जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को बिहार पुलिस जेल भेजने की तैयारी कर रही है। फिलहाल, पप्पू यादव का इलाज पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है, क्योंकि गिरफ्तारी के दौरान उन्हें चोटें आई थीं। डॉक्टरों के अनुसार, सिर में चोट और धड़कन बढ़ने के कारण उन्हें तकलीफ हो रही है। पप्पू यादव ने इस बीच बिहार की नीतीश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ हत्या की साजिश रची जा रही है। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि आधी रात को सिविल ड्रेस में इंस्पेक्टर उन्हें गिरफ्तार करने आया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि किस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने इसे एक साजिश बताते हुए कहा कि उनकी हत्या हो सकती है। पेट्रोलिंग के बाद पटना पुलिस अब पप्पू यादव को कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है, जहां कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें जेल भेजा जाएगा।
पप्पू यादव के समर्थकों के आरोप
इस घटना के बाद पप्पू यादव के समर्थकों में काफी आक्रोश है। पटना, पूर्णिया और आरा जैसे शहरों में उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरा में तो समर्थकों ने हंगामा करते हुए सड़कों को जाम कर दिया। समर्थकों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पप्पू यादव ने नीट छात्रा केस में सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिससे एनडीए सरकार डर गई। अब सरकार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जो उनके अनुसार एक बड़ा अन्याय है।
पटना पुलिस का बयान
पटना के सिटी एसपी ने इस मामले पर जानकारी दी और बताया कि 1995 में एक मामला दर्ज हुआ था, जो पहले आईपीसी के तहत था। इसमें पप्पू यादव पर धोखाधड़ी और अन्य आरोप लगाए गए थे, जिसमें न्यायालय में ट्रायल चल रहा था। पप्पू यादव को कोर्ट में तय तारीख पर उपस्थित होना था, लेकिन वे उस दिन उपस्थित नहीं हुए, जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी की जा रही है। पटना पुलिस का कहना है कि पप्पू यादव के लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और पुलिस कानून के तहत ही कार्रवाई कर रही है।
धोखाधड़ी का मामला
जानकारी के मुताबिक, 21 साल पहले पप्पू यादव और उनके सहयोगियों पर विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति ने एक मामला दर्ज करवाया था, जिसमें आरोप था कि पप्पू यादव ने धोखे से एक मकान को कब्जा कर लिया। पहले वह किराएदार के रूप में उस मकान में दाखिल हुए और बाद में उसे हड़प लिया। यह मामला लंबे समय से कोर्ट में चल रहा था, लेकिन पप्पू यादव इस मामले में सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके बाद कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया।

