- जब मुखिया की मिलेगी शह, तो क्या न लुटेगा शहर
- नगर निगम नहीं नर्क निगम: यहां तो लंका में ही सारे 52 गज के हैं…
- नगर निगम अफसरों के लिए लूट का सबसे आसान माध्यम है हाउस टैक्स
- पहले बनाते हैं अनाप-शनाप बिल, फिर कम करने के नाम पर चलता खेल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लंका में जब एक-दो नहीं, बल्कि अधिकांशत: जब खुद लूट में शामिल हों तो खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सूरत-ए-हाल क्या होगा? इस भ्रष्टाचार में मुखिया की संलिप्ता या फिर नकारापन। ये बड़ा सवाल हैं। फिर जब मुखिया की ही खुली शह होगी तो आप सोच सकते हैं कि काफिला क्यों न लुटेगा? यहां तो नगर निगम के नाम पर खुली लूट का धंधा खुद मुखिया चलवा रहे हैं, तभी तो लगभग डेढ़ साल में एक-दो नहीं, बल्कि तीन बार ऐसे अवसर आ चुके हैं जब नगर निगम के चेहरे पर भ्रष्टाचार की कालिख पुत गई हैं। जब खुलेआम लोगों को अनाप-शनाप बिल कम कम करने के नाम पर लूट का धंधा किया जाता है।
एंटी करप्शन की टीम ऐसे लुटेरों को रंगे हाथ पकड़ भी लेती है, लेकिन एक के हटते ही दूसरा लुटेरा सामने आ जाता है। क्योंकि उसकी शह पर खुद मुखिया का ही हाथ है। नगर निगम में लूट करने के लिए हाउस टैक्स के बिल अनाप-शनाप बनाये जाते हैं। फिर इन बिलों को कम करने के नाम पर लूट का धंधा चलता है। एक चौथाई पैसा खुद हजम कर लिया जाता है और 10 से 20 प्रतिशत धन नगर निगम के सरकारी खजाने में जमा करा दिया जाता है।
नगर निगम में लगभग डेढ़ साल से लूट का यह धंधा खुलेआम चल रहा है। और लगभग इतना ही समय नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा को मेरठ नगर निगम की गद्दी संभाले हुए हुआ है। नगर आयुक्त से जनता यह उम्मीद लगा रही थी कि अब सब कुछ शांत चलेगा तथा उनको राहत मिलेगी। लेकिन जनता यह भूल गई कि वह जिसको अपना रहनुमा समझ रही है। वही लुटेरों का सबसे बड़ा सरदार होगा।
नवल सिंह का एकछत्र चलता था राज
नगर निगम के गंगा नगर ब्रांच कार्यालय में 25 दिसंबर 2022 के आखिर में नवल सिंह राघव को भी एंटी करप्शन की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा था। नवल सिंह राघव भी हाउस टैक्स कम करने के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे थे। गंगानगर निवासी नवल सिंह राघव गंगानगर स्थित आॅफिस में तैनात था। डिफेंस कॉलोनी के गृहकर के एक मामले में एंटी करप्शन अधिकारियों ने छापेमारी की थी। यहांहाउस टैक्स कम करने के बदले में नवल सिंह राघव ने मोटी रकम मांगी।
एंटी करप्शन अधिकारियों ने केमिकल लगे नोट दिए और रिश्वत के रूप में राजस्व निरीक्षक ने ये नोट पकड़ लिये थे। दोपहर में सतीश कार्यालय पहुंचा। वहां उसने रुपये दिए। कुछ देर बाद एंटी करप्शन टीम मौके पर पहुंच गई और वह रुपये नवल सिंह के पास से बरामद किए। एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर दुर्गेश कुमार ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। राजस्व निरीक्षक नवल सिंह राघव का आधिपत्य आधे से अधिक निगम पर रहा है।
ये अपनी पदोन्नति को लेकर भी चर्चाओं में रहा है। आरोप है कि शासन ने भले ही इनकी पदोन्नति को स्वीकार नहीं किया हो, लेकिन नगरायुक्त ने उनको अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दे दी। इसको लेकर अन्य कर्मचारियों ने नाराजगी भी जताई।

