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फंसाने को छेड़खानी और रंगदारी में चार्जशीट

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फंसाने को छेड़खानी और रंगदारी में चार्जशीट
  • आईजी ने एसपी सिटी को दिये जांच के आदेश, विवेचक तलब
  • सवाल उठा कि रंगदारी मांगने वाला क्यों नोटों की गड्डी दिखाएगा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अगर कोई पुलिस की खिलाफत करे तो पुलिस उसे सबक सिखाने तक पर आमादा हो जाती है और फर्जी धाराएं लगाकर जेल तक भिजवा देती है। ऐसा ही एक मामला जब मेडिकल क्षेत्र में आया तो पुलिस ने युवक के खिलाफ एक महिला से फर्जी तहरीर लिखवाई और छेड़खानी और रंगदारी की धारा लगाकर जेल भिजवा दिया। पीड़ित युवक जब आईजी से मिला और न्याय की गुहार लगाई तो आईजी ने एसपी सिटी को जांच सौंपी है। एसपी सिटी ने विवेचक को तलब कर फर्जी धाराओं में चार्जशीट क्यों लगाई गई इसकी रिपोर्ट मांगी है।

सोमवार को राजू वर्मा नामक ठेकेदार आईजी प्रवीण कुमार से मिला और कहा कि मेडिकल पुलिस ने उसे फर्जी मामले में गिरफ्तार किया और उससे 139000 भी छीन लिये और जेल भेज दिया। आईजी ने एसपी सिटी विनीत भटनागर को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने के आदेश दिये है।

ठेकेदार राजू वर्मा बाद में एसपी सिटी से मिला और बताया गत वर्ष 17 सितंबर को जब वो अपने मजदूर के साथ मंशादेवी के मंदिर के पास खड़ा था तभी कुछ लोग आए और उसके साथ मारपीट करने लगे। उन लोगों ने जेब में रखे 139000 रुपये भी निकाल लिये। राजू ने बताया कि जब उसने पुलिस को फोन किया तो पुलिस ने उसे थाने आने को कहा।

बकौल राजू जैसे ही वो थाने आया तभी इंस्पेक्टर प्रमोद गौतम ने उसका मोबाइल स्विच आफ करके रख लिया और आरोपियों से रुपये लेकर रख लिये। राजू ने बताया कि पुलिस ने एक घंटे में चालान करके उसे अगले दिन जेल भेज दिया। राजू ने एसपी सिटी को बताया कि खुद अदालत में जज ने मेडिकल थाने के विवेचक को कोर्ट में तलब करके पूछा कि क्या कोई रंगदारी मांगने के दौरान छेड़खानी भी करेगा।

रंगदारी मांगने वाला खुद एक लाख रुपये का नोट महिला को दिखाएगा। आईजी के निर्देश के बाद एसपी सिटी ने जांच शुरु कर दी है और विवेचक कालियागड़ी चौकी प्रभारी को तलब कर सख्त अंदाज में कहा कि फर्जी धाराओं में चार्जशीट क्यों लगाई गई। इस बात का जबाव दारोगा के पास नहीं था। वहीं अदालत के आदेश पर पुलिस ने ठेकेदार को 139000 रुपये के बजाय 96 हजार रुपये ही वापस किये।