Sunday, February 15, 2026
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…तो बदल सकते हैं बॉम्बे माल के दिन

  • जाते-जाते थमा सकते हैं राहत की चिट्ठी, फाइलों में लगी है सील, मौके पर खुल रही तमाम दुकानें

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रंगसाज मोहल्ला बॉम्बे बाजार स्थित बंगला-176 बॉम्बे माल के दिन बहुरने की उम्मीद जतायी जा रही है। नवागत सीईओ नावेन्द्र नाथ के आने से पहले रियायत की चिट्ठी थमायी जा सकती है।

माना जा रहा है कि इसी उम्मीद में इन दिनों यहां मरम्मत का काम जोरों पर चल रहा है। दीपावाली पर्व को देखते हुए कई दुकानें भी खुल गयी हैं। हालांकि दुकानें तो काफी पहले से खुली हुई हैं। ये बात अलग है कि हाईकोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामा में यहां सील लगी हुई है।

ये है पूरा मामला

रंगसाज मोहल्ला बॉम्बे बाजार स्थित आवासीय बंगला 176 जीएलआर में सुदर्शन माला जैन व राजकुमार जैन समेत करीब आठ के नाम दर्ज है। साल 1998-99 में पर कुछ भूमाफियाओं की नजर पड़ी बंगले का अपरोक्ष सौदा कर लिया गया। साथ ही निर्माण शुरू कर दिया। उस दौरान कैंट बोर्ड में सीईओ हरीश प्रसाद थे। सुदर्शन माला जैन की ओर से इसमें मरम्मत के नाम पर नक्शा दाखिल किया गया।

तत्कालीन सीईओ के कठोर रवैये के चलते बोर्ड बैठक में नक्शे को एक राय से रिजेक्ट कर दिया गया। बॉम्बे बाजार मेन रोड स्थित इस बे शकीमती बंगले की आने वाले दिनों में कारोबारी अहमियत को समझते हुए सदर के कई बडेÞ बिल्डर जिनमें किसी श्यामा सर्राफ नाम के शख्स का भी नाम लिया जा रहा है वो इसमें कूद पडेÞ। हालांकि जनवाणी किसी के नाम की पुष्टि नहीं करता। उनकी ओर से आउट साइड सिविल एरिया का हवाला देकर बंगला फ्री होल्ड का आवेदन किया गया। जिसको रिजेक्ट कर दिया गया।

पीपीई ऐक्ट की कार्रवाई

बंगले का नक्शा व फ्री होल्ड किए जाने का आवेदन बोर्ड द्वारा रिजेक्ट किए जाने के बाद भी वहां जब अवैध रूप से निर्माण का काम जारी रहा तो तत्कालीन सीईओ केजेएस चौहान व डीईओ ने आपत्तिजनक मानते हुए पीपीई ऐक्ट की कार्रवाई कर दी। बोर्ड की पीपीई ऐक्ट की कार्रवाई के खिलाफ सुदर्शन माला जैन जिला जज के यहां अपील में चली गयीं, लेकिन वहां से काई राहत नहीं मिली। इतना ही नहीं अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश जिला अदालत ने कर दिए।

हाईकोर्ट से हासिल किया स्टे

इस बीच साल 2004-5 में कैंट बोर्ड की कार्रवाई के खिलाफ राहत के लिए हाईकोर्ट में फरियाद की तो वहां यथास्थिति के आदेश कर किसी भी प्रकार की कार्रवाई ध्वस्तीकरण व निर्माण पर स्टे दे दिया गया। हाईकोर्ट के यथा स्थिति के आदेशों के बाद भी बॉम्बे माल का अवैध निर्माण जारी रहा। ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर व सेकेंड फ्लोर खड़ा कर दिया गया। तीन पालियों में ताबड़तोड़ निर्माण किया गया। कोर्ट के आदेश के बाद डीईओ धनपत राम की अतिरिक्त कोशिशों के चलते बॉम्बे माल ध्वस्त कर किया गया। इसके ध्वस्तीकरण का लाइव प्रसारण हाईकोर्ट में देखा गया।

सील न लगाने की कारगुजारी

ध्वस्तीकरण के बाद कोर्ट के आदेश पर बॉम्बे माल को सील भी किया जाना था, लेकिन कैंट बोर्ड के जिन कर्मचारियों पर ये जिम्मेदारी थी उन्होंने यहां खेल कर दिया। सील नहीं लगायी गयी। हालांकि फाइल में सील लगा दी गयी। सील न लगाए जाने की वजह से वहां दुकानें फिर से गुलजार हैं।

रियायत न बन जाएं चार्जशीट का सबब

जैसा की सुनने में आ रहा है कि बॉम्बे माल के दुकानदारों को मरम्मत के नाम पर रियायत की चिट्ठी थमायी जा सकती है, लेकिन विधि विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा करना आत्मघाती साबित हो सकता है। क्योंकि टोल की तर्ज पर ये मामला भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। किसी भी प्रकार के दबाव के चलते इस पर रियायत की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

ध्वस्तीकरण के आदेश

स्टे के बावजूद अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए ठोस साक्ष्य के साथ कैंट बोर्ड ने हाईकोर्ट में अवमानना का वाद दायर कर दिया। तत्कालीन चीफ जस्टिस देवी प्रसाद सिंह ने बिना देरी के ध्वस्तीकरण के आदेश दे दिए।

राजकुमारी जैन को भेजा जेल

अवमानना मामले की सुनवाई के दौरान राजकुमारी जैन कोर्ट में मौजूद थी। उन्हें हिरासत में ले लिया। आरोपी पाते हुए नैनी जेल भेज दिया। दो माह बाद उन्हें जमानत मिल सकी।

कैंट बोर्ड के सदस्यों का दिल मांगे मोर

कैंट बोर्ड में तबादला आदेश आने के बाद बोर्ड के कुछ या फिर कहें जिनका असर ज्यादा दिखाई देता है ऐसे सदस्यों की हालत ये दिल मांगे मोर सरीखी है। इसके चलते रेवेन्यू तथा स्टोर व अन्य सेक्शन में अपने कुछ करीबियों की भर्ती कराने के लिए हाथ-पैर मारे जा रहे हैं।

हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं कि किसी की भर्ती की गयी है या नहीं, लेकिन इसके लिए अर्जी कतार में है। सदस्यों की कोशिश है कि नवागत सीईओ कैंट के आने से पहले जितनी भी फाइलें अटकी हैं उनको क्लीयर करा लिया जाए। इसी क्रम में करीबियों की भर्ती का प्रयास किया जा रहा है या फिर यह भी संभव है कि इसमें सफलता हासिल कर ली गयी हो।

इसी तर्ज पर कुछ विवादित बंगलों, नक्शों, ठेकेदारों की फाइलें भी ओके कराने के प्रयास जोरों पर हैं। वहीं, दूसरी ओर कहा जा रहा है कि भर्ती का मामला कैंट बोर्ड में अखाडे का कारण भी बन सकता है। जगह कम हैं और भर्ती के लिए सिफारिश कराने वालों की संख्या बहुत ज्यादा। सिफारिश करने वालों में केवल बोर्ड के प्रभावशाली सदस्य ही नहीं बल्कि कई सेक्शन हेड व कर्मचारी नेताओं के करीबी भी इसको लेकर सिफारिश का उचित समय तलाश रहे हैं।

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