Sunday, February 15, 2026
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जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बरकरार, आयुक्त गढ़वाल मंडल ने डीएम के आदेश पर लगाई रोक

जनवाणी ब्यूरो |

हरिद्वार: जिला पंचायत की राजनीति में कुछ ही घंटे बाद बाजी पलट गई है। गढ़वाल मंडल के आयुक्त ने जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा की ओर से दायर किए गए रिवीजन पर जिलाधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी है।

दरअसल, जिलाधिकारी हरिद्वार ने जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा को रुड़की नगर निगम क्षेत्र का मूल निवासी मानते हुए उनकी जिला पंचायत सदस्य निरस्त कर दी थी। जिलाधिकारी के इस आदेश के खिलाफ जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा ने आयुक्त गढ़वाल मंडल के यहां रिवीजन दायर किया।

जिस पर आज सुनवाई हुई जहां पर अध्यक्ष जिला पंचायत सुभाष वर्मा की ओर से रुड़की नगर निगम के विस्तार के संबंध में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट संबंधी फैसले के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। जिसमें बताया गया कि हाई कोर्ट का वह आदेश आज भी रुड़की नगर निगम पर लागू होता है।

जिसमें डबल बेंच ने आदेश दे रखे हैं कि रामपुर और पाडली रुड़की नगर निगम में रहेंगे और साउथ सिविल लाइंस व आफ नगर आदि नये रुड़की नगर निगम से बाहर रहेंगे। इस आदेश के बाद कोई ऐसा आदेश नहीं आया जिसमें कहा गया हो कि नया क्षेत्र शामिल रहेगा।

इसीलिए हाई कोर्ट का के डबल बेंच का रामपुर पाडली रुड़की नगर निगम में और साउथ सिविल लाइंस आसफ नगर नगर निगम से बाहर रखे जाने संबंधी आदेश लागू है। इस आदेश के मुताबिक सुभाष वर्मा का गांव आसफनगर रुड़की नगर निगम क्षेत्र का हिस्सा नहीं है। आयुक्त गढ़वाल मंडल की अदालत में जिला पंचायत अध्यक्ष सुभाष वर्मा की ओर से यह भी जानकारी दी गई सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश दिया था।

जिसमें कहा गया था कि हाईकोर्ट के आदेश में उनकी ओर से दिए गए स्थगन आदेश बाधा उत्पन्न नहीं करेगा। हाईकोर्ट अपना आदेश सुनाने के लिए स्वतंत्र है। इसके बाद ही हाईकोर्ट ने रामपुर पाडली को रुड़की नगर निगम में शामिल किया और साउथ सिविल लाइंस क्षेत्र को रुड़की नगर निगम से बाहर किया।

इसके बाद जो सुप्रीम कोर्ट की ओर से चुनाव संबंधी आदेश दिए गए उसमें यह कहीं नहीं कहा गया कि रामपुर पाडली को रुड़की नगर निगम से बाहर रखा जाता है और साउथ सिविल लाइंस हुआ है आसिफ नगर को नगर निगम के अंदर। इसीलिए साउथ सिविल लाइंस और आसफनगर आज भी रुड़की नगर निगम से बाहर हैं रामपुर और पाडली हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक रुड़की नगर निगम का हिस्सा है।

आयुक्त गढ़वाल मंडल की अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद जिलाधिकारी हरिद्वार के आदेश पर रोक लगा दी और अगली सुनवाई के लिए तिथि मुकर्रर की है। वही कमिश्नर की अदालत द्वारा है जिलाधिकारी के आदेश पर रोक लगाए जाने से सुभाष वर्मा के विरोधी खेमे में मायूसी छा गई है। उधर विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला अभी काफी दिनों तक कानूनी दांवपेच में ही उलझा रहेगा।

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