नगर निगम से मिली जानकारी के मुताबिक नवल सिंह की नियुक्ति अकेंद्रीय सेवा संवर्ग के समूह घ में कर संग्रह के पद पर हुई थी। आरोप है कि इन्होंने राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति गलत तरीके से पाई है, तथा इनकी पदोन्नति राजस्व निरीक्षक के पद पर न किए जाने संबंधी पत्र जारी किया था। अब तीन साल पहले एक नगरायुक्त से इन्होंने राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति पा ली।
राजस्व निरीक्षक और अनुचर को पकड़ा
लिसाड़ी गेट के किदवईनगर निवासी मोहम्मद जफर भगत सिंह मार्केट में कपड़ों की फड़ लगाते हैं। नगर निगम की राजस्व विभाग की टीम ने उनके ऊपर 10 हजार रुपये प्रतिवर्ष हाउस टैक्स निर्धारित कर दिया था। इसी टैक्स को कम कराने के लिए जफर ने राजस्व निरीक्षक जितेंद्र कुमार से बात की तो उन्होंने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी, लेकिन पांच हजार रुपये में बात तय हो गई। राजस्व निरीक्षक ने जफर से रिश्वत की रकम देने को कहा।
जफर ने इसकी एंटी करप्शन टीम से शिकायत कर दी। एवाशन के सीओ अंशुमन मिश्रा ने टीम बनाकर सुबह 10.30 बजे ही नगर निगम में डेरा डाल दिया। दोपहर को 12.30 बजे जैसे मोहम्मद जफर ने राजस्व निरीक्षक जितेंद्र कुमार के अनुचर मुनव्वर को पांच हजार रुपये की रिश्वत दी, एंटी करप्शन की टीम ने आरोपी को दबोच लिया। आरोपी से केमिकल लगे 500-500 रुपये के नोट भी बरामद कर लिए।
इस दौरान राजस्व निरीक्षक कार्यालय से फरार हो गया। एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर बसंत अधिकारी की ओर से देहली गेट थाने में राजस्व निरीक्षक जितेंद्र कुमार और उनके अनुचर मुनव्वर पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस दौरान जितेंद्र कुमार को फरार दिखाया गया है। साथ ही उसी की पकड़ के लिए टीम को लगाया गया है।
अब से पहले भी कई बार पकड़े जा चुके हैं भ्रष्टाचारी
नगर निगम में अब से पहले राजेंद्र शर्मा, मुकेश शर्मा, रईस अहमद समेत कई टैक्स कर्मचारियों पर रिश्वत लेने के आरोप में कार्रवाई हो चुकी है। पूर्व में टैक्स निरीक्षक वीरेंद्र प्रताप को भी नगर निगम में एंटी करेप्शन की टीम ने रिश्वत लेते रंगों हाथों पकड़ा था। निगम कर्मचारियों ने एंटी करप्शन की टीम पर हमला बोल दिया था। 20 कर्मचारियों को जेल जाना पड़ा था।
नगरायुक्त ने मोबाइल कर लिया स्विच आफ
जब चारों तरफ से लूट की खबरें सामने आर्इं और सवाल जवाब होने लगे तो इनसे बचने के लिए नगरायुक्त अमित पाल शर्मा को सबसे आसान तरीका यह लगा कि मौन साध लिया जाये। उन्होंने दोपहर बाद ही अपना मोबाइल स्विच आॅफ कर लिया।
कैम्प कार्यालय पर भी स्टेनो व अर्दली को खास हिदायत दे दी गई कि सब से यही कह दें कि साहब किसी काम से बाहर गये हैं। पहले ही नवल सिंह राघव की पदोन्नति को लेकर नगरायुक्त सवालों के घेरे में आ चुके हैं। इसके बाद एक ही नेचर के अपराध होने से साफ हो गया है कि इस गोरखधंधे मेंं उनकी खुली शह है।
रिश्वतखोरों पर होनी चाहिए सख्त कार्रवाई
उधर पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार का कहना है कि हाउस टैक्स विभाग में जनता से अवैध वसूली की शिकायत अनेक बार हमारे पास भी आई है। हमने नगरायुक्त से शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए रिश्वतखोरों के हौसले बुलंद हैं। रिश्वतखोर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

