पुणे/मेरठ: प्रसिद्ध छाती व सांस रोग विशेषज्ञ डॉ॰ वीरोत्तम तोमर को ए.एफ.एम.सी पुणे में आयोजित त्रिदिवसीय नैशनल पल्मोनरी कांफ्रेंस में व्याख्यान हेतु आमंत्रित किया गया। डॉ तोमर ने फेफड़ों के अंदर पानी भर जाने पर उसकी जांच व सटीक इलाज के बारे में अत्याधुनिक जानकारियां दी कि उन्होंने बताया कि जब मरीज के फेफड़ों में पानी आ जाता है तो उसे आम तौर पर प्लूरसी कहते हैं। फेफड़ों की झिल्ली में पानी आना मुख्य रूप से टी बी की बीमारी , इन्फेक्शन व निमोनिया से होती है, परंतु साथ ही अन्य बीमारियाँ जैसे कैंसर, हार्ट फेलियर, किडनी फेलियर, लिवर फेलियर, खून की कमी, शरीर में प्रोटीन की कमी, थायराइड बीमारी, गठिया रोग व कुछ अन्य कारणों से भी पानी फेफड़ों में भर जाता है।
अतः यह आवश्यक हो जाता है कि जांच के माध्यमों से यह पता करें कि पानी किन कारणों से आया है तभी उसका सटीक उपचार संभव है। फेफड़े से पानी को सुन्न करने की सुनी लगाकर, बिना कष्ट के आसानी से निकाला जा सकता है। परंतु कई बार आम चिकित्सक व मरीज, पानी सुखाने की दवाईयां देने की कहकर इसको नहीं निकलवाते जिसके परिणामस्वरूप कई बार यह पानी मवाद में बदलकर फेफड़े की झिल्ली पर चिपक जाता है जिससे फेफड़े में संक्रमण तथा फेफड़े के गलने की भी संभावना हो जाती है जिसके लिए बड़ी सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। डॉ तोमर ने मेडिकल थोरकोस्कोपी जिसमें एक बारीक दूरबीन द्वारा फेफड़े की झिल्ली की जांच तथा सफाई भी की जा सकती है के प्रयोग व आवश्यकता पर बल दिया। इस कांफ्रेंस में देश भर के 700 से अधिक चिकित्सकों व छाती रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया।

