Saturday, April 4, 2026
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कैंट बोर्ड इंजीनियरों को सजा या फिर मेहरबानी!

  • इंजीनियरिंग विभाग जानता था कि कैंट में स्थित 22-बी बंगला हैं विवादित

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: 22-बी के टेÑडिंग लाइसेंस और उस पर सील के मामले में कैंट बोर्ड इंजीनियरों को एक तरह से जुर्माना करने के नाम पर बचा गया। जानते हुए अपराध करने की सजा कम से कम निलंबन की होनी चाहिए थी, लेकिन इसमें भी बोर्ड ने इंजीनियरों के प्रति शॉफ्ट कॉर्नर अपनाया। इंजीनियरिंग विभाग जानता था कि कैंट में स्थित 22-बी बंगला विवादित हैं। उस पर सील लग चुकी हैं, यह सबकुछ जानते हुए भी इंजीनियरों ने स्वीकृति की संस्तुति कैसे कर दी? इस मामले से स्पष्ट हो गया है कि कैंट बोर्ड में भ्रष्टाचार की भांग घुली हुई हैं, जिसमें सभी लिप्त हैं।

इसको लेकर कैंटोमेंट बोर्ड अध्यक्ष एवं ब्रिगेडियर राजीव कुमार भी नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने कहा भी था कि भ्रष्टाचार के जो मामले हुए है, उनसे कैंट बोर्ड की किरकिरी हुई हैं। कई मामलों से कैंट बोर्ड को शर्मसार कर दिया हैं, लेकिन इसके बावजूद गलत टेÑडिंग लाइसेंस जारी करने के मामले में सिर्फ वेतन कटौती बड़ी सजा नहीं होती।

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यह तो एक तरह से भ्रष्टाचारियों पर मेहरबानी ही की गई। सीईओ ज्योति कुमार ने ये कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि 22-बी विवादित हैं, यह उन्हें नहीं पता था। क्योंकि उनकी तैनाती नई हुई हैं। इसमें स्टाफ के लोगों ने उन्हें गुमराह किया और टेÑडिंग लाइसेंस जारी करा दिया था। यह कहने से काम चलने वाला नहीं हैं।

टेÑडिंग लाइसेंस जारी करने के पीछे बड़ा भ्रष्टाचार हुआ हैं। इसमें पूरा रैकेट शामिल था। ब्रिगेडियर भी इस बात को समझ रहे हैं, लेकिन फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं? अधिकारियों को इसमें बचा लिया गया। सेंट्री अनुभाग के अधीक्षक वीके त्यागी का तीन साल के लिए इंक्रीमेंट रोक देना पर्याप्त सजा नहीं है। इसमें कम से कम निलंबन की कार्रवाई होनी चाहिए थी, जो नहीं हुई।

उधर, सफाई का टेंडर निरस्त कर दिया, लेकिन जो भ्रष्टाचार सफाई के टेंडर में हुआ, उसमें बोर्ड ने कोई निर्णय नहीं लिया। इसमें भी कार्रवाई होनी चाहिए थी। ठेका निरस्त करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसमें भ्रष्टाचार में लिप्त सभी कैंट बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई होनी चाहिए थी, जो नहीं हुई। इसको लेकर हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई हैं, जिसमें सुनवाई होना बाकी हैं।

इसमें तत्कालीन सीईओ नावेन्द्र नाथ की गर्दन फंसी हुई हैं, उनको भी बचाने की कवायद की जा रही हैं। आखिर भ्रष्टाचार पर लीपापोती क्यों की जा रही हैं। बाउंड्री रोड स्थित 22-बी को दिये गए ट्रेड लाइसेंस के मामले में कैंट बोर्ड के अधिकारियों की खासी किरकिरी हो रही हैं। यही वजह है कि अब कैंट बोर्डकी बैठक में कार्रवाई कर चेहरे पर लगे भ्रष्टाचार के दाग को साफ करने की कोशिश भर हुई हैं। भ्रष्टाचार के दाग लगे हैं, उनकी सफाई की जा रही है।

मगर इस मामले में कैंट बोर्ड की ऐसी किरकिरी हुई हैं, कैंट बोर्ड के 22 साल में भी इस तरह का मामला सामने नहीं आया। भ्रष्टाचार का यह मामला सुर्खियों में हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बाउड्री रोड स्थित 22-बी बंगला हैं, जो वर्तमान में होटल में तब्दील कर दिया गया। आवासीय बंगले में होटल नहीं चल सकता, इस पर सील लगाने के भी बोर्ड ने आदेश किये हैं, मगर सील कब लगेगी, यह कहना मुश्किल हैं।

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