाइनीज मांझा जो नायलॉन व सिन्थेटिक मेटेरियल से बना है। उसके प्रयोग को प्रतिबंधित किया गया है। अपर जिलाधिकारी नगर ने शहर व सभी थानाध्यक्षों को निर्देशित किया है कि प्रतिबंधित मांझे की बिक्री करने वालों की जांच पड़ताल करके रोका जायें।

चाइनीज मांझे की चपेट में आया मेडिकल का छात्र

प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी चाइनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। मांझे की चपेट से बेजुबान पक्षी तो घायल हो ही रहे हैं। अब एक मेडिकल का छात्र भी इसका शिकार हो गया। समय पर इलाज मिलने से युवक की जान तो बच गई, लेकिन वह अब भी दहशत में है।

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घटना कंकरखेड़ा क्षेत्र स्थित कैलाशी अस्पताल के पास की है। शनिवार को न्यू सैनिक कॉलोनी निवासी मेडिकल का छात्र प्रशांत वर्मा (21) पुत्र रविंद्र वर्मा बाइक पर सवार होकर हाइवे से गुजर रहा था। अचानक वह चाइनीज मांझे की चपेट में आ गया, उसने जो हेलमेट लगा रखा था। वह भी गिर गया और मांझा उसकी गर्दन और चेहरे पर लिपट गया।

किसी तरह युवक ने बाइक रोकी और मांझे से छुटकारा पाने की कोशिश करने लगा, लेकिन तबतक मांझे ने उसके चेहरे को काट दिया। जिससे ब्लडिंग शुरू हो गई। वहीं, गर्दन पर भी मांझे की धार का असर हुआ। सड़क पर ही युवक खून से लथपथ होकर गिर पड़ा। हालत बिगड़ने पर युवक खुद ही कैलाशी अस्पताल पहुंचा। जहां डाक्टरों ने उसका इलाज किया।

खुलेआम बिक रहा जानलेवा चाइनीज मांझा

प्रशासन के लाख दावों के बाद भी शहर में कई जगहों पर इसकी बिक्री धड़ल्ले से जारी है। खैरनगर बाजार पतंग-मांझे का बड़ा बाजार है, यहीं से पूरे जिले के फुटकर दुकानदार माल लेकर जाते हैं। खैरनगर में ही यह मांझा खुलेआम बिक रहा है, लेकिन प्रशासन आंख बंद करके सो रहा है।

कैसे करें बचाव?

पश्चिम उत्तर प्रदेश में वसंत पंचमी के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा है। आगामी शनिवार को वसंत पंचमी का त्योहार भी है। ऐसे में घर से निकलते हुए शरीर को पूरी तरह ढककर निकले। विशेष तौर पर अपनी गर्दन को बचाने का प्रयास करें, गर्दन पर मफलर या दूसरा कोई मोटा कपड़ा लपेट कर ही घर से बाहर निकले। बाइक चलाते हुए हेलमेट का प्रयोग अवश्य करें और छोटे बच्चों का विशेष तौर पर ध्यान रखें।