- श्रद्धालुओं के फंसे होने से परिजन परेशान
- आर्मी न जाने दे रही और न ही वापसी की अनुमति दे रही
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अमरनाथ स्थित बर्फानी बाबा की गुफा से 300 मीटर दूर फटे बादल से मची तबाही ने उन परिवारों के लिये मुसीबत खड़ी कर दी जिनके परिवार के सदस्य अमरनाथ यात्रा पर गए हैं और उनसे तकनीकी कारणों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हादसे की जानकारी मिलते ही परिजन अपने अपने सदस्यों का हाल जानने के लिये बेताब हो गए। किसी की पत्नी तो किसी के मां-बाप पूरी रात बेचैनी में काटी। जब उनके पास कुशलता का फोन आया तो परिवार के सांस में सांस आई।
शास्त्रीनगर से ग्यारह लोगों का जत्था पांच जुलाई को गया था। इसमें पार्षद अमरदीप शर्मा, कुलदीप मसूरी, सागर पोसवाल, ईशू भड़ाना, अंकुर चौधरी, मनोज आदि लोग थे। ये लोग मेरठ से टेम्पो ट्रैवल्स करके गए थे। छह जुलाई को सभी लोग बालटाल पहुंच गए थे। सात जुलाई को सुबह तीन बजे इनको अमरनाथ की यात्रा करनी थी। बालटाल से दो किमी पहले इनके जत्थे को सेना ने रोक दिया था।

इनसे आठ जुलाई को यात्रा करने को कहा गया था। शास्त्रीनगर निवासी अमरदीप शर्मा ने पत्नी रुपाली शर्मा, बेटे लक्ष्य,ग्रंथ और बेटी काव्या से शाम पांच बजे वीडियो कॉल करके बताया था कि वे सभी लोग सुरक्षित बालटाल पहुंच गए हैं। शाम सात बजे पड़ोसी मग्गो ने परिवार से कहा कि टीवी खोलकर देखो अमरनाथ में बादल फट गया है। इतना सुनते ही पत्नी रुपाली ने पति को फोन करने की बार बार कोशिश की, लेकिन कोई संपर्क नहीं हो पाया। पति को लेकर पत्नी व बच्चे बेचैन हो गए।
रुपाली शर्मा का हाल ही में आॅपरेशन हुआ है। बादल फटने की सूचना ने उनको बेहद परेशान किया और वो कई बेसुध सी हो गई। रात में 12 बजे के करीब अमरनाथ ने पत्नी को फोन करके कहा कि वो सभी लोग कुशल से हैं और आर्मी वाले न तो ऊपर जाने दे रहे हैं और न ही वापस लौटने के लिये नीचे आने दे रहे हैं। यात्रा में गए सागर पोसवाल की मां राजेश और पिता कुंवर पाल सिंह निवासी प्रवेश विहार को जैसे ही पता लगा कि अमरनाथ में बादल फटा है तो उनकी हालत खराब हो गई, क्योंकि पांच बजे के करीब सागर ने अपनी मां से बात की थी।
रिश्तेदारों ने फोन करके सागर के पिता को बताया था कि अमरनाथ में बादल फट गया है और कई लोग मारे गए हैं। शाम से लेकर सुबह तक पूरा परिवार सागर के फोन का इंतजार करता रहा। सुबह आठ बजे जब सागर का फोन आया तब जाकर परिवार ने राहत की सांस ली। इसी तरह अंकुर चौधरी का फोन जब घर पर नहीं पहुंचा तो उनके घर वाले परेशान रहे और उन्होंने अमरनाथ शर्मा के घर फोन करके जानकारी ली।

वहीं रजबन बाजार निवासी अरुणा का पति 22 जून को अमरनाथ के लिए रवाना हो गए थे। पति विनोद राठौर अमरनाथ में ही फंसे हुए हैं। पीड़ित महिला के पति ने बताया कि अमरनाथ में हुए हादसे का मंजर बेहद ही खौफनाक था। ऐसे में अब पीड़ित महिला और उसकी 10 साल की बेटी अपने पिता की चिंता में है कि उनके पिता कब मेरठ वापस लौटेंगे।
अरुणा ने बताया कि पति की सलामती के लिए बाबा बफार्नी के चरणों में एक अखंड ज्योति जला दी है। अरुणा ने कहा कि अखंड ज्योत तब तक जलती रहेगी जब तक उसका पति मेरठ वापस नहीं आ जाते। अमरनाथ सेवा समिति के पदाधिकारी सुरेंद्र साहू ने बताया कि अमरनाथ के दरबार में इस वक्त मेरठ से लगभग 10 लोग फंसे हुए हैं सभी लोग सुरक्षित हैं।
खाने पीने की दिक्कत नहीं सुरक्षा मजबूत
अमरनाथ यात्रा पर गए लोगों का कहना था कि जो शिविर लगाए गए हैं। उसमें किसी भी तरह की परेशानी नहीं है। खाना पीना और दवाओं का कोई संकट नहीं है। सेना ने कह दिया है कि अग्रिम आदेश तक शिविर में रहना होगा क्योंकि अमरनाथ में लगातार बारिश हो रही है। जत्थे में गए लोगों ने बताया कि सेना के लोग बहुत ख्याल रख रहे हैं बस बाबा बर्फानी के दर्शन हो जाएं फिर वापस आ जाएंगे।
राज्यपाल को किया ट्वीट
दिल्ली रोड स्थित कृष्णा वाटिका निवासी तुषार गुप्ता और तीन साथियों पंकज अग्रवाल और मोहित वर्मा ने यात्रा बालटाल में रोक देने के बाद जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा को ट्वीट कर कहा कि हम लोग बालटाल में फंसे हुए हैं और यात्रा के बारे में पता नहीं है कि भविष्य क्या होगा। ट्वीट में प्रशासनिक मदद मांगी गई।
भूकंप के झटके लगे
बालटाल में फंसे जत्थे के लोगों का कहना था कि बादल फटने की आवाज इस कदर भयावह थी कि 18 किमी दूर से सुनाई दी थी। पहले ऐसा लगा कि जमीन खिसक रही हो और बाद में तेज धमाका सुनाई दिया। बाद में पता लगा कि गुफा से थोड़ी दूरी पर बादल फटा है।
एक सिम से काम चलाया
अमरनाथ यात्रा के जत्थे में गए अमरनाथ शर्मा ने एक सिम खरीदा जिसका नेटवर्क काम कर रहा था। उस सिम के जरिये सभी 11 लोग अपने अपने परिवार से बात कर रहे हैं।

