Friday, April 3, 2026
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अपनी आत्मा में रमण करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म

  • श्री अनन्तनाथ तीर्थंकर की विशेष पूजा की, महावीर पालना कार्यक्रम हुआ

जनवाणी ब्यूरो |

नजीबाबाद: श्री दिगम्बर जैन पंचायती व सरजायती मंदिर मे दशलक्षण पर्व कार्यक्रम में दसवें दिन उत्तम ब्रहमचर्य धर्म पर का पालन करने का आह्वान किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि अपनी आत्मा में रमण करना ही उत्तम ब्रहमचर्य धर्म कहलाता है।  वहीं अनन्तचतुर्दशी पर्व का महत्व बताया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने अनन्तनाथ तीर्थंकर की विशेष पूजा भी की। वहीं श्रद्धालुओं ने महावीर का पालना भी झुलाया।

मंगलवार को श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में धर्मचर्चा करते हुए जिनेश्वरदास जैन,दीपक जैन व अजय ने कहा कि अपनी वासनाओं पर नियंत्रण करना, परस्त्रियों पर निगाह न रखना ब्रहमचर्य धर्म है। जब यह धर्म आत्मा का धर्म बनता है तो मनुष्य सांसारिक भोग विलास व वासनाओं से दूर हो जाता है।

ब्रहमचर्य का मतलब है कि अपनी अत्मा में रमण करना और जब अपनी आत्मा में व्यक्ति रमण करने लगता है तो यह उत्तम ब्रहमचर्य धर्म कहलाता है। अजय ने कहा कि जैन दर्शन में आत्म कल्याण के लिए स्वाध्याय करना आवश्यक है। स्वाध्याय से ही व्यक्ति अच्छाई व बुराई में भेद कर सकता है।

उन्होंने बताया कि दशलक्षण पर्व मोक्ष मार्ग का अनुगामी बनाता है। इन पर्वो में वाह्य शुद्धि के साथ साथ आंतरिक शुद्धि भी होती है। महिलाओं ने अनन्तचतुर्दशी का उपवास रखा। जैन दर्शन में आत्म कल्याण के लिए स्वाध्याय करना आवश्यक है। स्वाध्याय से ही व्यक्ति अच्छाई व बुराई में भेद कर सकता है।

उन्होंने बताया कि दशलक्षण पर्व मोक्ष मार्ग का अनुगामी बनाता है। इस मौके पर जैन श्रद्धालुओं ने प्रात: श्री जी का अभिषेक व पूजन किया गया।

आादिनाथ भगवान की वेदी पर अक्षत जैन ने ,चन्द्रप्रभु भगवान की वेदी पर जिनेशवर दास जैन, नमन जैन, अनुभव जैन, नवकार जैन, पुनीत जैन, दीपक जैन व महावीर की वेदी व माडला पर अजय जैन ने पूजा की। सरजायती जैन मंदिर में जितेन्द्र जैन ने अभिषेक व पूजन किया।

इसके अलावा महिलाओं मे सुषमा जैन, समला जैन,सुशीला जैन, अलका जैन, छवि जैन, रैना जैन, अरनव जैन, यश जैन, ज्ञान चंद जैन, पूनम जैन, रूकमणि जैन, समीक्षा जैन, आशा जैन आदि ने भी पूजा में भाग लिया।

अनन्त चतुर्दशी पर्व पर जैन श्रद्धालुओं ने रखे व्रत

अनन्तचतुर्दशी पर्व पर जैन श्रद्धालुओं ने व्रत रखे और तीर्थंकर भगवान अनन्त नाथ की विशेष पूजा की । इसके अलावा वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक होने के कारण वासुपूज्य भगवान की विशेष पूजा की गई। इस मौके पर अनन्त चतुदर्शी व्रत रखने का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि इस व्रत के धारण करने से जीव के पाप कर्म का बंध कटता है, सभी पापो की निर्जरा होती है और उसे पुण्य का लाभ होता है।

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